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आरएसएस के इस संगठन की देन है कश्मीर में विधानसभा परिसीमन का मुद्दा

नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: June 27, 2019, 12:17 PM IST
आरएसएस के इस संगठन की देन है कश्मीर में विधानसभा परिसीमन का मुद्दा
फाइल फोटो- कश्मीर में स्थानीय लोगों के साथ बैठक करते मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के पदाधिकारी.

जम्मू-कश्मीर की उन 24 विधानसभा सीटों पर भी चुनाव कराने और परिसीमन कराने की मांग करते हुए देशभर में एक मुहिम चलाई गई थी. राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे गए थे. ये सीटें जो पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के लिए खाली छोड़ी गई हैं.

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  • Last Updated: June 27, 2019, 12:17 PM IST
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जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सीटों के परिसीमन का मुद्दा ज़ोर पकड़ता जा रहा है. लेकिन खास बात ये है कि न तो यह मुद्दा पहली बार उठा है और न ही यह मांग नई है. अगर थोड़ा पीछे निगाह डालें तो 2015 में आरएसएस के संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने इस मुद्दे को दमदारी तरीके से उठाया था. जम्मू-कश्मीर की उन 24 विधानसभा सीटों पर भी चुनाव कराने और परिसीमन कराने की मांग करते हुए देश भर में एक मुहिम चलाई गई थी जो पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के लिए खाली छोड़ी गई हैं. राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे गए थे. हाल ही में बीजेपी भी इस मुद्दे को उठा चुकी है. और अमित शाह के कश्मीर दौरे को देखते हुए इसकी चर्चाएं एक बार फिर से तेज हो गई हैं.

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने ऐसे चलाया था आंदोलन
इस संबंध में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक इस्लाम अब्बास बताते हैं, “विधानसभा सीटों के परिसीमन के लिए 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की तर्ज पर ही एक आंदोलन चलाया गया था. जम्मू-कश्मीर के लिए अलग से कुछ नीतियां होने के विरोध में जवाहरलाल नेहरू और मोहम्मद अली जिन्ना के पुतले भी फूंके गए थे. पाक अधिकृत कश्मीर वाली 24 सीटों पर भी चुनाव कराने या फिर मनोनयन की मांग की गई थी. मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के कार्यकर्ताओं ने इसके लिए जगह-जगह प्रदर्शन किया था. हम आज भी अपनी उसी मांग को दोहरा रहे हैं.”

24 साल पहले हुआ था परिसीमन

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार 1995 में परिसीमन किया गया था. गवर्नर जगमोहन के आदेश पर 87 सीटों का गठन किया गया था. जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 111 सीटें हैं, लेकिन 24 सीटों को खाली रखा गया है. जम्मू-कश्मीर के संविधान के सेक्शन 47 के मुताबिक इन 24 सीटों को पाक अधिकृत कश्मीर के लिए खाली छोड़ गया है और बाकी बची 87 सीटों पर ही चुनाव होता है.

हर 10 साल बाद होना चाहिए परिसीमन
राज्य के संविधान के मुताबिक हर 10 साल बाद निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किया जाना चाहिए. इस तरह से जम्मू-कश्मीर में सीटों का परिसीमन 2005 में किया जाना था, लेकिन 2002 में इस पर 2026 तक के लिए रोक लगा दी गई थी. जम्मू-कश्मीर जनप्रतिनिधित्व कानून, 1957 और जम्मू-कश्मीर के संविधान में बदलाव करते हुए यह फैसला किया गया था.एससी-एसटी आरक्षण के लिए उठ रही है परिसीमन की मांग
सूत्रों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में इसलिए परिसीमन पर ज़ोर दिया जा रहा है कि एससी और एसटी समुदाय के लिए विधानसभा सीटों के आरक्षण की नई व्यवस्था लागू की जा सके. इस वक्त घाटी की किसी भी सीट पर आरक्षण नहीं है, लेकिन यहां 11 फीसदी गुर्जर बकरवाल और गद्दी जनजाति समुदाय के लोगों की आबादी है.

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First published: June 27, 2019, 11:46 AM IST
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