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भारत को करारा झटका, रूस करेगा पाक में अरबों डॉलर का निवेश

भारत को करारा झटका, रूस करेगा पाक में अरबों डॉलर का निवेश

दुनिया के तमाम बड़े मुल्क हर क्षेत्र में अपनी दखल बढ़ाने के लिए नए-नए रणनीतिक दोस्त बना रहे हैं और दक्षिण एशिया में अपनी दखल बढ़ाने के लिए रूस ने पाकिस्तान को अपना नया साथी चुना है।

    नई दिल्ली। दुनिया के तमाम बड़े मुल्क हर क्षेत्र में अपनी दखल बढ़ाने के लिए नए-नए रणनीतिक दोस्त बना रहे हैं और दक्षिण एशिया में अपनी दखल बढ़ाने के लिए रूस ने पाकिस्तान को अपना नया साथी चुना है। आने वाले दिनों में रूस पाकिस्तान में अरबों डॉलर का निवेश करने वाला है, रूस को हिंदुस्तान का पारंपरिक साथी माना जाता है ऐसे में पाकिस्तान के साथ उसकी नई दोस्ती भारत के लिए परेशानी का सबब बन सकती है।

    पाकिस्तान की तीसरा और सबसे नया सरपरस्त है रूस, वो रूस जो दशकों से हिंदुस्तान का भरोसेमंद दोस्त रहा है, वो रूस जिससे मिले हथियार आज भी हमारी सेना की ताकत बढ़ा रहे हैं। यहां तक कि आज भी भारत को सबसे ज्यादा हथियारों की सप्लाई रूस ही करता है लेकिन आज की एक कड़वी सच्चाई ये भी है हिंदुस्तान का पुराना साथी रूस पाकिस्तान में अरबों रुपये का निवेश करने वाला है।

    इस डील पर मुहर लग चुकी है और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिखाने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन जल्द ही पाकिस्तान जा सकते हैं। आपको बता दें कि 1970 के बाद ये पहला मौका होगा जब रूस पाकिस्तान में कोई बड़ा निवेश करेगा दरअसल पाकिस्तान लंबे अरसे से अपने दो प्रमुख शहरों कराची और लाहौर के बीच गैस पाइपलाइन बिछाना चाहता है इससे दोनों शहरों में गैस सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें दूर हो जाएंगी।

    पहले खबर थी कि पाकिस्तान चीन की मदद से ये पाइपलाइन बनाएगा लेकिन बाद में चीन ने हाथ पीछे खींच लिया। उसके काफी अरसे तक ये मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा पिछले साल रूस के उफा में पाकिस्तान और रूस के नेताओं की मुलाकात के बाद ये सहमति बनी कि ईरान से पाकिस्तान तक पाइपलाइन बिछाने में रूस मदद करेगा।

    जानकारी के मुताबिक रूस गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट में 2.5 अरब डॉलर का निवेश करेगा जो कि इस पूरे प्रोजेक्ट पर होने वाले खर्च का 85 फीसदी है इसके तहत कराची से लाहौर तक करीब 1100 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी जिससे रोजाना 34 मिलियन क्यूबिक मीटर गैस की सप्लाई होगी। इस प्रोजेक्ट का पहला चरण 2018 में पूरा होगा जबकि पूरा प्रोजेक्ट 2019 तक खत्म होने की उम्मीद है।

    कुछ जानकार इसे पाकिस्तान में रूस के आर्थिक निवेश के तौर पर देख रहे हैं लेकिन कुछ जानकारों का कहना है कि आखिर 35 साल बाद पाकिस्तान में इतने बड़े पैमाने पर निवेश करने की पीछ सिर्फ कारोबारी व्रुाह तो नहीं हो सकती है।

    निवेश के पीछे असल में सारा खेल दक्षिण एशिया में अपनी रणनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने का है दरअसल अमेरिका पहले से ही दक्षिण कोरिया, पाकिस्तान और दूसरे मुल्कों में तगड़े निवेश और सैन्य साझेदारी के दम पर इस इलाके में अच्छी पैठ रखता है और अब रूस भी दक्षिण एशिया में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहता है।

    दक्षिण एशिया में फिलहाल रूस की साझेदारी बड़े पैमाने पर भारत के साथ ही रही है लेकिन दक्षिण एशिया के बदलते रणनीतिक माहौल से तालमेल बिठाने के लिए रूस ने अब पाकिस्तान की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है दूसरी तरफ पाकिस्तान अब तक आर्थिक और सैन्य निवेश के लिए बड़े पैमाने पर अमेरिका पर निर्भर रहा है हाल के दिनों में चीन ने पाकिस्तान में रुचि दिखाई है ऐसे में रूसी निवेश मिलने से पाकिस्तान की अमेरिका पर निर्भरता घटेगी।

    रूस का ये कदम सिर्फ कारोबारी हो सकता है लेकिन भारत के लिए चिंता की बात ये है कि आखिर रूस जैसा पुराना साथी पाकिस्तान से मिल जाएगा और आने वाले दिनों में अगर पाकिस्तान और रूस की दोस्ती बढ़ी तो हिंदुस्तान की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं।

    Tags: America, India, Pakistan

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