कश्मीर में मजबूत होने के लिए RSS ने लॉन्च किया नया मिशन, मंदिरों पर फोकस

आरएसएस ने जम्मू-कश्मीर के जर्जर हालत में पहुंच चुके मंदिरों का जीर्णोद्धार करने की योजना बनाई है. आरएसएस इस हिमालयी इलाके में खुद को मजबूत करना चाहता है.

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Updated: July 8, 2019, 6:51 PM IST
कश्मीर में मजबूत होने के लिए RSS ने लॉन्च किया नया मिशन, मंदिरों पर फोकस
आरएसएस ने जम्मू-कश्मीर के जर्जर हालत में पहुंच चुके मंदिरों का जीर्णोद्धार करने की योजना बनाई है (फाइल फोटो)
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Updated: July 8, 2019, 6:51 PM IST
जम्मू-कश्मीर में खुद को मजबूत करने के लिए आरएसएस ने वीरान पड़े जर्जर मंदिरों का निर्माण करने का प्लान बनाया है. घाटी में संघ का अपने इस प्लान के जरिए खुद के विस्तार का प्लान है. आरएसएस ने यह भी साफ कर दिया है कि वह बीजेपी के जम्मू-कश्मीर के विधानसभा क्षेत्रों के पुर्नसीमन का समर्थन करता है. आरएसएस का मानना है कि कश्मीर की विधानसभा सीटों के नए परिसीमन से जम्मू क्षेत्र को फायदा होगा.

जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर नई दिल्ली में RSS के शीर्ष अधिकारियों ने कहा कि आतंकवाद से प्रभावित कश्मीर घाटी में कई ऐतिहासिक मंदिर वीरान पड़े हैं. और अब हिंदू श्रद्धालुओं के लिए इनका जीर्णोद्धार और पुनरुद्धार किया जाएगा. ऐसे ही एक ऐतिहासिक खीर भवानी देवी के मंदिर में पिछले महीने वार्षिक त्योहार के मौके पर कश्मीरी पंडितों की भारी भीड़ इकट्ठा हुई थी. इस अवसर पर राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने श्रीनगर से 25 किमी की दूरी पर स्थित इस मंदिर में कश्मीरी पंडितों के रुकने के विशेष इंतजाम करवाए थे.

जम्मू और कश्मीर में संस्कृत केंद्र एक प्राचीन मंदिर से की गई है शुरुआत
आरएसएस प्रचारक न सिर्फ कश्मीर बल्कि जम्मू में भी वीरान पड़े मंदिरों को ठीक हालत में लाएंगे. आरएसएस ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट, 2019 में भी जम्मू-कश्मीर में जर्जर हालत में मौजूद इन मंदिरों का मुद्दा उठाया था. इसमें बताया गया था कि जम्मू से 40 किमी दूर देविका नदी के किनारे एक प्राचीन मंदिर है.

रिपोर्ट के अनुसार यह मंदिर कभी संस्कृत भाषा का अध्ययन केंद्र रहा था. लेकिन पिछले कुछ वक्त से इसकी उपेक्षा हो रही थी. इसके पुनरुद्धार के लिए आरएसएस ने एक ट्रस्ट बना दिया है. राज्य से दूर-दराज के इलाकों और श्रीनगर के सीमावर्ती इलाकों में अल्पसंख्यकों को मुख्यधारा में लाने के लिए एक व्यापक योजना 'एकल विद्यालय' की शुरुआत भी की गई है.

लद्दाख और कारगिल जैसे क्षेत्रों में भी चलाई जाएगी ये योजना
इसमें एक स्कूल में एक कक्षा चलाई जाती है. जम्मू-कश्मीर के जिन गांवों में अभी शिक्षा नहीं पहुंची है. उन्हें इस विद्यालय में शामिल किया जाना है. इसमें 6000 शिक्षकों को जोड़ा गया है और इसके तहत लद्दाख और कारगिल जैसे क्षेत्रों में काम किया जा रहा है.
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First published: July 8, 2019, 6:17 PM IST
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