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जम्मू-कश्मीर में गैरकानूनी ढंग से रह रहे 168 रोहिंग्या होल्डिंग सेंटर भेजे गए

रोहिंग्या मुसलमान (फ़ाइल फोटो)

रोहिंग्या मुसलमान (फ़ाइल फोटो)

Rohingya Muslims: रिपोर्ट के मुताबिक, रोहिंग्या मुसलमानों और बांग्लादेशी नागरिकों सहित 13,700 से ज्यादा विदेशी नागरिक जम्मू और साम्बा जिलों में बसे हुए हैं.

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श्रीनगर.  जम्मू-कश्मीर में 168 रोहिंग्या मुसलमानों (Rohingya Refugees) को होल्डिंग सेंटर में भेज दिया गया है. इसमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं. ये सेंटर कठुआ के हीरानगर जेल में बनाया गया है. शनिवार से ही जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने जम्मू में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों की बायोमिट्रिक जानकारी सहित अन्य विवरण जुटाने का काम शुरू कर दिया है. बता दें कि रोहिंग्या म्यांमार के बांग्लाभाषी अल्पसंख्यक मुसलमान हैं. अपने देश में प्रताड़ना और उत्पीड़न से परेशान होकर काफी संख्या में रोहिंग्या बांग्लादेश के रास्ते अवैध तरीके से भारत में प्रवेश करके जम्मू सहित देश के अलग-अलग भागों में बस गए हैं.

विदेश अधिनियम की धारा 3 (2) ई के तहत ये ‘होल्डिंग सेंटर’ बनया गया है. एक होल्डिंग सेंटर में कम से कम 250 लोग रह सकते हैं. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक इन सबके पास अप्रवासी पासपोर्ट अधिनियम की धारा (3) के मुताबिक जरूरी पासपोर्ट नहीं थे. लिहाजा ऐसे प्रवासियों की पहचान करने की प्रक्रिया जारी है.

वेरिफिकेशन का काम जारी
अधिकारियों ने कहा कि उन्हें होल्डिंग सेंटर भेजने के बाद इन सबकी राष्ट्रीयता को लेकर वेरिफिकेशन किया जाएगा, जिसके बाद अवैध रूप से रह रहे लोगों को हटाया जाएगा. अधिकारियों ने बताया कि कड़ी सुरक्षा के बीच एमएएम स्टेडियम में म्यामां से आए रोहिंग्या मुसलमानों का वेरिफिकेशन किया गया. उन्होंने बताया कि प्रक्रिया के तहत उनकी बायोमिट्रिक जानकारी, रहने का स्थान आदि सहित अन्य सूचनाएं जुटायी गईं. म्यामां के नागरिक अब्दुल हनान ने बताया, ‘कोविड-19 की जांच के बाद हमने एक फॉर्म भरा. हमारे फिंगरप्रिंट लिए गए.’
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6 हज़ार से ज्यादा रोहिंग्या
कुछ राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने केन्द्र सरकार से अनुरोध किया है कि वे रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को तुरंत उनके देश वापस भेजने की दिशा में कदम उठाएं. उनका आरोप है कि इन दोनों से देश को खतरा है. रोहिंग्या मुसलमानों और बांग्लादेशी नागरिकों सहित 13,700 से ज्यादा विदेशी नागरिक जम्मू और साम्बा जिलों में बसे हुए हैं. सरकारी आंकड़े के अनुसार, 2008 से 2016 के बीच उनकी जनसंख्या में 6,000 से ज्यादा की वृद्धि हुई है. (भाषा इनपुट के साथ)
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