संघ करेगा 'भविष्य के भारत' पर संवाद, सभी दलों को भेजा गया न्योता

संघ के सूत्र बताते हैं कि किसी पार्टी से जुड़े व्यक्ति विशेष को न्यौता नहीं दिया है, बल्कि पार्टी प्रमुखों को न्यौता भेज कर अपने प्रतिनिधि भेजने का निवेदन किया गया है. इस कार्यक्रम में भारत में काम कर रहे कम से कम 50-60 राजदूतों को भी न्यौता भेजा गया है.

अमिताभ सिन्हा | News18Hindi
Updated: September 10, 2018, 1:44 PM IST
संघ करेगा 'भविष्य के भारत' पर संवाद, सभी दलों को भेजा गया न्योता
मोहन भागवत, RSS प्रमुख (फाइल फोटो)
अमिताभ सिन्हा
अमिताभ सिन्हा | News18Hindi
Updated: September 10, 2018, 1:44 PM IST
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के लिए सितंबर महीने की 17 से 19 की तारीख काफी अहम है. इन तीन दिनों में ही संघ 'बदलते भारत' में अपनी बदलती तस्वीर को सामने रखेगा. ये एक ऐसा संवाद होगा जिसमें संघ उन तमाम मसलों पर अपनी राय स्पष्ट करेगा, जिनको कट्टरता से जोड़ा जाता रहा है.

संघ को पता है कि सरकार बनने के बाद मॉब लिंचिंग से लेकर गौरक्षा जैसे मुद्दों पर संघ ही निशाने पर रहा है. साथ ही संघ भले ही खुद को मोदी सरकार से इतर एक सांस्कृतिक संस्था बताए, लेकिन जाने-अनजाने ये संदेश ज़रूर जा रहा है कि सरकार के कामकाज में उनका दखल है. इसी भ्रम से दूर करने और अगले 10-15 सालों मे देश में अपनी विचारधारा को जन-जन तक स्थापित करने का बीड़ा इस बार संघ ने उठाया है. संघ सामयिक मुद्दों पर क्या सोचता है? क्या करता है? साथ ही वामपंथ और कांग्रेस के मॉडल से अलग देश को वो क्या देना चाहता है? संघ प्रमुख मोहन भागवत इस तमाम मुद्दों पर संघ का नजरिया पेश करेंगे.

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मोहन भागवत पूरे संघ परिवार के मुखिया हैं. उनकी हर लाईन पूरे परिवार के लिए पत्थर की लकीर होती है. 17 से 19 सितंबर तक दिल्ली के विज्ञान भवन में मोहन भागवत समाज के प्रबुद्ध वर्गों से मुलाकात करेंगे. व्याख्यान का शीर्षक होगा ‘Future of Bharat: An RSS’ perspective’.

इस कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता तमाम राजनीतिक दलों को गया है. इसमें कांग्रेस से लेकर बीएसपी भी शामिल हैं. संघ के सूत्र बताते हैं कि किसी पार्टी से जुड़े व्यक्ति विशेष को न्यौता नहीं दिया है, बल्कि पार्टी प्रमुखों को न्यौता भेज कर अपने प्रतिनिधि भेजने का निवेदन किया गया है. इस कार्यक्रम में भारत में काम कर रहे कम से कम 50-60 राजदूतों को भी न्यौता भेजा गया है.

तीन दिनों में पहले दो दिन सरसंघचालक मोहन भागवत का व्याख्यान होगा. पहले दिन भागवत हिंदुत्व और हिंदू समाज में संघ की भूमिका पर बोलेंगे. दूसरे दिन समाज में सद्भाव पर व्याख्यान होगा और तीसरे दिन यानि 19 को मोहन भागवत सामयिक मुद्दों पर बोलेगें जिसमें ध्रुवीरकरण, असहिष्णुता, राष्ट्रीय सुरक्षा और मॉब लिंचिग भी जैसे मुद्दे शामिल होंगे. कार्यक्रम के अंत में मोहन भागवत वहां मौजूद लोगों के प्रश्नों का जवाब भी देंगे.

सूत्र बताते हैं कि इसमें वे तमाम मुद्दे शामिल होंगे जिसको लेकर राहुल गांधी लगातार हमले बोल रहे हैं. चाहे वो हिंदू कट्टरवाद का मसला हो या फिर मुस्लिम ब्रदरहुड से संघ की तुलना. संघ चाहता है कि इस बैठक में एक बार इन सब से किनारा कर एक नयी लाइन सामने आए जिससे आम आदमी में संघ की पैठ और गहरी हो. सूत्रों की मुताबिक 2017 के बाद संघ की शाखाएं लगातार बढीं हैं जो अब 70000 के करीब हो चुकी हैं. जनता के बीच भी संघ को लेकर लोगों में अब नकारात्मक मानसिकता नहीं हैं.
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संघ का मानना है कि आजादी के बाद देश में तीन तरह की विचारधाराएं आगे बढीं. एक जवाहरलाल नेहरु के नेतृत्व में कांग्रेस, दूसरी वामपंथी विचारधारा और तीसरी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और एकात्म मानववाद की धारा जिसे लेकर संघ आगे बढ़ा. अब कांग्रेस और वामपंथ एक हो चुके हैं और लोगों के बीच संघ की पैठ पहले से ज्यादा बढ़ी है. इसलिए बहस की पूरी कोशिश है कि बहस का मुद्दा बदले. संघ जानता है कि सोच बदलने के लिए एक पीढ़ी लग जाती है इसलिए लक्ष्य है सरसंघचालक के इस कार्यक्रम के बाद लोगों के बीच

आरएसएस के सह सरकारवाह मनमोहन वैद्य अगले एक दो दिनों में एक लेख भी लिखेंगे जिसमें संघ की सोच बताई जाएगी और राहुल गांधी के मुस्लिम ब्रदरहुड से तुलना का करारा जवाब भी दिया जाएगा. संघ को उम्मीद है कि ये लेख सरसंघचालक के कार्यक्रम से पहले बहस को और गरमाएगा. अमेरिका के शिकागो के हिंदू कांप्रेस में भी मोहन भागवत ने दुनिया भर में बसे हिंदुओं को संदेश दिया. अब बारी है दिल्ली के विज्ञान भवन में होने वाले कार्यक्रम की. संघ के सूत्र बताते हैं कि ऐसा नहीं है कि विपक्ष के हमलों के बाद ये कार्यक्रम तय किए गए हैं.

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सरसंघचालक के पूरे साल के कार्यक्रम मार्च में नागपुर में होने वाली आरएसएस की सालाना बैठकों में तय किए जाते हैं और आउटरीच के ऐसे कार्यक्रम तीन साल पहले से ही मोहन भागवत ने शुरु कर दिए थे. तब शुरुआत हुई थी देश के 12 शहरों में प्रबुद्ध लोगों से संवाद करने की लेकिन आने वाला कार्यक्रम खासा बड़ा और अहम है. संघ को भरोसा है कि इससे समाज में अपनी पैठ बढाने में मदद मिलेगी ताकि आने वाली पीढियां संघ को लेकर नकारात्मक रवैया नहीं अपनाएं.
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