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एक IAS अफसर के फरमान से सीएम शिवराज के सपने पर मंडराया संकट !

एक IAS अफसर के फरमान से सीएम शिवराज के सपने पर मंडराया संकट !

DEMOPIC

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मध्यप्रदेश के ग्रामीण इलाकों की 15 हजार से ज्यादा सड़कों पर संकट खड़ा हो गया है. इस मामले को लेकर बीजेपी के नेताओं पर दबाव भी बढ़ने लगा है. पार्टी मुख्यालय को भी शिकायतें की जा रही हैं. सरकार से जल्द से जल्द दखल देने की मांग की जा रही है.

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    मध्यप्रदेश के ग्रामीण इलाकों की 15 हजार से ज्यादा सड़कों पर संकट खड़ा हो गया है. इन सड़कों को बनाने का काम शुरू हो गया था, लेकिन विभाग से बजट राशि रोकने के बाद काम ठप पड़ गया है.

    दरअसल, इन सड़कों को 'मुख्यमंत्री खेत सड़क योजना' के तहत बनाया जा रहा था. मनरेगा के अंतर्गत बन रही इन सड़कों को मज़दूरों से बनवाया जा रहा था.

    मई में विभागीय समीक्षा के बाद जब ये पता लगा कि इन सड़कों की लागत मशीन की तुलना में ज्यादा है, तो पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया ने बजट जारी करने पर रोक लगा दी. अब इन सारी सड़कों पर काम जून से पूरी तरह बंद पड़ा हुआ है.

    बजट रोके जाने के बाद प्रदेश के ग्रामीण जनप्रतिनिधियों में हड़कंप का माहौल है. 16 हजार में से केवल 901 सड़कों का काम ही पूरा हो पाया है.

    इस मामले को लेकर बीजेपी के नेताओं पर दबाव भी बढ़ने लगा है. पार्टी मुख्यालय को भी शिकायतें की जा रही हैं. सरकार से जल्द से जल्द दखल देने की मांग की जा रही है.

    पूरा मामला-

    - 2013 में सीएम शिवराज ने किया था खेत सड़क योजना का ऐलान
    - पंचायतों से बुलाये गये थे मुरम रोड के प्रस्ताव
    - एमपी के 53 हज़ार गांवों से मिले 58 हजार सड़कों के प्रस्ताव
    - पंचायत विभाग ने कुल 21 हज़ार सड़कों के दी मंजूरी
    - 16 हज़ार सड़कों का निर्माण काम शुरू हुआ
    - 901 सड़कों का काम ही पूरा हो पाया
    - जून से बजट रोकने पर सड़क का काम बंद हो गया
    - एसीएस आरएस जुलानिया के फरमान से रोका बजट
    - सीएम शिवराज की महत्वाकांक्षी योजना पर संकट

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