RTI संशोधन विधेयक को लेकर राज्यसभा में हंगामा, विपक्षी दलों ने किया विरोध

राज्यसभा में आरटीआई कानून में संशोधन के लिए लाए गए विधेयक का विपक्षी दलों ने विरोध किया. हंगामे के चलते बृहस्पतिवार को सदन की कार्यवाही संक्षिप्त रूप से कई बार स्थगित की गई.

भाषा
Updated: July 25, 2019, 7:00 PM IST
RTI संशोधन विधेयक को लेकर राज्यसभा में हंगामा, विपक्षी दलों ने किया विरोध
कांग्रेस नेता गुला
भाषा
Updated: July 25, 2019, 7:00 PM IST
राज्यसभा में आरटीआई कानून में संशोधन के लिए लाए गए विधेयक का विपक्षी दलों ने विरोध किया. हंगामे के चलते बृहस्पतिवार को सदन की कार्यवाही संक्षिप्त रूप से कई बार स्थगित की गई. उच्च सदन में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, एमडीएमके और माकपा के सदस्यों ने आसन के समक्ष आ कर इस विधेयक को प्रवर समिति में भेजे जाने की मांग की.

भोजनावकाश के बाद सदन में सूचना का अधिकार (संशोधन) विधेयक पर चर्चा किया जाना सूचीबद्ध था. किंतु बैठक शुरू होने पर तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने व्यवस्था के प्रश्न के नाम पर अल्पकालिक चर्चा और ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि इस सत्र में मात्र दो मुद्दों पर अल्पकालिक चर्चा हुई है जबकि सदन ने कई सरकारी विधेयकों को पारित किया है.

उन्होंने कहा कि आसन को विपक्ष की भूमिका का संरक्षण करना चाहिए तथा सदन में अल्पकालिक चर्चा एवं ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत लोकमहत्व के मुद्दों पर चर्चा कराई जानी चाहिए.

‘सरकार प्रस्तावों पर करना चाहिए विचार’

नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने उनकी इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि इस सत्र में केवल दो मुद्दों पर अल्पकालिक चर्चा हुई और तीन विषयों पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव सदन में लिए गए. उन्होंने कहा कि एक मंत्रालय के कामकाज को सूचीबद्ध किया गया था, बाद में उसे भी हटा दिया गया. उन्होंने कहा कि सदन में अल्पकालिक चर्चा और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों पर विचार करना चाहिए.

संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि यह चुनाव के बाद पहला सत्र है और इसमें बजट सत्र एवं मानसून सत्र के कामकाज को पूरा करना था. उन्होंने कहा कि सदन में दो मुद्दों पर अल्पकालिक चर्चा हो चुकी है. जोशी ने कहा कि सदन में अगले सप्ताह विपक्ष की मांग को समायोजित करने का प्रयास किया जाएगा.

तृणमूल की मांग, सत्र नहीं बढ़ाया जाए
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इस पर तृणमूल कांग्रेस के सुखेन्दु शर्मा ने कहा कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, यह सत्र 26 जुलाई तक चलना है और यदि सत्र को बढ़ाया जाना है तो इसकी आधिकारिक घोषणा सभापति द्वारा की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि मंत्री यह कैसे कह सकते हैं कि अगले सप्ताह सदन में कामकाज होगा.

इसी बीच, उप सभापति हरिवंश ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह से सूचना का अधिकार (संशोधन) विधेयक को चर्चा एवं पारित कराने के लिए पेश करने को कहा. सिंह ने जब इस विधेयक को चर्चा के लिए रखा, उसके बाद उप सभापति ने इस विधेयक को प्रवर समिति में भेजने संबंधी विपक्ष के प्रस्तावों को पेश करने को कहा.

विपक्षी दलों ने किया विरोध
उप सभापति ने कहा कि विपक्ष के सदस्य अपने प्रस्तावों को महज पेश करें और इनके बारे में विधेयक पर चर्चा होने के दौरान बोलें. किंतु विपक्ष के सदस्यों ने इसका विरोध किया. इस पर उप सभापति ने कार्मिक मंत्री को विधेयक के बारे में और विपक्ष के सदस्यों को उनके प्रस्तावों के बारे में एक एक मिनट बोलने का अवसर दिया.

सिंह ने विधेयक के बारे में तथा डेरेक, भाकपा के विनय विश्वम और माकपा के इलामारम करीम, कांग्रेस के राजीव गौड़ा तथा माकपा सदस्य के के रागेश ने अपने अपने प्रस्तावों के बारे में संक्षिप्त रूप से बोला.

इसके बाद उप सभापति ने विधेयक और इन प्रस्तावों पर एक साथ चर्चा कराने को कहा. किंतु विपक्षी सदस्यों ने मांग की कि पहले प्रस्तावों को चर्चा कर उन्हें निस्तारित करना चाहिए.

कांग्रेस नेता पी चिदंबरम और आनंद शर्मा ने सदन के नियमों और परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि पहले विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने के बारे में सदन को फैसला करना चाहिए. इसके बाद यदि आवश्यकता हो तो विधेयक पर चर्चा करवाई जानी चाहिए. इसके बाद विपक्षी सदस्यों ने विधेयक को प्रवर समिति में भेजे जाने की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया.

इन दलों ने किया विरोध
कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आप, माकपा के सदस्य और एमडीएमके संस्थापक वाइको आसन के समक्ष आ कर नारेबाजी करने लगे. राजद, वाम, द्रमुक तथा कुछ अन्य दलों के सदस्यों ने अपने स्थानों पर ही खड़े रह कर विरोध जताया.

हंगामे के बीच, हरिवंश ने बैठक को दोपहर दो बज कर करीब 30 मिनट पर पंद्रह मिनट के लिए स्थगित कर दिया. 15 मिनट बाद पीठासीन सभापति टी के रंगराजन आए और उन्होंने बैठक को फिर से 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया.

बैठक पुन: शुरू हुई तथा हरिवंश ने कहा कि सदन में यह नियम और परंपरा रही है कि ऐसे विधेयक और ऐसे प्रस्तावों पर साथ साथ चर्चा कराई जाए. विधेयक पारित होने से पहले इसे प्रवर समिति में भेजने के प्रस्तावों पर सदन की राय ली जाएगी. लिहाजा उन्होंने विधेयक पर चर्चा कराने का निर्णय किया है.

हरिवंश ने विधेयक पर चर्चा के लिए कांग्रेस के जयराम रमेश का नाम पुकारा लेकिन कांग्रेस सदस्य ने सदन में चल रहे हंगामे की ओर आसन का ध्यान दिलाया. इसके बाद हरिवंश ने बीजेपी के डॉ विनय सहस्रबुद्धे को बुलाया.

सहस्रबुद्धे ने हंगामे के बीच अपनी बात शुरू की. लेकिन विपक्षी सदस्य आसन के समक्ष आ कर नारेबाजी करते रहे. बाद में चर्चा के दौरान भी विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण बैठक को दो बार और स्थगित किया गया.
First published: July 25, 2019, 7:00 PM IST
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