LAC के पास युद्धस्‍तर पर जारी निर्माण कार्य बना चीन के आंखों की किरकिरी, लद्दाख में रिकॉर्ड समय में 3 पुल तैयार

LAC के पास युद्धस्‍तर पर जारी निर्माण कार्य बना चीन के आंखों की किरकिरी, लद्दाख में रिकॉर्ड समय में 3 पुल तैयार
लद्दाख में सेना और वायुसेना भी तैयारी में जुटी है.

लद्दाख (Ladakh) में LAC पर चीन से जारी गतिरोध (India China tensions) के बीच भारत की ओर से सीमा तक सेना (Indian Army) और साजोसामान की पहुंच आसान करने के लिए क्षेत्र में सड़क निर्माण का कार्य युद्धस्‍तर पर हो रहा है.

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नई दिल्‍ली. लद्दाख (Ladakh) में वास्‍तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन से जारी गतिरोध (India China tensions) के बीच भारत की ओर से सीमा तक सेना (Indian Army) और साजोसामान की पहुंच आसान करने के लिए क्षेत्र में सड़क निर्माण का कार्य युद्धस्‍तर पर हो रहा है. बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) इस क्षेत्र में तेजी से सड़कें और पुल बना रहा है. इसके तहत लेह-लद्दाख (Leh ladakh) में रिकार्ड समय में 3 अलग-अलग पुल बनाकर तैयार किए गए हैं. ये पुल नीमू, उले टोपो और बसगो में बनाए गए हैं. साथ ही सड़कों के चौड़ीकरण का भी काम चल रहा है.

बीआरओ की ओर से लेह-लद्दाख में सीमावर्ती इलाकों तक सैन्‍य पहुंच आसान करने के मकसद से 3 साल में 40 पुलों का निर्माण कार्य हो रहा है. इनमें से 20 पुलों को बनाया भी जा चुका है. इसके साथ ही क्षेत्र में कई सामरिक सड़कें भी बनाने का काम तेजी से जारी है. 2022 तक क्षेत्र में ऐसी 66 सामरिक सड़कें बनाई जानी हैं.

लेह से खारदूंगा ला होते हुए सियाचिन और दौलत बेग ओल्‍डी तक जाने वाली सड़क को भी दुरुस्‍त किया जा रहा है. नए पुल निर्माण के साथ ही पुराने पुलों को भी इस तरह से तैयार किया जा रहा है कि सेना के भारी वाहन और साजोसामान को इनसे गुजरने में परेशानी ना हो.



बता दें कि वायुसेना भी पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सीमा पर बढ़ते तनाव के मद्देनजर वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास अपने सभी प्रमुख केंद्रों पर फ्रंटलाइन लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों तथा परिवहन बेड़े की तैनाती बढ़ा रही है. वायु सेना ने क्षेत्र में भारत की सैन्य तैयारियों को और मजबूत करने के लिए कई अग्रिम अड्डों तक भारी सैन्य उपकरणों और हथियार पहुंचाने के लिए सी-17 ग्लोबमास्टर 3 परिवहन विमान और सी-130 जे सुपर हरक्युलिस के बेड़े को लगाया है.

जानकारी के मुताबिक वायुसेना भारत और चीन के बीच 3,500 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर विभिन्न अग्रिम क्षेत्रों में सैनिकों को पहुंचाने के लिए अपने इलयुशिन-76 बेड़े का भी इस्तेमाल कर रही है.
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