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महिलाएं आज भी घरों में कैद, प्रतिबंधों से नहीं मिली उन्हें आजादी: विजयदशमी संबोधन में बोले भागवत

RSS चीफ मोहन भागवत ने कहा- शक्ति हर बात का आधार. (ANI)

RSS चीफ मोहन भागवत ने कहा- शक्ति हर बात का आधार. (ANI)

विजयदशमी पर आज आरएसएस ने नागपुर रेशम बाग में रैली का आयोजन किया. आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत विजयदशमी पर रैली को संबोधित क ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

विजयदशमी पर आज आरएसएस ने नागपुर रेशम बाग में रैली का आयोजन किया.
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत विजयादशमी पर रैली को संबोधित किया.
आज सुबह आरएसएस ने शहर में अपने पथसंचलन (रूट-मार्च) का आयोजन किया था.

नागपुर. आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने विजयदशमी पर रैली में कहा कि शक्ति हर बात का आधार है. शक्ति शांति और शुभ का भी आधार है. शुभ काम को करने के लिए भी शक्ति की जरूरत होती है. विजयदशमी पर आज आरएसएस ने नागपुर रेशम बाग में रैली का आयोजन किया. आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत विजयादशमी पर रैली को संबोधित किया. मोहन भागवत ने कहा कि मातृ शक्ति की उपेक्षा संभव नहीं है. महिलाओं को हम जगत जननी मानते हैं लेकिन उनको पूजा घर या घरों में बंद कर दिया गया है. विदेशी हमलों के कारण इसे एक वैधता मिली थी. मगर विदेशी हमलों के खत्म होने के बाद भी उनको प्रतिबंधों से आजादी नहीं मिली है. जो काम पुरुष कर सकते हैं, उससे ज्यादा काम महिलाएं कर सकती हैं. मातृ शक्ति के जागरण का काम अपने परिवार से करके समाज में ले जाना है.

मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया में भारत की बात सुनी जा रही ही है, हमारा वजन बढ़ रहा है. श्रीलंका के संकट में हमने बहुत मदद की. यूक्रेन पर हो रही रूस और अमेरिका के बीच की जंग में हमारी बड़ी भूमिका हो सकती है. इससे हमें गर्व होता है. खेलों में भी नीतियों में अच्छा सुधार हुआ है. हमारे खिलाड़ी ओलंपिक और पैरालंपिक में मेडल जीत रहे हैं. कोरोना के बाद देश की अर्थव्यवस्था भी सुधर रही है. मोहन भागवत ने कहा कि नीतियों में स्पष्टता होनी चाहिए. परिस्थितियों के हिसाब से लचीलापर जरूरी होती है. इसके साथ ही मर्यादा का पालन भी करना होता है. साथ ही लोगों को भरोसे में रखना होता है.

बदलाव के साथ परंपरा जरूरी
मोहन भागवत ने कहा कि हमें 2 बाधाओं से सावधान रहना है. पहली बाधा तो हम खुद हैं. समय के साथ ज्ञान और समझ में बदलाव होता है. नित्य नूतन के साथ चिर पुरातन या सनातन का साथ जरूरी है. अन्यथा जीवन कटी पतंग हो जाता है. लेकिन नूतनता भटका न दे, इसके लिए सनातन संस्कृति के मूल्यों पर कायम रहना भी जरूरी है. दूसरी बाधा बाहर से आती है जो भारत की प्रगति को नहीं होने देना चाहते हैं. जिनके स्वार्थों को नुकसान होगा, वे बाधा डालते हैं. उनकी शक्तियां गलत विमर्श पैदा करती हैं. वे हमारे देश में कलह, अराजकता, आतंकवाद को बढ़ाते हैं. देश में नियम कानून का सम्मान न रहे, अनुशासन न रहे ऐसे कामों को बढ़ाते हैं. ऐसे लोग कभी-कभी घुसपैठ के लिए नजदीकी भी बढ़ाते हैं. भेदभाव को बढ़ाते हुए दुष्टता कपट करती है, इसलिए सावधान रहने की जरूरत है.

करियर के लिए अंग्रेजी जरूरी नहीं
मोहन भागवत ने कहा कि मातृभाषा को बढ़ने से रोकने के लिए ये मिथक फैलाया जाता है कि करियर के लिए अंग्रेजी जरूरी है. जबकि ये पूरी तरह गलत है. नई शिक्षा नीति की बात हो रही है लेकिन हम अपने बच्चों को क्या मातृ भाषा में शिक्षा के लिए भेजते हैं. अगर ऐसा नहीं किया गया तो मातृभाषा कैसे सशक्त होगी. RSS प्रमुख ने कहा कि रोजगार का मतलब केवल नौकरी और वह भी सरकारी नौकरी के पीछे अगर सब लोग दौड़ेंगे तो नौकरी कितनी दे सकते हैं? किसी भी समाज में सरकारी और प्राइवेट मिलाकर केवल 10, 20, 30 प्रतिशत नौकरी होती है. बाकी सब को अपना काम करना पड़ता है. इसके लिए उद्यम जरूरी है. भागवत ने कहा कि समाज नौकरी के पीछे नहीं भागे, उद्यमिता की ओर बढ़े.

विषमता का हर रूप दूर हो
मोहन भागवत ने कहा कि विषमता का हर रूप दूर हो. सामाजिक आर्थिक विषमता के हर रूप को दूर करना समाज की जिम्मेदारी है. मंदिर, पानी श्मशान घाट सबसे लिए एक हो. समाज को अपने दायित्व से नहीं हटना है. समाज से लोग डरते हैं. मोहन भागवत ने कहा कि जाति के आधार पर भेदभाव अधर्म है. छुआछूत अधर्म है. भले ही वह पहले चलता आ रहा था.

बने जनसंख्या नीति
मोहन भागवत ने कहा कि जनसंख्या बोझ भी है और जनसंख्या उपयोग एक साधन भी हो सकता है. 57 करोड़ युवाओं की संख्या किसी देश में नहीं है. चीन आज बूढ़ा हो गया है. एक संतान की नीति कड़े प्रयास से लागू करने का नतीजा दिख रहा है. 50 साल बाद देश के कितने युवा काम करने के लिए होंगे. पर्यावरण की क्या हालत होगी. देश के संसाधन कितने लोगों को खिला सकेंगे. समग्र विचार से एक नीति बनाने की जरूरत है. परिवार में बच्चों के संस्कार के लिए लोग चाहिए. अगर जनसंख्या कम हुई तो समाज और भाषाएं तक गायब हो जाती हैं. जनसंख्या में संतुलन भी होना चाहिए. इसका नतीजा देश 50 साल पहले भुगत चुका है. जनसंख्या में धार्मिक असंतुलन से कई देश बन गए. इसलिए एक जनसंख्या नीति बननी चाहिए.

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मोहन भागवत ने कहा कि हिंसा की घटनाओं की हर समाज निंदा करे. मुस्लिम समाज के लोगों ने इस बार कुछ हिंसक घटनाओं की निंदा की है. हिंदू समाज में पहले से ही ये भाव रहा है. कानून का हर किसी को पालन करना होगा. अलगाव का विचार गलत है. हमको एक रहना है. इससे पहले आज सुबह आरएसएस ने शहर में अपने पथसंचलन (रूट-मार्च) का आयोजन किया था. दशहरा पर संघ प्रमुख के स्वयंसेवकों को संबोधित करने के कार्यक्रम के मद्देनजर नागपुर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई. नागपुर के रेशमबाग में वार्षिक विजयदशमी कार्यक्रम में पर्वतारोही पद्मश्री संतोष यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं. आरएसएस के इतिहास में पहली बार किसी महिला को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया.

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