करोड़ों की क्राउडफंडिग की रकम से मिली 3 साल के बच्चे को दवा, अब नतीजे दिखने का इंतजार

अयांश अपनी मां रूपल और पिता योगेश के साथ (Photo-Twitter/ @FightsSma)

अयांश के पिता कहते हैं कि दवा का असर दिखने में एक महीने का समय लग जाएगा. परिवार और डॉक्टर्स अब इसके साइट इफेक्ट को लेकर चिंतित हैं और उनका ध्यान अब अयांश के पूरी तरह से ठीक हो जाने पर है जिसमें कि अभी एक साल तक का समय लग सकता है.

  • Share this:
    नई दिल्ली. दुनिया की सबसे महंगी दवा मानी जाने वाली ज़ोलगेन्स्मा (Zolgensma) के सिंगल डोज वाला इंजेक्शन लेने के कुछ घंटों बाद, तीन साल के अयांश ने अपने माता-पिता से कहा कि वह चलकर घर आना चाहेगा. अयांश के माता-पिता रूपल और योगेश गुप्ता के लिए यह उनके जीवन का सबसे यादगार दिन था. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक दरअसल अयांश एक ऐसी बीमारी से पीड़ित है जो कि बेहद दुलर्भ है और बहुत जानलेवा साबित हो सकती है.

    रूपल ने 9 जून की घटना को याद करते हुए कहती हैं कि, "हर मां अपने बच्चे को दौड़ता और चलते हुए देखना चाहती है. मुझे वो कभी देखने को नहीं मिला." 4 जून 2018 को अयांश के जन्मदिन के कुछ दिन बाद ही वह दुर्लभ जेनेटिक बीमारी स्पाइनल मस्क्युलर एट्रोफी से पीड़ित पाया गया था. जो कि जानलेवा साबित हो सकती है. जहां एक ओर देश में इस बीमारी का इलाज उपलब्ध नहीं है बल्कि केंद्र द्वारा कई करोड़ की इंपोर्ट ड्यूटी और जीएसटी घटाने के बाद इसकी दवाई की कीमत भी 16 करोड़ है.

    ये भी पढ़ें- जानिए विवादों में घिरी जमीन का इतिहास, क्यों राम जन्मभूमि ट्रस्ट को है ये पसंद?

    एक महीने में दिखना शुरू होगा दवाई का असर
    अयांश जानता था कि दवाई की खुराक दिए जाने के बाद वह जल्द ही अन्य बच्चों की तरह हो जाएगा. अयांश के पिता कहते हैं कि दवा का असर दिखने में एक महीने का समय लग जाएगा. परिवार और डॉक्टर्स अब इसके साइट इफेक्ट को लेकर चिंतित हैं और उनका ध्यान अब अयांश के पूरी तरह से ठीक हो जाने पर है जिसमें कि अभी एक साल तक का समय लग सकता है.

    दुनिया की सबसे महंगी दवा देने के लिए अयांश के माता-पिता ने क्राउडफंडिग के जरिए रकम जुटाई. जिसके लिए करीब 65,000 लोगों ने दान दिया. गुप्ता दंपति ने यह क्राउडफंडिंग 5 फरवरी 2021 को इम्पैक्टगुरु. कॉम के जरिए पैसा जुटाना शुरू किया था. जब इस कैंपेन की शुरुआत की गई थी तो रूपल और योगेश ने भी नहीं सोचा था कि वह इतने कम समय में इतनी बड़ी रकम जुटा पाएंगे. अमेरिका में रहने वाले योगेश के भाई ने भी गोफंड मी के जरिए एक अलग कैंपेन की शुरुआत की जिसके बाद इस अभियान को गति मिली.

    ये भी पढ़ें- राहत: मुंबई के धारावी में लगातार दूसरे दिन कोरोना का एक भी केस नहीं

    कोविड की दूसरी लहर आने के बाद योगेश इस कैंपेन को लेकर थोड़े निराश हो गए क्योंकि उस समय अधिकतर लोग कोविड से प्रभावित लोगों की मदद में लगे थे ऐसे में उन्हें लगने लगा कि उनके बच्चे के बारे में कौन सोचेगा. हालांकि उनके शुभचिंतक उनके साथ बने रहे और उनकी मदद करते रहे. योगेश बताते हैं कि कोरोना के दौरान उन्होंने अयांश का विशेष ख्याल रखा ताकि उसे इंफेक्शन से बचाया जा सके. इतना ही नहीं वह घर में भी मास्क पहनकर ही रहते थे.

    इस साल 27 मई को ही 3 साल के हुए अयांस के पेरेंट्स अब उन्हें बिल्कुल स्वस्थ और बाकी बच्चों की तरह अपने पैरों पर चलते फिरते देखना चाहते हैं.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.