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रोहिंग्या शरणार्थियों ने की रिहाई की मांग, सुप्रीम कोर्ट में 25 मार्च को सुनवाई

रोहिंग्या शरणार्थियों ने की रिहाई की मांग, सुप्रीम कोर्ट में 25 मार्च को सुनवाई

पीठ में मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे के अलावा जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रह्मण्यम भी शामिल हैं. (फाइल फोटो)

पीठ में मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे के अलावा जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रह्मण्यम भी शामिल हैं. (फाइल फोटो)

Rohingya Refugees Case: याचिका में कहा गया है 'ऐसा करना भारत (India) की शरणार्थियों को सुरक्षित रखने की प्रतिबद्धता के खिलाफ जाएगा. और शरणार्थियों को वापस उस जगह पर भेजना जहां वे उत्पीड़न का सामना करते हैं, यह दायित्वों के खिलाफ होगा.'

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    नई दिल्ली. रोहिंग्या (Rohingya) से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंजूरी दे दी है. इस याचिका में जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में हिरासत में लिए गए रोहिंग्या को तत्काल रूप से रिहा करने और म्यांमार (Myanmar) भेजने से रोकने के आदेश की मांग की गई है. अदालत इस याचिका पर आगामी 25 मार्च को सुनवाई करेगा. यह याचिका शरणार्थियों की तरफ से एड्वोकेट प्रशांत भूषण के जरिए दायर की गई थी.

    याचिकाकर्ता शरणार्थी मोहम्मद सलीमुल्लाह की तरफ से दाखिल हुई याचिका में कहा है 'इन शरणार्थियों को अवैध तरीके से हिरासत में लिया गया और होल्डिंग सेंटर में तब्दील होने वाली जम्मू उप जेल में बंद कर दिया गया.' याचिका में जम्मू आईजीपी मुकेश सिंह का जिक्र किया गया है. याचिका में लिखा गया है कि सिंह ने कहा है कि उनके दूतावास में सत्यापन के बाद इन्हें म्यांमार वापस भेज दिया जाएगा.



    मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने वकील प्रशांत भूषण की दलीलों पर गौर किया कि हिरासत में लिए गए रोहिंग्या शरणार्थियों को म्यांमार प्रत्यर्पित किया जा सकता है जहां सेना ने तख्तापलट कर दिया है और हिंसा हो रही है. पीठ ने पहले कहा था कि इस मामले पर तत्काल सुनवाई की जरूरत नहीं है. पीठ ने कहा, ‘ठीक है फिर हम गुरुवार को रोहिंग्या मामले पर सुनवाई करेंगे.’ पीठ में जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रह्मण्यम भी शामिल हैं.

    याचिका में कहा गया है 'ऐसा करना भारत की शरणार्थियों को सुरक्षित रखने की प्रतिबद्धता के खिलाफ जाएगा. और शरणार्थियों को वापस उस जगह पर भेजना जहां वे उत्पीड़न का सामना करते हैं, यह दायित्वों के खिलाफ होगा.' याचिका के अनुसार 'ये भारत में रहे सभी रोहिंग्या लोगों के अनुच्छे 21 के अधिकारों का हनन है.'

    खास बाता है कि पहले इस महीने में जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने फॉरेनर्स एक्ट के तहत कठुआ के हीरानगर उप जेल में होल्डिंग सेंटर्स स्थापित किए थे. साथ ही इसमें जम्मू से लाकर यहां महिलाओं और बच्चों समेत 168 रोहिंग्या शरणार्थियों को रखा गया था. द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि ये अप्रवासी पासपोर्ट एक्ट की धारा (3) की शर्तों के मुताबिक, वैध पासपोर्ट नहीं रखे थे.

    (भाषा इनपुट के साथ)

    Tags: Prashant bhushan, Rohingya Refugees, Supreme Court

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