सबरीमाला विवाद: सभी धर्मों के ऐसे मामलों को एकसाथ सुनेगी SC की 9 जजों की संविधान पीठ

सबरीमाला विवाद: सभी धर्मों के ऐसे मामलों को एकसाथ सुनेगी SC की 9 जजों की संविधान पीठ
सुप्रीम कोर्ट की 9 सदस्‍यीय संविधान पीठ ने सबरीमाला विवाद पर की सुनवाई.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के तत्‍कालीन मुख्‍य न्‍यायाधीश रंजन गोगोई (Former CJI Ranjan Gogoi) की अध्‍यक्षता वाली पांच सदस्‍यीय संविधान पीठ (Constitution Bench) ने 14 नवंबर, 2019 को सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Temple) में महिलाओं के प्रवेश के मामले को 9 सदस्‍यीय संविधान पीठ को भेज दिया था. इससे पहले 28 सितंबर, 2018 को तत्‍कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा की पीठ ने मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दे दी थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 13, 2020, 12:54 PM IST
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नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ ने सबरीमाला विवाद पर सुनवाई के दौरान कहा कि इस्‍लाम, पारसी, दाउदी बोहरा समुदाय से जुड़े ऐसे सभी मामलों को अगली तारीख पर एकसाथ सुना जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के मुख्‍य न्‍याशधीश एसए बोबडे की अध्‍यक्षता वाली संविधान पीठ ने कहा कि सभी वकील तय कर लें कि कौन किस मुद्दे पर कितनी देर दलील पेश करेगा. इस पर त्रावणकोर देवास्‍वाम बोर्ड की ओर से पेश वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सबरीमाला मुद्दा बहुत अहम है. इसका फैसला सभी धर्मों को प्रभावित करेगा. कोर्ट को इस पर अलग से फैसला देना चाहिए. इस पर कोर्ट ने इनकार करते हुए कहा कि सभी मामलों को एकसाथ सुना जाएगा. पीठ में मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे के अलावा जस्टिस आर. भानुमति, अशोक भूषण, एल. नागेश्वर राव, मोहन एम. शांतनगौदर, एस. अब्दुल नजीर, आर. सुभाष रेड्डी, बीआर गवई और सूर्यकांत शामिल हैं.

SC के सेक्रेटरी जनरल सभी मामलों के वकीलों की बैठक कराएंगे
सीजेआई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल सभी वकीलों की बैठक कराएंगे. वकीलों की ये बैठक 17 जनवरी को होगी. बैठक में तय किया जाएगा कि कोर्ट में पेश किए जाने वाला मुद्दा तय किया जाएगा. उन्‍होंने कहा कि दाउदी बोहरा समुदाय, मुस्लिम महिलाओं के मस्जिदों और पारसी महिलाओं के अग्नि मंदिर में प्रवेश के सभी मामलों को एकसाथ सुना जाएगा. इन सभी मामलों को एकसाथ सुनवाई के लिए लाया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने सभी वकीलों को सभी मुद्दों पर आपस में बातचीत के लिए 3 सप्‍ताह का समय दिया है. इस दौरान सीजेआई ने अयोध्‍या जमीन विवाद के मामले का उदाहरण दिया. उन्‍होंने कहा कि इस विवाद से जुड़े सभी मामलों के वकील खुद ही एकसाथ सुनवाई के लिए तैयार हो गए थे.

फैसला आने तक महिलाओं को प्रवेश की होगी अनुमति
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के पांच जजों की पीठ ने 14 नवंबर, 2019 को केरल के सबरीमाला विवाद (Sabarimala Dispute) को लेकर दायर पुनर्विचार याचिका बहुमत से बड़ी बेंच को रेफर कर दी थी. साथ ही कहा था कि 9 जजों की संविधान पीठ (Constitution Bench) का फैसला आने तक भगवान अय्यपा के मंदिर में महिलाओं का प्रवेश जारी रहेगा. पांच में दो जजों ने इसके खिलाफ निर्णय दिया था. आज 9 जजों की संविधान पीठ मामले की सुनवाई कर रही है. सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर, 2018 में दिए फैसले में सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Temple) में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी.



सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ इन मुद्दों पर दे सकती है फैसला
सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की पीठ धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद-25 और 26) के मौलिक अधिकार और संविधान में दिए गए अन्य मौलिक अधिकारों विशेषकर समानता के अधिकार के बीच सामंजस्य परिभाषित करेगी. धार्मिक स्वतंत्रता के संविधान में दिए गए अधिकार (अनुच्छेद-25(1)) में कही गई लोक प्रशासन, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन होने की बात का क्या मतलब है? नैतिकता और संवैधानिक नैतिकता की संविधान में अलग-अलग व्याख्या नहीं है. ऐसे में पीठ व्‍याख्‍या कर सकती है कि प्रस्ताव के मुताबिक नैतिकता ऊपर रहेगी या धार्मिक आस्था और विश्वास तक सीमित होगी. कोर्ट यह भी परीक्षण कर सकता है कि कोई चीज किस हद तक किसी धर्म का अभिन्न हिस्सा होगा.

'सेक्‍शन ऑफ हिंदू का मतलब भी स्‍पष्‍ट कर सकती है पीठ'
धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देने वाले अनुच्छेद-25(2)(बी) में दिए गए शब्द सेक्शन ऑफ हिंदू का मतलब भी पीठ स्‍पष्‍ट कर सकती है. आज यह भी तय किया जा सकता है कि क्या कोई अनिवार्य धार्मिक प्रथा या धार्मिक संप्रदाय को अनुच्छेद-26 के तहत संरक्षण मिला है, धार्मिक मामलों में जनहित याचिकाओं पर किस हद तक कोर्ट को विचार करना चाहिए. बता दें कि 28 सितंबर, 2018 को केरल के सबरीमाला मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्‍कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा (Former CJI Deepak Mishra) की अगुआई में फैसला सुनाते हुए सभी महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत दी थी. इसके बाद पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन हुए थे. कई जगह हिंसा भी भड़क गई थी.

फैसले को लेकर दाखिल की गई थीं 54 पुनर्विचार याचिकाएं
पुनर्विचार याचिका (Review Petition) पर फैसला देते हुए तत्‍कालीन मुख्‍य न्‍यायाधीश रंजन गोगोई (Former CJI Ranjan Gogoi) ने 14 नवंबर, 2019 को कहा था, 'याचिकाकर्ता इस बहस को पुनर्जीवित करना चाहता है कि धर्म का अभिन्न अंग क्या है? धार्मिक प्रथाओं को सार्वजनिक आदेश, नैतिकता और भाग-3 के अन्य प्रावधानों के खिलाफ नहीं होना चाहिए.' कोर्ट के इस फैसले पर करीब 54 पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की गई थीं. याचिका दायर करने वालों में नेशनल अयप्पा डिवोटीज (विमिन) एसोसिएशन, नायर सर्विस सोसायटी और ऑल केरल ब्राह्मण एसोसिएशन की शामिल हैं.

2018 में आए फैसले के बाद भी महिलाओं को नहीं दिया प्रवेश
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जब 18 अक्टूबर, 2018 को मंदिर के कपाट खुले तो महिलाएं भगवान अयप्पा के दर्शन के लिए पहुंचीं. उस समय माहौल बेहद तनावभरा था. मंदिर का बोर्ड सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजदू महिलाओं को प्रवेश देने के हक में नहीं था. मंदिर के रास्ते में हिंसा हुई. महिला पत्रकारों पर हमले किए गए. मीडिया की गाड़ियां तक तोड़ी गईं. काफी लोगों को गिरफ्तार किया गया. महिलाओं को मंदिर से 20 किमी पहले से रोक लिया गया था. कई महिलाओं को आधे रास्ते से लौटा दिया गया था. इसके बाद 2 जनवरी, 2019 को दो महिलाओं बिंदु और कनकदुर्गा ने दावा किया कि उन्होंने तड़के मंदिर में भगवान के दर्शन किए. इसके बाद 'मंदिर की शुद्धि' का हवाला देते हुए दरवाजे बंद कर दिए गए.

महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी को लेकर दशकों पुराना है विवाद
केरल के पथनामथित्‍ता जिले की पहाड़ियों के बीच वृद्धि के भगवान अयप्पा का मंदिर है. इस मंदिर तक पहुंचने के लिए 18 पावन सीढ़ियों को पार करना पड़ता है, जिनके अलग-अलग अर्थ भी बताए गए हैं. इस मंदिर में हर साल नवंबर से जनवरी तक श्रद्धालु भगवान अयप्पा के दर्शन के लिए आते हैं. बाकी पूरे साल यह मंदिर आम भक्तों के लिए बंद रहता है. मकर संक्रांति के अलावा यहां 17 नवंबर को मंडलम मकर विलक्कू उत्सव मनाया जाता है. मलयालम महीनों के पहले पांच दिन भी मंदिर के कपाट खोले जाते हैं. सबरीमाला मंदिर करीब 800 साल से अस्तित्व में है. इसमें महिलाओं के प्रवेश पर विवाद भी दशकों पुराना है. दरअसल, भगवान अयप्पा नित्य ब्रह्मचारी माने जाते हैं, जिसकी वजह से उनके मंदिर में ऐसी महिलाओं का आना मना है, जो मां बन सकती हैं. ऐसी महिलाओं की उम्र 10 से 50 साल निर्धारित की गई है.

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