कड़ी सुरक्षा के बीच सबरीमाला मंदिर के गेट दर्शनार्थियों के लिए खुले

कड़ी सुरक्षा के बीच सबरीमाला मंदिर के गेट दर्शनार्थियों के लिए खुले
सबरीमाला मंदिर के द्वार दर्शनार्थियों के लिए खुले (सांकेतिक तस्वीर)

विवादों के बीच सबरीमला मंदिर के गेट श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोल दिए गए हैं. मंदिर में सुरक्षा व्यस्था बहुत कड़ी रखी गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 5, 2018, 9:24 PM IST
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अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था के बीच, दो दिवसीय विशेष पूजा के लिए भगवान अयप्पा मंदिर के दरवाजे सोमवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिये गये. आशंका है कि मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का विरोध करने वाले प्रदर्शन कर सकते हैं.

पुलिस ने कहा कि मंदिर में 10 से 50 वर्ष आयुवर्ग की कोई लड़की या महिला नजर नहीं आई लेकिन उन्हें जानकारी मिली है कि 25 साल की एक महिला अपने पति और दो बच्चों के साथ मंदिर की तरफ आ रही है.

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पम्बा में एक पुलिस अधिकारी ने पीटीआई भाषा से कहा, ‘‘हमें जानकारी मिली है कि एक महिला मंदिर आने के रास्ते में है लेकिन किसी ने हमसे अब तक सुरक्षा की गुहार नहीं लगाई है.’’
पम्बा वह स्थान है जहां से श्रद्धालु पर्वत चोटी पर स्थित सबरीमला मंदिर तक पांच किलोमीटर तक पैदल जाते हैं.

सबरीमला को लगभग किले में तब्दील कर दिया गया है. मंदिर परिसर और आसपास बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी, सशस्त्र कमांडो की मौजूदगी के साथ साथ सुरक्षा के चाक चौबंद प्रबंध किए गये हैं. निगरानी कैमरे और मोबाइल फोन जैमर भी लगाए गए हैं.

मंदिर के तंत्री (प्रधान पुजारी) कंडारारू राजीवरू और मेलशांति (मुख्य पुजारी) उन्नीकृष्णन नामबूथिरी ने मिलकर शाम पांच बजे गर्भगृह के द्वार खोले और हजारों श्रद्धालुओं ने मंदिर में प्रवेश किया.

मंदिर अधिकारियों ने कहा कि सोमवार को कोई विशेष पूजा नहीं होगी. रात दस बजे इसके द्वार बंद कर दिये जाएंगे. दरवाजे मंगलवार को फिर खुलेंगे.

मंगलवार को त्रावणकोर के आखिरी राजा चिथिरा थिरुनल बलराम वर्मा के जन्मदिवस के अवसर पर मंगलवार को विशेष पूजा ‘श्री चित्रा अत्ता तिरूनाल’ होगी.

कई भाजपा नेता और अयप्पा धर्म सेना के अध्यक्ष राहुल ईश्वर शाम को मंदिर परिसर पहुंचे.

टीवी फुटेज में दिखा है कि श्रद्धालु पुलिसकर्मियों के साथ निलक्कल से पम्बा के बीच में कई स्थानों पर बहस कर रहे हैं. यह मंदिर तक पहुंचने का रास्ता है.

पुलिस द्वारा गहन जांच से परेशान होने के अलावा श्रद्धालुओं की शिकायत है कि आधार शिविर में सुविधाओं की कमी है. अगस्त में आयी बाढ़ की वजह से यहां काफी क्षति पहुंची थी.

मीडियाकर्मियों को भी सुबह में निलक्कल से पम्बा जाने नहीं दिया जा रहा था लेकिन बाद में यह प्रतिबंध हटा दिया गया.

इस बीच, केरल उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले को लागू करने के नाम पर श्रद्धालुओं को परेशान नहीं किया जाना चाहिए.

पुलिस और प्रशासन हाई अलर्ट पर हैं. मंदिर के आसपास सीआरपीसी की धारा 144 लगा दी गयी है और यह मंगलवार रात मंदिर के दरवाजे खुले रहने तक जारी रहेगी.

पथनमथिट्टा के पुलिस अधीक्षक टी नारायणन ने रविवार को पीटीआई-भाषा को बताया था कि श्रद्धालु आराम से ‘दर्शन’ कर सकें इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है.

बीस सदस्यीय कमांडो टीम और 100 महिलाओं समेत 2,300 कर्मियों को सुचारू ‘दर्शन’ तथा श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैनात किया गया है.

पचास वर्ष से अधिक की आयु वाली कम से कम 15 महिला पुलिसकर्मियों को ‘सन्निधानम’ में तैनात किया गया है.

यह पूछे जाने पर कि मंदिर के अंदर केवल 50 साल से अधिक की महिला कर्मियों को तैनात क्यों किया गया है, पुलिस महानिरीक्षक एम आर अजीत कुमार ने कहा कि विभिन्न विभागों से ‘‘योग्य’’ उम्र की महिला कर्मियों को काफी समय से मंदिर में तैनात किया गया है.

उच्चतम न्यायालय के सभी महिलाओं को सबरीमला मंदिर में प्रवेश देने के फैसले के बाद इस मंदिर को 17 अक्टूबर को पहली बार छह दिन के लिए खोला गया था. अब यह दूसरा मौका है जब मंदिर को खोला जा रहा है.

यह दूसरी बार है जब उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद मंदिर को ‘दर्शन’ के लिए खोला गया. मंगलवार को त्रावणकोर के आखिरी राजा चिथिरा थिरुनल बलराम वर्मा के जन्मदिवस के अवसर पर सोमवार शाम को पांच बजे विशेष पूजा के लिए मंदिर खोला गया. इस विशेष पूजा को ‘श्री चित्रा अत्ता तिरूनाल’ कहते हैं. मंदिर मंगलवार को रात दस बजे बंद किया जाएगा.

दोबारा खुलेंगे सबरीमाला के द्वार, 1000 महिलाओं समेत 2300 सुरक्षाकर्मी तैनात

भगवान अयप्पा मंदिर के मासिक पूजा के लिए खुलने के पहले मंदिर परिसर और आसपास बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी, सशस्त्र कमांडो और निगरानी कैमरा की मौजूदगी के साथ साथ सुरक्षा के चाक चौबंद प्रबंध किए गए. यह अभूतपूर्व सुरक्षा प्रबंध मंदिर में माहवारी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश को मंजूरी देने के उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद सबरीमाला में पिछले महीने प्रदर्शन को देखते हुए की गई है. राज्य की एलडीएफ सरकार द्वारा उच्चतम न्यायालय के फैसले को लागू करने के विरोध में श्रद्धालुओं और हिंदू संगठनों ने 17-22 अक्टूबर तक कड़ा विरोध प्रदर्शन किया था.

मंदिर में पिछले महीने महिलाओं के प्रवेश के दौरान हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन से सबक लेते हुए प्रशासन ने सबरीमाला मंदिर और आसपास के इलाके में चार या दो से अधिक लोगों के एक साथ पूजा करने पर रोक लगा दी है.

पुलिस ने कहा है कि भगवान का दर्शन शांति पूर्वक सम्पन्न करने और भक्तों की सुरक्षा को देखते हुए 2300 सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है, जिसमें 20 सदस्यों वाली एक कमान्डो टीम है और 100 सदस्यीय एक महिला टीम भी तैनाती की गई है. इस तरह की किलेबंदी कोपांडलम राजपरिवार की तरफ से बीजेपी और कांग्रेस की आलोचना के बाद की  गई है.

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