RSS ने नई शिक्षा नीति का किया स्वागत, कहा- कक्षा 5वीं तक पढ़ाई मातृभाषा मे कराए जाने की वर्षो से थी मांग

RSS ने नई शिक्षा नीति का किया स्वागत, कहा- कक्षा 5वीं तक पढ़ाई मातृभाषा मे कराए जाने की वर्षो से थी मांग
आरएसएस की मांग रही है थी कि वैदिक गणित, दर्शन और प्राचीन भारतीय परंपरा से जुड़े विषयों को शिक्षा में अहमियत दी जाए.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (New national education policy) का कैबिनेट से पास होने पर स्वागत किया है. शिक्षा संस्कृति उत्थान, भारतीय शिक्षा मंडल, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जैसे शिक्षण संगठनों ने केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति के फैसले पर खुशी जताई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 31, 2020, 12:14 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (New national education policy) का कैबिनेट से पास होने पर स्वागत किया है. शिक्षा संस्कृति उत्थान, भारतीय शिक्षा मंडल, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जैसे शिक्षण संगठनों ने केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति के फैसले पर खुशी जताई है.

भारतीय शिक्षण मंडल (Board of education of India) ने कहा है कि संगठन के तकरीबन 60 फीसदी सुझाव को केंद्र सरकार ने मान लिए है. मंत्रालय का नाम मानव संसाधन विकास मंत्रालय से शिक्षा मंत्रालय किया जाना संघ की एक बड़ी उपलब्धि है. संघ के शिक्षण संस्थान वर्षों से मंत्रालय के नाम को बदलने की सिफारिश केंद्र सरकार से करती रही है. भारतीय शिक्षण मंडल का कहना है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय 1985 तक शिक्षा मंत्रालय के रूप में जाना जाता था. जिसके नाम को बदल दिया गया था, दुनिया भर के शिक्षा मंत्रालय भी संसाधन विकास मंत्रालयों के रूप में नहीं जाने जाते हैं. शुरुआत से इस नाम पर संघ को आपत्ति रही है.

शिक्षा में भारतीय भाषा को प्राथमिकता देना है जरूरी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारतीय शिक्षा में भारतीय भाषा को प्राथमिकता देने की शुरुआत से हिमायती रहा है. संघ के इन मांग को मानते हुए केंद्र ने नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए कई प्रावधान किये गए हैं, जिससे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठन खुश हैं. संघ से जुड़े संगठनों ने हर स्तर पर यह मांग उठाई थी कि पांचवीं तक मीडियम ऑफ इंस्ट्रक्शन मातृभाषा में हो, जिसे नई शिक्षा नीति में जगह मिली है. आरएसएस भारतीय शिक्षा में प्राचीन ज्ञान पर जोर देने की हिमायती रहा है, जिसे नई शिक्षा नीति में शामिल कर लिया गया है.
संघ के शिक्षा संघठनों की तरफ से नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के गठन की मांग काफी वर्षों से की जा रही थी, जिसे नई शिक्षा नीति में मान ली गई है. इसे भी संघ बड़ी उपलब्धि के तौर पर देख रहा है.



नई शिक्षा नीति में RSS के कई सुझावों को माना गया
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी का कहना है कि नई शिक्षा नीति में उनके कई सुझावों को माना है. उनका कहना है कि हमें खुशी है कि हमारे सुझाव जैसे कि मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा प्रदान करना, पाठ्यपुस्तकों में नई सामग्री के लिए समिति का गठन करना एक स्वागत योग्य कदम है. अतुल कोठारी का कहना है कि हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने की मांग कि थी कि नई नीति में शिक्षण के ऑनलाइन तरीकों पर भी ध्यान दिया जाए. हमें खुशी है कि इसे नई शिक्षा नीति में शामिल किया गया है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छात्र संगठन, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने भी एनईपी का स्वागत किया, इसे "भारतीय शिक्षा में भारत को शामिल करने" का रोडमैप बताया.

इन विषयों को अहमियत देने की थी मांग
आरएसएस की मांग रही है थी कि वैदिक गणित, दर्शन और प्राचीन भारतीय परंपरा से जुड़े विषयों को शिक्षा में अहमियत दी जाए. संघ की इस मांग को नई शिक्षा नीति शामिल किया गया है. शिक्षा नीति ड्राफ्ट में इस विषय को और तार्किक और वैज्ञानिक आधार पर तैयार करके पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने की बात कही गयी है.

नई शिक्षा नीति में संघ का रहा अहम रोल
नई शिक्षा नीति को लेकर हुए व्यापक परामर्श में एक प्रमुख भूमिका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की रही है.
नई एजुकेशन पॉलिसी का ड्राफ्ट इसरो के पूर्व प्रमुख के कस्तूरीरंगन ने तैयार की है. इन्होंने देशभर की अलग-अलग संस्थाओं से संपर्क साधा है. शिक्षा नीति के ड्राफ्ट में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका अग्रणी रही है. ड्राफ्टिंग कमेटी में आरएसएस से जुड़े कई लोग शामिल रहे हैं. इसके अलावा ड्राफ्टिंग कमिटी ने इसके लिए बकायदा संघ के कार्यकर्ताओं, बीजेपी शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, सरकार के प्रतिनिधि से चर्चा की गई.

शिक्षा में आमूल चूल परिवर्तन और शिक्षा में भारतीयता लाने के लिए संघ वर्षों से प्रयासरत्त रहा है. इसके लिए संघ ने कई कमेटी बनाई और ज़मीनी स्तर से लेकर उच्च स्तर पर इसके लिए बाकायदा कई स्तरों पर चर्चा की. 2014 में नरेंद्र मोदी की केन्द्र में सरकार आने के वक़्त से ही शिक्षा नीति में बदलाव के लिए संघ केंद्र सरकार पर दवाब बना रहा था.

आरएसएस के सर संघचालक मोहन भावगत कई बार इस बात को देश के सामने प्रमुखता से रख चुके हैं कि प्राचीन ज्ञान परंपरा को किनारे रखकर भारत एक राष्ट्र के रूप में सबल नहीं हो सकता है.

शिक्षा नीति में संघ की सभी मांगों को नहीं माना गया
नई शिक्षा नीति पर केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगा है कि सरकार संघ के एजेंडे को ही आगे बढ़ाई है. लेकिन इस शिक्षा नीति में केंद्र ने संघ की सभी सिफारिशों को नहीं माना है. आरएसएस की बड़ी मांगों से सरकार ने फिलहाल किनारा किया है. मिसाल के तौर पर नई शिक्षा नीति तीन-भाषा के फॉर्मूले पर बनी है. जबकि सरकार ने संघ के उस सुझाव को ड्राफ्ट से हटा दिया है जिसमें ये कहा गया था कि छात्रों को छठी कक्षा तक हिंदी को एक भाषा के तौर पर पढ़ना चाहिए. दरअसल राजनीतिक पार्टियों, मुख्य रूप से तमिलनाडु की पार्टियों ने इस प्रावधान का विरोध किया था. वो इसे हिंदी थोपना कह रहे थे.

नई शिक्षा नीति के तहत भारत ने अब विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए अपने दरवाज़े खोल दिए हैं.  दुनिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय अब देश में अपने कैम्पस खोल सकेंगे. आरएसएस से जुड़े शिक्षण संस्थान इस प्रावधान के खिलाफ रहा है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading