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कोरोना, चीन और CAA विरोधी प्रदर्शन- दशहरे पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कही ये 10 खास बातें

कोरोना, चीन और CAA विरोधी प्रदर्शन- दशहरे पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कही ये 10 खास बातें

पुस्तक में सरसंघचालक मोहन भागवत के अलग-अलग अवसरों पर दिए गए 17 भाषणों का संकलन है.  (फाइल फोटो)

पुस्तक में सरसंघचालक मोहन भागवत के अलग-अलग अवसरों पर दिए गए 17 भाषणों का संकलन है. (फाइल फोटो)

Mohan bhagwat shashtra pooja on dussehera: दशहरे के मौके पर संघ प्रमुख मोहन भागवत (RSS Chief Mohan Bhagwat) ने देश को संबोधित किया. अपने संबोधन में भागवत ने चीन मामले पर पीएम मोदी की पीठ ठोकी साथ ही चीन के रवैये से आगाह भी कराया.

    नई दिल्ली. दशहरे (Dussehra) के खास मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के हेडक्वॉर्टर नागपुर (Nagpur) में शस्त्र पूजा (RSS Dussehra Shastra Puja) की गई. शस्त्र पूजन के बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत (RSS Chief Mohan Bhagwat) ने देश को संबोधित किया. अपने संबोधन में भागवत ने चीन मामले पर पीएम मोदी की पीठ ठोकी.  साथ ही चीन के रवैये से आगाह भी कराया.

    मोहन भागवत ने कहा कि कोरोना महामारी के संदर्भ में चीन की भूमिका संदिग्ध रही, यह तो कहा ही जा सकता है. परंतु अपने आर्थिक सामरिक बल के कारण मदांध होकर उसने भारत की सीमाओं पर जिस प्रकार से अतिक्रमण का प्रयास किया वह सम्पूर्ण विश्व के सामने स्पष्ट है.



    आइए जानते हैं मोहन भागवत के संबोधन की 10 खास बातें...

    चीन पर निशाना साधते हुए मोहन भागवत ने कहा कि हम शांत रहते हैं इसका मतलब यह नहीं कि हम कमजोर हैं. इस बात को एहसास तो अब चीन को भी हो गया होगा. लेकिन ऐसा नहीं है कि इसके बाद हम लापरवाह हो जाएं. ऐसे खतरों पर में नजर बनाए रखनी होगी. भागवत ने सेना की वीरता पर कहा कि हमारी सेना की अटूट देशभक्ति और अदम्य वीरता, हमारे शासनकर्ताओं का स्वाभिमानी रवैया और हम सब भारत के लोगों के दुर्दम्य नीति-धैर्य का परिचय चीन को पहली बार मिला है.
    भागवत कहा कि हम सभी से मित्रता चाहते हैं, यह हमारा स्वभाव है. परन्तु हमारी सद्भावना को कमजोर मानकर अपने बल के प्रदर्शन से कोई भारत को चाहे जैसा नचा ले, झुका ले, यह हो नहीं सकता है. इतना तो अब समझ में आ जाना ही चाहिए.
    अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया के अन्य देशों की तुलना में हमारा भारत कोरोना संकट की इस परिस्थिति में अधिक अच्छे प्रकार से खड़ा हुआ नजर आ रहा है. भारत में इस महामारी की विनाशकता का प्रभाव बाकी देशों से कम दिखाई दे रहा है. इस महामारी के संदर्भ में चीन की भूमिका संदिग्ध रही है, परंतु भारत की सीमाओं पर जिस प्रकार से अतिक्रमण का प्रयास अपने आर्थिक सामरिक बल के कारण मदांध होकर उसने किया वह तो सम्पूर्ण विश्व के सामने स्पष्ट है.
    नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का उल्लेख करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि कुछ पड़ोसी देशों से सांप्रादायिक कारणों से प्रताड़ित होकर विस्थापित किए गये हमारे लोग, जो भारत में आएंगे उनको मानवता के हित में तुरंत नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान रखा गया. भारत के इस नागरिकता संशोधन अधिनियम कानून में किसी संप्रदाय विशेष का विरोध करने का काम नहीं किया गया है.
    उन्होंने कहा कि सीएए को आधार बनाकर समाज में विद्वेष व हिंसा फैलाने का षडयंत्र जारी है. इस कानून को संसद से पूरी प्रक्रिया से पास करने का काम किया गया है. इस षडयंत्र में शामिल लोग मुसलमान भाइयों के मन में यह बैठाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे अब भारत में नहीं रह पाएंगे जो सरासर गलत है.
    मोहन भागवत ने कहा कि आगे बढ़ने के लिए स्वदेश की नीति आवश्यक है और वोकल फॉर लोकल स्वदेशी की नीति से भरा हुआ है. इसके जरिए हम अपनी स्वदेशी की भावना को आगे बढ़ा सकते हैं और इसे पूरा कर सकते हैं.
    कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि 2019 में, अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी हो गया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को अयोध्या का फैसला दिया. पूरे देश ने फैसले को स्वीकार कर लिया. 5 अगस्त 2020 को राम मंदिर की आधरशिला समारोह आयोजित की गई थी. हमने इन घटनाओं के दौरान भारतीयों के धैर्य और संवेदनशीलता को देखा.
    मोहन भागवत ने कहा कि श्रीलंका, बांग्लादेश, ब्रह्मदेश, नेपाल ऐसे हमारे पड़ोसी देश, जो हमारे मित्र भी हैं और बहुत मात्रा में समान प्रकृति के देश हैं, उनके साथ हमें अपने सम्बन्धों को अधिक मित्रतापूर्ण बनाने में अपनी गति तीव्र करनी चाहिए.
    भागवत ने कहा कि आज पूरे देश में राष्ट्रवाद की हवा चल रही है. देश की सुरक्षा की दृष्टि से अंदर की सुरक्षा भी जरूरी है. हमारा देश लोकतंत्र है कई राजनीतिक दल है. सबके विचार में विरोध है. सत्ता पाने के लिए एक दूसरे पर आरोप लगाते है.
    उन्होंने कहा कि चुनाव आपस में युद्ध नही हैं. वहीं, अपनों के विरोध को लेकर दूसरे देश हमारे देश के खिलाफ चाल नहीं चल पाए ऐसा होना चाहिए.

    Tags: Mohan bhagwat, RSS

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