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OPINION: संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा - हमारा 'हिंदू राष्‍ट्र' नेपोलियन की डिस्‍टोपियन सोसायटी जैसा नहीं

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने विजयादशमी कार्यक्रम में दिए भाषण में भीड़ हिंसा पर चिंतित होने के साथ ही आलोचना भी की थी.
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने विजयादशमी कार्यक्रम में दिए भाषण में भीड़ हिंसा पर चिंतित होने के साथ ही आलोचना भी की थी.

सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) आरएसएस (RSS) की वैश्विक स्‍वीकार्यता बढ़ाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं. विजयदशमी पर नागपुर में हुए कार्यक्रम में उन्‍होंने मॉब लिंचिंग (Mob Lynching) की घटनाओं में संघ कार्यकर्ताओं के शामिल होने के दावों को खारिज किया. उन्‍होंने कहा कि भीड़ हिंसा गैर-हिंदू अवधारणा (Non-Hindu Concept) है. इसलिए इसमें संघ से जुड़े लोग शामिल नहीं हो सकते. वह यह भी साबित करना चाहते हैं कि उनका संगठन बहुलतावादी (Pluralistic) और सहिष्‍णु (Tolerant) है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 10, 2019, 2:20 PM IST
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भावदीप कंग

नई दिल्‍ली. राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने नागपुर में विजयदशमी कार्यक्रम के दौरान भीड़ की हिंसा (Mob Lyniching) का जिक्र करते हुए संगठन के कार्यकर्ताओं को ऐसे लोगों से दूर रहने को कहा था. उन्‍होंने कहा कि संघ देश के संविधान (Constitution) और बहु-संस्‍कृतिवाद (Multiculturalism) का सम्‍मान करते हुए समाजिक सद्भाव (Social Harmony) के लिए काम करता है. उन्‍होंने स्‍पष्‍ट तौर पर कहा कि संघ का अल्‍पसंख्‍यक विरोधी (Anti-Minority) घटनाओं में शामिल समूहों से कोई लेनादेना नहीं है. पिछले कुछ समय में अल्‍पसंख्‍यक समुदाय (Minority Community) के लोगों पर हुए जानलेवा हमलों के वीडिया वायरल (Viral Video) हुए. सोशल मीडिया (Social Media) पर लोगों ने इन घटनाओं के लिए कट्टर दक्षिणपंथी (Extreme Rightist) संगठनों को जिम्‍मेदार ठहराया. ऐसी घटनाओं पर बीजेपी से जुड़े लोगों ने भी ऐतराज जताया.

मॉब लिंचिंग पर जताई चिंता, पर 'लिंचिंग' शब्‍द से किया परहेज
भागवत ने विजयादशमी कार्यक्रम में दिए भाषण में भीड़ हिंसा पर चिंतित होने के साथ ही आलोचना भी की. कहा जा रहा है कि संघ प्रमुख मॉब लिंचिंग में शामिल लोगों पर कानूनी कार्रवाई (Legal Action) से ज्‍यादा आरएसएस (RSS) को ऐसी घटनाओं से अलग दिखाने को लेकर चिंतित हैं. यहां तक कि उन्‍होंने अपने भाषण में 'लिंचिंग' शब्‍द का इस्‍तेमाल करने से भी परहेज किया. भागवत ने कहा कि भीड़ हिंसा गैर-हिंदू अवधारणा (Non-Hindu Concept) है. इसलिए ऐसी घटनाओं में संघ कार्यकर्ता शामिल नहीं हो सकते. साथ ही उन्‍होंने जोर दिया कि हिंसा सिर्फ एक पक्ष ने ही नहीं की है. दोनों ओर से हिंसा की घटनाएं हुई हैं. कुछ फर्जी मामलों (Fake Incidents) को भी तूल दिया गया.
देश की विविधता को मतभेदों में बदलने वालों को दी चेतावनी


सरसंघचालक ने अपने राजनीतिक हित (Vested Interests) साधने के लिए देश की विविधता (Diversity) को मतभेदों (Differences) में तब्‍दील करने की कोशिश करने वालों को चेतावनी भी दी. विजयादशमी पर भागवत के भाषण को संगठन की वैश्विक स्‍तर पर पहुंच और स्‍वीकार्यता बढ़ाने की कवायद के तौर पर देखा जाना चाहिए. अंतरराष्‍ट्रीय मीडिया ने मॉब लिंचिंग की घटनाओं को काफी तूल दिया, जिससे नरेंद्र मोदी सरकार की छवि पर बुरा असर पड़ा था. अंतरराष्‍ट्रीय मीडिया ने ये भी कहा कि बीजेपी सरकार संघ की विचारधारा पर चलती है. संघ प्रमुख यह साबित करना चाहते हैं कि उनका संगठन बहुलतावादी (Pluralistic) और सहिष्‍णु (Tolerant) है. वह संघ को लेकर बने नजरिये को बदलना चाहते हैं.

संविधान, विविधता, सौहार्द्र पर जोर दे रहे हैं सरसंघचालक
संघ प्रमुख ने पिछले साल विज्ञान भवन में दिए व्‍याख्‍यान (Lecture) में भी 'संविधान', 'विविधता', 'सौहार्द्र' और 'सहाकारिता' जैसे शब्‍दों पर जोर दिया था. तब उन्‍होंने 'गुरुजी' गोलवलकर के कट्टर विचारों से आज के संघ को अलग दिखाने की कोशिश की थी. एमएस गोलवलकर की किताब 'बंच ऑफ थॉट्स' (Bunch of Thoughts) के कुछ पन्‍नों में भौगालिक, नस्‍लीय, धार्मिक, सांस्‍कृतिक और भाषायी सांस्‍कृतिक राष्‍ट्रवाद की बात की गई है. इनमें अल्‍पसंख्‍यक समुदाय और वामपंथी धड़ों को आंतरिक शत्रुओं (Internal Enemies) के रूप में कलंकित किया गया था.

गांधी जयंती की पूर्व संध्‍या पर कहा, संघ किसी 'वाद' में विश्‍वास नहीं रखता
गांधी जयंती की पूर्व संध्‍या पर भागवत ने इतिहासकार रामचंद्र गुहा (Ramchandra Guha) के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें वह कहते थे कि 'बंच ऑफ थॉट्स' संघ का बाइबल है. भागवत ने कहा कि संघ की विचारधारा को किसी एक किताब के आधार पर नहीं तौला जा सकता और न ही संगठन किसी 'वाद' (Ism) में विश्‍वास करता है. उन्‍होंने जोर दिया कि संघ सामाजिक-आर्थिक मामलों के प्रति संवेदनशील और लगातार बेहतरी की ओर बढ़ने वाला संगठन है. वहीं, पिछले महीने भागवत ने अंतरराष्‍ट्रीय मीडिया से भी मुलाकात की. इस दौरान उन्‍होंने अपनी बात ही नहीं रखी, बल्कि संघ को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब भी दिए. इस दौरान उन्‍होंने अल्‍पसंख्‍यकों के खिलाफ भीड़ हिंसा की निंदा भी की.

राममंदिर निर्माण के लिए संसद में विधेयक लाने की मांग की थी
संघ प्रमुख भागवत के पिछले कई भाषणों में 'न्‍यायिक व्‍यवस्‍था पर विश्‍वास' और 'कानून' का अक्सर जिक्र आया है. पिछले साल अपने एक भाषण में भागवत ने राममंदिर निर्माण के लिए संसद में विधेयक (Bill) लाने की मांग की थी. इससे साफ हुआ कि आरएसएस अपने लक्ष्‍यों को हासिल करने के लिए कानून के बाहर का कोई रास्‍ता नहीं अपनाएगा. साथ ही यह भी स्‍पष्‍ट हुआ कि संघ बीजेपी को इसके लिए विधायी रास्‍ते अपनाने पर जोर देने से भी पीछे नहीं ह‍टेगा. इस साल उन्‍होंने समान नागरिक संहिता (UCC) की चर्चा छेड़ते हुए कहा कि इस पर मतविभाजन किया जाना चाहिए.

मोदी सरकार के आलोचकों को जवाब देने पर है भागवत का ध्‍यान
भागवत काफी समय से लगातार संविधान और कानून के सम्‍मान पर जोर दे रहे हैं. उनका पूरा ध्‍यान नरेंद्र मोदी सरकार के आलोचकों को जवाब देने पर है. संघ इस बात से संतुष्‍ट है कि पहली बार उनकी इच्‍छाओं को पूरा करने के लिए कोई सरकार ठोस कदम उठा रही है. साथ ही संघ यह भी स्‍पष्‍ट करना चाहता है कि उसका 'हिंदू राष्‍ट्र' नेपोलियन की काल्‍पनिक 'डिस्‍टोपियन सोसायटी' से अलग है, जिसमें अमानवीयता और बबर्रता का शासन होता. संघ का हिंदू राष्‍ट्र दक्षिण पंथी आर्यवर्त शासन से बहुत अलग है. उनके हिंदू राष्‍ट्र के सिद्धांत में बहुलता (Plurality), मानवाधिकार और नागरिक स्‍वतंत्रता का पूरा शामिल है.

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