सबरीमाला केस: सुप्रीम कोर्ट ने कोई भी आदेश सुनाने से किया इनकार, 2 महिलाओं को दी सुरक्षा

सबरीमाला केस: सुप्रीम कोर्ट ने कोई भी आदेश सुनाने से किया इनकार, 2 महिलाओं को दी सुरक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला पर कोई भी आदेश देने से किया इनकार.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) के चीफ जस्टिस एसए बोबडे (Chief Justice SA Bobde) ने कहा कि 2018 का सुप्रीम कोर्ट का आदेश अंतिम आदेश नहीं है, क्योंकि मामला अभी भी 7 जजों की संविधान पीठ के पास लंबित है.

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  • Last Updated: December 13, 2019, 2:20 PM IST
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नई दिल्ली. केरल के सबरीमाला मंदिर (sabrimala Temple) जाने वाली महिलाओं को सुरक्षा दिए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस एसए बोबडे (Chief Justice SA Bobde) ने कहा कि पुनर्विचार याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की संविधान पीठ को भेजा गया है. जब तक सात जजों की पीठ इस मामले में अपना कोई फैसला नहीं देती है, तब तक हम कोई भी आदेश जारी नहीं कर सकते.

चीफ जस्टिस बोबडे ने कहा कि 2018 का सुप्रीम कोर्ट का आदेश अंतिम आदेश नहीं है, क्योंकि मामला अभी भी 7 जजों की संविधान पीठ के पास लंबित है. इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई तक एक्टिविस्ट बिंदु अम्मिनी और रेहाना फातिमा को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने के आदेश दिए हैं.


चीफ जस्टिस ने कहा कि कुछ विषय देश में ऐसे भी होते है, जो बहुत विस्फोटक होते हैं. ये उन्हीं में से एक हैं. सुनवाई के दौरान सीजेआई ने महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अपराध पर भी चिंता जताई. सीजेआई ने सबरीमाला जाने वाली महिलाओं को सुरक्षा देने से इनकार करते हुए कहा कि इस मामले में पुराने आदेश को ही माना जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस पूरे मामले को सात जजों की बेंच को सौंपा गया है और जल्द ही इस बेंच का गठन किया जाएगा.



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गौरतलब है कि सबरीमाला का दो महीनों का त्योहार पिछले हफ्ते औपचारिक रूप से शुरू हो गया है. हजारों श्रद्धालु अयप्पा के दर्शन के लिए सबरीमाला पहुंचना शुरू हो गए हैं. 16 नवंबर को मंडल पूजा उत्सव के लिए सबरीमाला मंदिर के कपाट खोले गए थे. सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में हर उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत दे दी थी. हालांकि, इस फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे 7 जजों की बड़ी बेंच को भेज दिया था.

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