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नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में कौन से दल होंगे शामिल और कौन कर रहा बहिष्कार? जानें सारी पार्टियों का रुख

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 28 मई को संसद के नए भवन का उद्घाटन करेंगे. (फाइल फोटो- पीटीआई)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 28 मई को संसद के नए भवन का उद्घाटन करेंगे. (फाइल फोटो- पीटीआई)

New Parliament Building Inauguration: कांग्रेस सहित 20 विपक्षी ने नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ह ...अधिक पढ़ें

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार 28 मई को नए संसद भवन का उद्घाटन करेंगे. हालांकि इससे लेकर सत्ताधारी बीजेपी और विपक्षी दलों के बीच संग्राम छिड़ चुका है. एक ओर जहां कांग्रेस सहित 20 विपक्षी ने नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों कराने की मांग करते हुए इस समारोह के बहिष्कार का ऐलान किया है. तो वहीं बीजेपी नीत एडीए गठबंधन में शामिल 14 दलों ने विपक्ष के रुख की आलोचना करते हुए इसे देश के लोकतांत्रिक लोकाचार और संवैधानिक मूल्यों का घोर अपमान करार दिया है.

उद्घाटन समारोह का बहिष्कार कर रहे ये विपक्षी दल
कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रविड मुन्नेत्र कषगम (डीएमके), जनता दल (यूनाइटेड), आम आदमी पार्टी (AAP), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम), समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), झारखंड मुक्ति मोर्चा और नेशनल कांफ्रेंस के अलावा इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, केरल कांग्रेस (मणि), रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, विदुथलाई चिरुथिगल काट्ची (वीसीके), मारुमलार्ची द्रविड मुन्नेत्र कषगम (एमडीएमके) और राष्ट्रीय लोकदल ने उद्घाटन समारोह का संयुक्त रूप से बहिष्कार करने की घोषणा की है.

इसके अलावा तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर की भारत राष्ट्र समिति पार्टी (BRS) और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने भी उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करने की घोषणा की है.

बहिष्कार के पीछे विपक्ष की दलील
विपक्ष के 19 दलों ने नए संसद के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करने का ऐलान करते हुए एक संयुक्त बयान जारी कर आरोप लगाया, ‘राष्ट्रपति मुर्मू को पूरी तरह से दरकिनार करते हुए नए संसद भवन का उद्घाटन करने का प्रधानमंत्री मोदी का निर्णय न केवल राष्ट्रपति का घोर अपमान है, बल्कि हमारे लोकतंत्र पर सीधा हमला है…’

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विपक्षी दलों का कहना है कि, भारत के संविधान के अनुच्छेद 79 में कहा गया है कि ‘संघ के लिए एक संसद होगी, जिसमें राष्ट्रपति और दो सदन होंगे जिन्हें क्रमशः राज्यसभा और लोकसभा के रूप में जाना जाएगा.’ उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रपति न केवल राष्ट्राध्यक्ष होते हैं, बल्कि वह संसद का अभिन्न अंग भी हैं क्योंकि वही संसद सत्र आहूत करते हैं, सत्रावसान करते हैं और साल के प्रथम सत्र के दौरान दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित भी करते हैं. संक्षेप में, राष्ट्रपति के बिना संसद कार्य नहीं कर सकती है. फिर भी, प्रधानमंत्री ने उनके बिना नए संसद भवन का उद्घाटन करने का निर्णय लिया.’

एनडीए में 14 दल समारोह में होंगे शामिल
बीजेपी के नेतृ्त्व वाली सत्ताधारी एनडीए के 14 घटक दलों शिवसेना, राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी, अपना दल (सोनेवाल), एआईएडीएमके, एनपीपी, एनडीपीपी, आजसू, एसकेएम, एमएनएफ, एनपीएफ, आरपीआई (ए), एजीपी, पीएमके, टीएमसी, यूपीपीएल ने ऐलान किया है कि वह नए संसद के उद्घाटन समारोह में शरीक होंगे.

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उन्होंने एक संयुक्त बयान में विपक्षी दलों से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया और कहा कि अगर वे (विपक्षी दल) अपने रुख पर कायम रहते हैं तो भारत के लोग ‘हमारे लोकतंत्र और उसके चुने हुए प्रतिनिधियों के अपमान को’ माफ नहीं करेंगे.

एनडीए से इतर ये दल भी होंगे शामिल
एनडीए में शामिल दलों के अलावा ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक की बीजू जनता दल, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP), राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की तेलगू देशम पार्टी (टीडीपी) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने कहा है कि वे संसद भवन के उद्घाटन समारोह में शरीक होंगे.

Tags: BJP, Congress, NDA, Parliament

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