आज से फिर खुलेंगे सबरीमाला के द्वार, विरोध के चलते केरल में भारी तनाव

आज से फिर खुलेंगे सबरीमाला के द्वार, विरोध के चलते केरल में भारी तनाव
सबरीमाला मंदिर

मंदिर खुलने से एक दिन पहले वहां अप्रत्याशित सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं. एक हफ्ते तक सबरीमाला में धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू रहेगी

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 16, 2018, 6:07 AM IST
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सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा का मंदिर आज से दो महीने के लिए खुलेगा. मंदिर का गर्भगृह शुक्रवार को शाम पांच बजे खुलेगा. सुप्रीम कोर्ट के 28 सितंबर के आदेश के बावजूद कोई भी महिला विरोध के चलते मंदिर में अब तक नहीं जा पायी हैं. मंदिर खुलने से एक दिन पहले वहां अप्रत्याशित सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं. एक हफ्ते तक सबरीमाला में धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू रहेगी.

इससे पहले केरल में गुरुवार को एक सर्वदलीय बैठक भी हुई लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला. तीन घंटे तक चली बैठक के बाद मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि उनकी सरकार सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू करने के लिए बाध्य है. उन्होंने कहा, ‘‘सरकार के पास कोई विकल्प नहीं है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 28 सितंबर के फैसले पर कोई रोक नहीं लगी है. इसका मतलब है कि 10-50 साल उम्र की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में जाने का अधिकार है.’’

विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने सरकार पर अड़ियल होने का आरोप लगाया है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पी एस श्रीधरण पिल्लै ने बैठक को समय की बर्बादी बताया.



इस बीच भूमाता ब्रिगेड की फाउंडर तृप्ति देसाई ने मुख्यमंत्री पिनरई विजयन को खत लिखकर सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर में जाने के लिए सुरक्षा की मांग की है. वो 17 नवंबर को मंदिर जाएंगी
फैसले का विरोध

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से केरल के बहुचर्चित सबरीमाला मंदिर के द्वार सभी उम्र की महिलाओं के लिए खुल चुके हैं. इस फैसले को लेकर केरल में सियासी घमासान मचा हुआ है. कई संगठन और राजनीतिक दल मंदिर में महिलाओं की एंट्री के विरोध में हैं. बीजेपी ने मार्च निकालकर केरल सरकार का विरोध भी किया है. ऐसे में राज्य में तनाव का माहौल है. कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियां चाहती हैं कि मंदिर में परंपरा के मुताबिक 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर बैन लगा रहे. पिछले कुछ समय से मंदिर में एंट्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ लगातार हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं.

जनवरी में होगी सुनवाई
इससे पहले 13 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया.सुप्रीम कोर्ट 22 जनवरी को अगली सुनवाई करेगा. आपको बता दें कि सबरीमाला मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए 49 पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई हैं.

क्या है दलील?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले 10 से 50 साल तक की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर रोक थी. परंपरा अनुसार लोग इसका कारण महिलाओं के पीरियड्स यानि मासिक धर्म को बताते हैं क्योंकि मंदिर में प्रवेश से 40 दिन पहले हर व्यक्ति को तमाम तरह से खुद को पवित्र रखना होता है और मंदिर बोर्ड के अनुसार पीरियड्स महिलाओं को अपवित्र कर देते हैं.

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