'लद्दाख में 1962 के बाद सबसे गंभीर हालात, सीमा पर शांति चीन से संबंधों का आधार'

'लद्दाख में 1962 के बाद सबसे गंभीर हालात, सीमा पर शांति चीन से संबंधों का आधार'
सीमा विवाद को लेकर विदेश मंत्री ने शांति प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया है. (File Photo)

सीमा विवाद (Border Dispute) के संबंधों पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने कहा है कि भारत ने चीनी पक्ष (Chinese Side) को स्पष्ट रूप से बता दिया है कि सीमा पर शांति हमारे संबंधों का आधार है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 26, 2020, 11:03 PM IST
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'नई दिल्ली. विदेश मंत्री (Foreign Minister) एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने कहा है कि चीन के साथ सीमा विवाद (Border Dispute) का समाधान सभी समझौतों एवं सहमतियों का सम्मान करते हुए निकाला जाना चाहिए. उन्होंने इस मुद्दे पर भारत का रुख स्पष्ट किया है. जयशंकर ने लद्दाख की स्थिति को 1962 के संघर्ष के बाद ‘सबसे गंभीर’ बताया और कहा कि दोनों पक्षों की ओर से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अभी तैनात सुरक्षा बलों की संख्या भी ‘अभूतपूर्व’ है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सभी सीमा स्थितियों का समाधान कूटनीति के जरिये हुआ.

एक इंटरव्यू में कहीं बातें
अपनी पुस्तक ‘द इंडिया वे : स्ट्रैटजीज़ फॉर एन अंसर्टेन वर्ल्ड’ के लोकार्पण से पहले रेडिफ डॉट काम को दिए इंटरव्यू में विदेश मंत्री ने कहा, ‘जैसा कि आप जानते हैं, हम चीन के साथ राजनयिक और सैन्य दोनों माध्यमों से बातचीत कर रहे हैं. वास्तव में दोनों साथ चल रहे हैं .’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन जब बात समाधान निकालने की है, तब यह सभी समझौतों एवं सहमतियों का सम्मान करके प्रतिपादित किया जाना चाहिए. और एकतरफा ढंग से यथास्थिति में बदलाव का प्रयास नहीं होना चाहिए .’ गौरतलब है कि भारत जोर दे रहा है कि चीन के साथ सीमा गतिरोध का समाधान दोनों देशों के बीच सीमा प्रबंधन के लिए वर्तमान समझौतों और प्रोटोकाल के अनुरूप निकाला जाना चाहिए.

यह पूछे जाने पर कि उन्होंने सीमा विवाद से पहले लिखी अपनी पुस्तक में भारत और चीन के भविष्य का चित्रण कैसे किया है, विदेश मंत्री ने कहा कि यह दोनों के लिये अत्यंत महत्वपूर्ण संबंध है और इसके लिये रणनीति और दृष्टि की जरूरत है.
'सीमा पर शांति हमारे संबंधों का आधार है'


जयशंकर ने कहा, ‘मैंने कहा है कि भारत और चीन के साथ मिलकर काम करने की क्षमता एशिया की शताब्दी का निर्धारण करेगी. लेकिन उनकी कठिनाई इसे कमतर कर सकती है. और इसलिये यह दोनों के लिये बेहद महत्वपूर्ण संबंध है. इसमें समस्याएं भी है और मैंने स्पष्ट रूप से इसे माना है.’ उन्होंने कहा, ‘हमें इसमें ईमानदार संवाद की जरूरत है, भारतीयों के बीच और भारत और चीन के बीच. इसलिए इस संबंध में रणनीति और सोच की जरूरत है.’ सीमा विवाद के संबंधों पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर जयशंकर ने कहा कि भारत ने चीनी पक्ष को स्पष्ट रूप से बता दिया है कि सीमा पर शांति हमारे संबंधों का आधार है.
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