RPF ने कंफर्म टिकट हथियाने में इस्तेमाल होने वाले ‘रीयल मैंगो’ सॉफ्टवेयर का पता लगाया, रोक लगी

RPF ने कंफर्म टिकट हथियाने में इस्तेमाल होने वाले ‘रीयल मैंगो’ सॉफ्टवेयर का पता लगाया, रोक लगी
इस मामले में पश्चिम बंगाल, असम, बिहार एवं गुजरात से 50 गिरफ्तारियां भी की गई हैं (सांकेतिक फोटो)

आरपीएफ के महानिदेशक (Director General of RPF) अरूण कुमार ने कहा, ‘‘इस अवैध सॉफ्टवेयर के पांच अहम संचालक पश्चिम बंगाल (West Bengal) से गिरफ्तार किये हैं. अब इस सॉफ्टवेयर (Software) को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है.’’

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नई दिल्ली. रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) के दौरान कंफर्म्ड ट्रेन आरक्षण टिकट (Confirmed Train Reservation Ticket) हथियाने के लिए अवैध सॉफ्टवेयर ‘रीयल मैंगो’ (real mango) का इस्तेमाल किये जाने का पता लगाया और पश्चिम बंगाल, असम, बिहार एवं गुजरात से 50 गिरफ्तारियां की. आरपीएफ के महानिदेशक (Director General of RPF) अरूण कुमार ने मंगलवार को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस अवैध सॉफ्टवेयर (Invalid software) के कामकाज को खंगालने से सामने आया कि स्वचालित ढंग से टिकट बुक करने के लिए यह (सॉफ्टवेयर) कैप्चा की अनदेखी करता है और मोबाइल ऐप (Mobile App) की मदद से बैंक ओटीपी का समेकन कर उसे जरूरी प्रपत्र (फार्म) में डाल देता है. यह फार्म में अपने आप ही यात्री एवं उसके भुगतान का विवरण भी डाल देता है.

उन्होंने प्रेस ब्रीफिंग में कहा, ‘‘यह सॉफ्टवेयर विभिन्न आईआरसीटीसी आईडी (IRCTC Id) के जरिए आईआरसीटीसी वेबसाइट में लॉगइन (login) करता है. अवैध सॉफ्टवेयर पांच स्तरीय ढांचे में बेचा जाता है और सिस्टम एडमिन को बिटक्वाइन (Bitcoin) में भुगतान होता है.’’ कुमार ने कहा कि आरपीएफ की क्षेत्रीय इकाइयां सिस्टम डेवलपर (system developer) और अहम प्रबंधकों समेत अबतक 50 लोगों को गिरफ्तार करने में तथा पांच लाख रूपये से अधिक मूल्य के टिकटों (ticket) को रोकने में कामयाब रही हैं. सिस्टम डेवलपर इस गिरोह का सरगना है और प्रबंधक इस सॉफ्टवेयर (software) के संचालन में शामिल थे.

अवैध सॉफ्टपवेयर के पांच अहम संचालक पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किये हैं
उन्होंने कहा, ‘‘इस अवैध सॉफ्टवेयर के पांच अहम संचालक पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किये हैं. अब इस सॉफ्टवेयर को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है.’’
इस गोरखधंधे पर तब नजर गयी जब पता चला कि इस सॉफ्टवेयर का डेवलपर अपने उत्पाद के प्रचार के लिए यूट्यूब इस्तेमाल करता है. फिर इस लोकप्रिय वीडियो साझा मंच के आंकड़े के विश्लेषण से गिरोह के अहम सदस्यों का पता चला.



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कुमार ने बताया कि यात्री सेवाएं बहाल होने के बाद दलाली गतिविधि बढ़ने की आशंका से दलालों के खिलाफ बल ने अभियान तेज किया. उन्होंने कहा, ‘‘रेयर मैंगो (जिसका नाम बाद में बदलकर रीयल मैंगो कर दिया गया) के संचालन का पता आरपीएफ की क्षेत्रीय इकाइयों द्वारा दलालों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान नौ अगस्त को चला.’’
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