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भारत को 2021 के आखिरी में मिलनी शुरू होगी S-400 मिसाइल प्रणाली: रूसी अधिकारी

भाषा
Updated: February 5, 2020, 10:50 PM IST
भारत को 2021 के आखिरी में मिलनी शुरू होगी S-400 मिसाइल प्रणाली: रूसी अधिकारी
भारत पिछले साल इस मिसाइल प्रणाली के लिए 80 करोड़ डॉलर की पहली किस्त का भुगतान भी कर चुका है. (File Photo)

भारत ने 2018 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (American President Donald Trump) की प्रतिबंध लगाने की चेतावनी को दरकिनार करते हुए रूस से एस-400 हवाई रक्षा मिसाइल प्रणाली (S-400 air defense missile system) की पांच इकाई पांच अरब डॉलर में खरीदने का करार किया था

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लखनऊ. रूस (Russia) सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली एस-400 की आपूर्ति भारत को वर्ष 2021 के अंत से शुरू कर देगा और इसमें कोई देरी नहीं होगी. यह जानकारी बुधवार को रूस के एक शीर्ष अधिकारी ने दी. उल्लेखनीय है कि भारत ने 2018 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (American President Donald Trump) की प्रतिबंध लगाने की चेतावनी को दरकिनार करते हुए रूस से एस-400 हवाई रक्षा मिसाइल प्रणाली (S-400 air defense missile system) की पांच इकाई पांच अरब डॉलर में खरीदने का करार किया था.

भारत पिछले साल इस मिसाइल प्रणाली के लिए 80 करोड़ डॉलर की पहली किस्त का भुगतान भी कर चुका है.

दोनों देशों के बीच मजबूत रक्षा सहयोग
सैन्य प्रौद्योगिकी सहयोग की संघीय सेवा (एफएसएमटीसी)के उप निदेशक व्लादिमीर द्रोझझोव ने डिफेंस एक्सपो से इतर "पीटीआई-भाषा" को बताया, "एस-400 के करार को पूर्व निर्धारित समय सीमा में लागू किया जाएगा. पहली प्रणाली की आपूर्ति वर्ष 2021 के अंत से शुरू हो जाएगी. हम अपने वादे को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं." उन्होंने कहा, "दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बहुत मजबूत है और हम इसे और बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं."

उल्लेखनीय है कि यह मिसाइल रोधी प्रधाली 400 किलोमीटर के दायरे में दुश्मन के विमान, मिसाइल और यहां तक कि ड्रोन को भी नष्ट करने में सक्षम है.

मिसाइल का निर्माण शुरू
एक अन्य रूसी अधिकारी ने बताया कि भारत के लिए एस-400 मिसाइल प्रणाली का निर्माण कार्य शुरू हो गया है और पांच इकाई की आपूर्ति वर्ष 2025 तक कर दी जाएगी. गौरतलब है कि अमेरिका ने रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं और इसमें रूस से रक्षा उपकरणों की खरीद करने वाले देशों के खिलाफ कार्रवाई करने का प्रावधान है.IOC ने रूस से कच्चे तेल आयात को लेकर किया पहला समझौता
वहीं सार्वजनिक क्षेत्र की इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने रूस से कच्चे तेल के आयात के लिये बुधवार को पहले निश्चित अवधि के अनुबंध पर हस्ताक्षर किये. ऊर्जा खपत के मामले में तीसरा सबसे बड़ा देश भारत पश्चिम एशिया में तनाव को देखते हुए कच्चे तेल के आपूर्ति स्रोत को विविध रूप देना चाहता है. इसी को ध्यान में रखकर यह समझौता हुआ है.

रूस की कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी इगोर सेचिन के साथ बैठक के बाद पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि आईओसी ने रोसनेफ्ट से 20 लाख टन उराल स्तर के कच्चे तेल के आयात को लेकर समझौता किया है.

भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों में से 83 प्रतिशत आयात के जरिये पूरा करता है. इसमें से दो तिहाई आयात पश्चिम एशिया से आता है. इराक के बाद सऊदी अरब सबसे बड़ा कच्चे तेल का आपूर्तिकर्ता है.

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First published: February 5, 2020, 10:50 PM IST
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