सपा-बसपा 'ब्रेकअप' के बाद RLD का झटका, उपचुनाव के लिए किया ये ऐलान

लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से भाजपा के नौ विधायकों और सपा, बसपा के एक-एक विधायक के सांसद बनने के बाद रिक्त हुयी 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव संभावित हैं.

News18Hindi
Updated: June 5, 2019, 1:46 PM IST
सपा-बसपा 'ब्रेकअप' के बाद RLD का झटका, उपचुनाव के लिए किया ये ऐलान
सपा-बसपा और रोलोद, तीनों की राहें अलग
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Updated: June 5, 2019, 1:46 PM IST
उत्तर प्रदेश में सियासी महाभारत थम नहीं रहा है. समाजवादी पार्टी (SP) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के आगामी उपचुनावों में अकेले मैदान में उतरने के फैसले के एक दिन बाद ही राष्ट्रीय लोक दल (RLD) ने भी बड़ा ऐलान कर दिया है. रालोद ने फैसला किया है कि सपा-बसपा की तरह ही वो भी उपचुनाव अपने बलबूते चुनाव लड़ेगी. उल्लेखनीय है कि यूपी में कुल 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं.

हालांकि रालोद के यूपी अध्यक्ष मसूद अहमद ने कहा कि गठबंधन पर अभी विचार होगा. लेकिन आगामी चुनाव में सहयोगी पार्टियों की तरह ही उनके उम्मीदवार भी अपने बलबूते मैदान में कूदेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि इस पर अंतिम फैसला पार्टी के मुखिया अजीत सिंह और जयंत चौधरी लेंगे. अभी यह तय नहीं कि रालोद आगामी चुनाव में कुछ कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, लेकिन चुनाव अकेले ही लड़ेगी.

असल में हाल ही में संपन्न हुये लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से भाजपा के नौ विधायकों और सपा, बसपा के एक-एक विधायक के सांसद बनने के बाद रिक्त हुयी 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव संभावित हैं. इससे पहले गठबंधन को लोकसभा चुनाव में उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं मिलने के लगभग दस दिन बाद मायावती ने दिल्ली में बयान जारी कर कहा कि अपने बलबूते उपचुनाव लड़ने की प्रमुख वजह राजनीतिक विवशता है.

हालांकि उन्होंने सपा के साथ गठबंधन पर ‘परमानेंट ब्रेक’ लगने की अटकलों को खारिज करते हुये कहा, ‘‘सपा के लोगों ने इस चुनाव में एक अच्छा मौका तो गंवा दिया लेकिन आगे इन्हें इसी हिसाब से बहुत अधिक तैयारी करने की जरूरत है. यदि मुझे लगेगा कि सपा प्रमुख अपने राजनीतिक कार्यों को करने के साथ अपने लोगों को ‘मिशनरी’ बनाने में कामयाब हो जाते हैं, तो फिर हम लोग ज़रूर आगे भी मिलकर साथ चलेंगे. अर्थात अभी हमारा कोई ‘ब्रेकअप’ नहीं हुआ है.’’



अखिलेश यादव पर उठाया था सवाल
मायावती ने कहा था, '' अगर वे (अख‌िलेश) नहीं हो पाते हैं, तो फिर हम लोगों का अकेले ही चलना ज़्यादा बेहतर होगा. इसीलिए वर्तमान स्थिति में हमने उत्तर प्रदेश में कुछ सीटों पर होने वाले उपचुनाव को फिलहाल अकेले ही लड़ने का फैसला किया है.’’
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अखिलेश यादव ने कहा- 'मंजूर है'
इस बीच यादव ने मायावती के बयान पर गाजीपुर में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा, 'अगर गठबंधन टूटा है, या गठबंधन के बारे में जो बात रखी गयी है, तो मैं उस पर बहुत सोच समझकर विचार करूंगा.' इसके बाद उन्होंने भी अकेले चुनाव लड़्ने की बात पर मुहर लगा दी. उन्होंने कहा, 'जब उपचुनाव में हमारा गठबंधन है ही नहीं तो हम अपनी तैयारी करेंगे. सपा भी 11 सीटों पर पार्टी के वरिष्ठ लोगों से राय मशविरा करके अकेले चुनाव लड़ेगी. अगर रास्ते अलग-अलग हैं तो उसका भी स्वागत है.'

इससे पहले, अखिलेश ने आजमगढ़ में भी कहा, '2022 में उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनेगी. यही हमारी रणनीति है.'

ऐसे रहे थे सपा-बसपा के ऐतिहासिक गठबंधन का नतीजा
लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से भाजपा को 62 और सपा-बसपा-रालोद गठबंधन को 15 सीट मिली. इनमें 10 सीट बसपा को जबकि पांच सीट सपा को मिली. दोनों दल 2014 में अलग-अलग चुनाव लड़े थे और इसमें सपा को 5 और बसपा को एक भी सीट नहीं मिली थी.

वहीं, भाजपा नेता और उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने सपा बसपा के अपने बलबूते उपचुनाव लड़ने पर चुटकी लेते हुए कहा कि इस बेमेल गठबंधन का यही अंजाम होना था.



मायावती ने अकेले चुनाव लड़ने के पीछे राजनीतिक विवशता को नजरंदाज नहीं किये जा सकने वाली मजबूरी बताया. उन्होंने कहा, ‘‘राजनीतिक विवशताओं को भी नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता है. अभी संपन्न हुए लोकसभा चुनाव के परिणाम पर बड़े दुःख के साथ यह कहना पड़ता है कि इसमें सपा का ‘बेस वोट’ अर्थात् यादव समाज, यादव-बाहुल्य सीटों पर भी सपा के साथ मज़बूती से टिका नहीं रह सका.’’

'अन्दर ही अन्दर, ना जाने किस बात की नाराज़गी'
मायावती ने अपने बलबूते उपचुनाव लड़ने के फैसले के बारे में दलील दी, ‘‘अन्दर ही अन्दर, ना जाने किस बात की नाराज़गी के तहत, भितरघात हुआ और यादव बाहुल्य सीटों पर भी, सपा के मज़बूत उम्मीदवार हार गये. ऐसे में अन्य सीटों के साथ कन्नौज में डिम्पल यादव, बदायूँ में धर्मेन्द्र यादव और फिरोज़ाबाद में रामगोपाल यादव के बेटे का भी हारना, हमें सोचने पर मजबूर करता है. इनकी (सपा) हार का भी हमारी पार्टी को बहुत दुख है और हमें यह आगे के लिए भी सोचने पर मजबूर करती है.’’

 

मायावती की सपा को नसीहत
मायावती ने सपा को नसीहत देते हुये कहा, ‘‘ उन्हें (सपा कार्यकर्ताओं) हर हाल में खुद को बसपा के कैडर की तरह ही, तैयार होने के साथ भाजपा की घोर जातिवादी, सांप्रदायिक और जनविरोधी नीतियों से उत्तर प्रदेश, देश और समाज को मुक्ति दिलाने के लिये अधिक कठोर संघर्ष करते रहने की सख्त जरूरत है.’’

मायावती ने लोकसभा चुनाव के परिणाम में ईवीएम की विश्वसनीयता पर भी संदेह व्यक्त किया. उन्होंने कहा, ‘‘यह चुनाव परिणाम हमें सोचने पर मजबूर करता है. हालांकि उत्तर प्रदेश में जनअपेक्षा के विपरीत आये चुनाव परिणाम में ईवीएम की भूमिका भी खराब रही है. यह भी किसी से छुपा नहीं है.’’ (भाषा इनपुट के साथ)

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First published: June 5, 2019, 11:52 AM IST
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