रोमिला थापर का JNU को CV भेजने से इनकार, कहा- संस्थान को सड़क छाप बना रहे ये लोग

रोमिला थापर (Romila Thapar) के मुताबिक, जब एमेरिटस प्रोफेसर (Emeritus Professor) का पद उन्हें दिया गया था तो उस समय कहा गया था कि पद उनके लिए आजीवन है.

News18Hindi
Updated: September 6, 2019, 9:28 AM IST
रोमिला थापर का JNU को CV भेजने से इनकार, कहा- संस्थान को सड़क छाप बना रहे ये लोग
रोमिला थापर का JNU को CV भेजने से इनकार, कहा- संस्थान को सड़क छाप बना रहे ये लोग .
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Updated: September 6, 2019, 9:28 AM IST
नई दिल्ली, इतिहासकार रोमिला थापर (Romila Thapar) से जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने उनका 'करिकुलम विटे' (CV) मांगा था. इस मुद्दे पर रोमिला थापर ने अपना सीवी भेजने से साफ इनकार कर दिया है. उन्होंने विश्वविद्यालय को इस संदर्भ में खत लिखकर अपना रुख साफ कर दिया है. द हिंदू को दिए अपने इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय सीवी भेजने का उनका कोई इरादा नहीं है. थापर के मुताबिक, जब एमेरिटस प्रोफेसर का पद उन्हें दिया गया था तो उस समय कहा गया था कि पद उनके लिए आजीवन है.

उनलोगों ने अब नियमों को बदला है और उसे नए तरीके से लागू कर रहे हैं. साथ ही थापर ने कहा कि ये पद आपके अबतक के लिए काम के आधार पर दिया जाता है, ये भविष्य की उम्मीदों पर कैसे आधारित हो सकता है? साथ ही थापर ने कहा कि ये लोग जेएनयू को सड़क छाप संस्थान बना रहे हैं. ये सारी चीजें अनजाने में नहीं हो रहा, जानबूझकर किया जा रहा है.

क्या है जेएनयू का पक्ष?

वहीं जेएनयू ने कहा कि पहले की नियुक्तियों में बहुत खामियां थीं और यह प्रक्रिया को व्यापक बनाने के लिए किया गया है, ताकि अधिक से अधिक प्रोफेसर एमेरिटी नियुक्त किए जा सकें. विश्वविद्यालय का यह बयान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के उस आरोप के एक दिन बाद आया है, जिसमें उसने विश्वविद्यालय पर आरोप लगाया है कि वह इतिहासकार रोमिला थापर को अपना सीवी जमा करने के लिए भेजे गए पत्र को लेकर "सफेद झूठ" फैला रहा है.

शिक्षक संघ की मांग है कि 12 प्रोफेसर एमेरिटी को भेजे गए ऐसे पत्रों को तत्काल वापस लेने के अलावा निजी तौर पर माफी मांगी जाए. विश्वविद्यालय ने कहा, "किसी भी एमेरिटस प्रोफेसर को निशाना नहीं बनाया जा रहा, जैसा कि गलत आरोप लगाया जा रहा है." और "ये सिर्फ एक नियम लागू करने के संबंध में लाया गया, जो विश्वविद्यालय के नियम का हिस्सा है."

वर्तमान में जेएनयू में 21 प्रोफेसर एमेरिटी हैं

जेएनयू ने एक बयान में कहा, "कई खबरों और सोशल मीडिया पर व्यक्त किए जा रहे विचारों में जेएनयू में प्रोफेसर एमेरिटस मुद्दे पर एक तरफा विचार दिये जा रहे हैं. स्पष्ट तौर पर विश्वविद्यालय के नियमों एवं व्यवस्था पर आधारित प्रशासनिक सुधारों और नियमों के प्रयोग को बदनाम करने के पीछे एक मकसद है." विश्वविद्यालय ने कहा कि पिछले साल, जेएनयू कार्यकारी परिषद द्वारा उठाए गए एक कदम में विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एमेरिटस के पदों को बरकरार रखने और नियुक्तियों की प्रक्रिया को नियमित करना शामिल था.
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जेएनयू कार्यकारी परिषद विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी वैधानिक संस्था है जिसमें डीन, अध्यक्ष और जेएनयू के बाहर के प्रख्यात विद्वान शामिल होते हैं. विश्वविद्यालय ने कहा, "हमारा मकसद प्रक्रिया को व्यापक, समयबद्ध बनाना और चयन को नियम आधारित करना था ताकि विश्वविद्यालय के विभिन्न स्कूलों एवं विषयों में प्रोफेसर एमेरिटी की नियुक्ति की जा सके." वर्तमान में जेएनयू में 21 प्रोफेसर एमेरिटी हैं.

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First published: September 6, 2019, 9:28 AM IST
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