Home /News /nation /

भारत में नहीं हो सका रूस के Sputnik V वैक्सीन का फुल रोलआउट, जानें कहां हुई गलती?

भारत में नहीं हो सका रूस के Sputnik V वैक्सीन का फुल रोलआउट, जानें कहां हुई गलती?

रूसी वैक्सीन स्पूतनिक. (फाइल फोटो)

रूसी वैक्सीन स्पूतनिक. (फाइल फोटो)

Sputnik V Coronavirus Vaccine India: मॉस्को स्थित गमलेया नेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी द्वारा विकसित स्पुतनिक वी को रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा पंजीकृत किया गया था और इसके साथ ही यह "कोरोना वायरस के खिलाफ दुनिया का पहला पंजीकृत टीका" बना था. छह महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन स्पुतनिक अभी तक पूरे भारत में व्यावसायिक रूप से उपलब्ध नहीं है. भारत के कुल 116 करोड़ टीकाकरण में से केवल 11.13 लाख खुराक ही स्पुतनिक वी के थे.

अधिक पढ़ें ...

    नई दिल्ली. कोरोना वायरस-रोधी वैक्सीन स्पुतनिक वी की दूसरी खुराक (Sputnik V Second Dose) के अनुमानित उत्पादन की धीमी रफ्तार, भारी कोल्ड स्टोरेज की जरूरतें, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ओर से मंजूरी का इंतजार, रूस में बढ़ते कोविड-19 मामले (Covid-19 in Russia) और निजी अस्पतालों में कम मांग ने भारत में रूसी वैक्सीन के पूरी तरह से विस्तार पर ब्रेक लगा दिया है. अप्रैल के दूसरे सप्ताह में देश के दवा नियामक से मंजूरी मिलने के बाद स्पुतनिक वी वैक्सीन को पहली बार 1 मई को भारत में लॉन्च किया गया था.

    मॉस्को स्थित गामालेया नेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी द्वारा विकसित स्पुतनिक वी को रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा पंजीकृत किया गया था और इसके साथ ही यह “कोरोना वायरस के खिलाफ दुनिया का पहला पंजीकृत टीका” बना था. छह महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन स्पुतनिक अभी तक पूरे भारत में व्यावसायिक रूप से उपलब्ध नहीं है. भारत के कुल 116 करोड़ टीकाकरण में से केवल 11.13 लाख खुराक ही स्पुतनिक वी के थे.

    सितंबर की शुरुआत तक भारत को ‘स्पुतनिक वी’ के कितने डोज मिले
    सितंबर की शुरुआत तक, दवा निर्माता डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज – जो कि रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ) के साथ एक समझौते के तहत भारत में स्पुतनिक वी का एकमात्र वितरक है – को स्पुतनिक वी के करीब 31 लाख फर्स्ट डोज कम्पोनेंट्स और दूसरी खुराक के तौर पर करीब 4.5 लाख सेकेंड डोज कम्पोनेंट्स हासिल हुए थे.

    डॉ रेड्डीज ने ‘स्पुतनिक वी’ के प्रोडक्शन पर क्या कहा
    दो खुराक के स्टॉक के “उतार-चढ़ाव” ने भारत में स्पुतनिक वी वैक्सीन के रोलआउट को रोक दिया था. वैक्सीन विशेषज्ञों का कहना है कि स्पुतनिक वी की सबसे बड़ी चुनौती दूसरी खुराक के उत्पादन में है – जिसे प्रयोगशाला में अच्छी तरह से तैयार करने और असेंबल के मामले में विशेषज्ञों द्वारा अधिक “जटिल” कहा जाता है. हालांकि, डॉ रेड्डीज के अनुसार, सितंबर से स्थिति नियंत्रण में आ गई है और इसके लिए उसने वैक्सीन की दूसरी खुराक के घरेलू उत्पादन को धन्यवाद कहा है.

    News18.com ने डॉ. रेड्डीज और अन्य विशेषज्ञों से बात की कि भारत में ‘स्पुतनिक वी’ के रोलआउट में क्या गलत हुआ और इसे कैसे सुलझाया जा रहा है.

    डॉ रेड्डीज ने कहा ‘सब ठीक है’ लेकिन प्राइवेट मार्केट में डिमांड कम है
    दो-खुराक वाला स्पुतनिक वी दो घटकों से बना है – पुनः संयोजक एडेनोवायरस वेक्टर 26 (जिसे Ad26 या एक प्रमुख खुराक के रूप में भी जाना जाता है) और एडेनोवायरस वेक्टर 5. Ad26 और Ad5 दोनों ही मनुष्यों को प्रभावित करने वाले सामान्य सर्दी वायरस हैं. जहां Ad26 वैक्सीन की पहली खुराक है, वहीं Ad5 दूसरा शॉट है, जिसे 21 दिन या तीन सप्ताह के अंतराल पर दिया जाता है.

    कृषि कानूनों की वापसी से बदली यूपी की सियासत, सपा-रालोद गठबंधन पर योगी के मंत्री ने कही ये बात

    डॉ. रेड्डी के प्रवक्ता के अनुसार, “जबकि दो-खुराक वाले स्पुतनिक वी वैक्सीन को मई में भारत में एक सॉफ्ट पायलट के रूप में लॉन्च किया गया था, इसे आरडीआईएफ से आयातित खेप के आधार पर जुलाई से व्यावसायिक रूप से शुरू किया गया था. हमने भारत भर के प्रमुख अस्पतालों के साथ भागीदारी की, और अपनी कोल्ड चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया क्योंकि टीके के लिए माइनस 18 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है.”

    रूस में कोरोना के मामले में वृद्धि से भी आई परेशानी
    प्रवक्ता ने बताया कि शुरुआत में उसे पहले डोज की 31.5 लाख खुराक और दूसरे डोज की 4.5 लाख खुराक मिली. उन्होंने कहा, “जून-अगस्त की अवधि में, सेकेंड डोज कम्पोनेंट्स की आपूर्ति के संबंध में चुनौतियां थीं क्योंकि रूस में कोविड -19 मामलों में वृद्धि से आयात प्रभावित हुआ था.” प्रवक्ता ने कहा, “सितंबर की शुरुआत में, भारत में एक भागीदार (पैनेसिया बायोटेक) से शुरू होने वाले सेकेंड डोज कम्पोनेंट्स की आपूर्ति के साथ, हमारे बाजार की सप्लाई को नई तेजी मिली. हम साझेदार अस्पतालों को पहली और दूसरी खुराक के कम्पोनेंट्स को बराबर मात्रा में आपूर्ति करने में सक्षम थे.”

    निजी बाजार की बिक्री में तेज गिरावट
    हालांकि, निजी अस्पतालों में वैक्सीन की घटती बिक्री की वजह से भारत में स्पुतनिक वी के रोलआउट को फिर से एक परेशानी का सामना करना पड़ा. प्रवक्ता ने कहा, “सितंबर तक, बाजार की स्थिति के संदर्भ में, भारत में समग्र वैक्सीन उत्पादन में भारी पैमाने पर और सरकार के माध्यम से मुफ्त वितरण के साथ, निजी बाजार की बिक्री में तेज गिरावट देखने को मिली और स्पुतनिक वी पूरी तरह से निजी था.”

    Tags: Coronavirus, India, Russia, Sputnik V

    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर