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सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री ओपन कर सकता है बोर्ड, SC में दे सकते हैं हलमफनामा

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री ओपन कर सकता है बोर्ड, SC में दे सकते हैं हलमफनामा

सबरीमाला मंदिर की तस्वीर- PTI

सबरीमाला मंदिर की तस्वीर- PTI

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष आयुवर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी के औचित्य पर सवाल उठाये थे. कोर्ट की ओर से कहा गया था कि मासिक धर्म 10 वर्ष की उम्र से पहले भी शुरू हो सकता है और रजोनिवृत्ति 50 वर्ष से पहले भी हो सकती है.

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    सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के कठोर लहजे के बाद मंदिर का प्रबंधन बोर्ड नरम रुख अख्तियार कर सकता है. प्रसिद्ध भगवान अयप्पा मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की निषेध पर बहस के दौरान त्रावणकोर देवास्वम बोर्ड (टीडीबी) के रुख में बदलाव आया है, जिसने 10-50 आयु वर्ग की महिलाओं का मंदिर में प्रवेश प्रतिबंधित किया हुआ है, क्योंकि वे '41 दिन की शुद्धता का पालन नहीं कर सकतीं.' अब इस मामले में टीडीबी सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा जमा कर सकता है.

    हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड जल्द ही नया हलफनामा जमा करने की तैयारी में है. उन्होंने मंदिर तंत्री (सर्वोच्च पुजारी) के नवासे राहुल ईश्वर का हवाला देते हुए कहा कि सबरीमाला में कोई भेदभाव नहीं है. राहुल ईश्वर ने कहा, 'विभिन्न मंदिरों में अलग-अलग रीति-रिवाज होते हैं. सबरीमाला में कोई भेदभाव नहीं है, कुछ प्रतिबंध हैं. देवी की प्रकृति की वजह से ऐसा है.'

    इससे पहले 19 जुलाई को बोर्ड की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंघवी ने कहा कि यह बिना द्वेष वाली परंपरा है और महिलाओं के लिये 41 दिन की शुद्धता का पालन करना शारीरिक रूप से असंभव है.

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    उन्होंने बोर्ड की उस अधिसूचना को सही ठहराया, जिसमें दस से 50 वर्ष आयुवर्ग की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर रोक लगायी गई थी. हालांकि पीठ ने कहा, ‘किसी का मासिक धर्म 45 वर्ष की उम्र में बंद हो सकता है. नौ साल की उम्र की लड़की को भी मासिक धर्म हो सकता हैस इसलिये, इस अधिसूचना का कोई औचित्य नहीं है.’

    इसी सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष आयुवर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी के औचित्य पर सवाल उठाये थे. कोर्ट की ओर से कहा गया था कि मासिक धर्म 10 वर्ष की उम्र से पहले भी शुरू हो सकता है और रजोनिवृत्ति 50 वर्ष से पहले भी हो सकती है.

    चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ भगवान अयप्पा के 800 साल पुराने मंदिर की देखभाल करने वाले त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड के इस अनुरोध पर सहमति नहीं जताईयी कि इस आयुवर्ग की महिलाओं पर पाबंदी इसलिये लगायी गयी है क्योंकि वे तीर्थयात्रा के लिये जरूरी 41 दिन तक शुद्धता कायम नहीं रख सकतीं.

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    वहीं एक महिलाओं का मंदिर में प्रवेश का समर्थन करने के लिये केरल सरकार की आलोचना करते हुए टीडीबी के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि सत्तारूढ़ एलडीएफ पूजा स्थलों के रीति रिवाजों और परंपराओं का सरंक्षण करने के अपने कर्तव्य में नाकाम रहा है. पिछली यूडीएफ सरकार के दौरान त्रावणकोर देवास्वम बोर्ड (टीडीबी) के प्रमुख रहे कांग्रेस नेता पी गोपालकृष्णन ने आरोप लगाया , ‘पूजा स्थलों के रीति रिवाजों और परंपराओं का सरंक्षण करना सरकार का कर्तव्य है , लेकिन एलडीएफ सरकार इस सिद्धांत से पीछे हटी है.’

    सबरीमाल मंदिर में विशेष आयु समूह की महिलाओं के प्रवेश के विवादित मुद्दे पर केरल सरकार ने अपना रूख बदलते हुए सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वह अब उनके मंदिर में प्रवेश करने की पक्षधर है. टीडीबी अध्यक्ष ए पद्मकुमार ने कहा, 'वकील ने अदालत ने क्या कहा वह बोर्ड के पुराने सदस्यों का फैसला है. टीडीबी को अभी फैसला लेना बाकी है. हम जल्द ही एक बैठक करेंगे और अदालत को इसके बारे में जानकारी देंगे.'

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    Tags: Kerala

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