सचिन जयपुर तो लौट गए, लेकिन निकम्मा और नाकारा जैसे शब्दों को कैसे भूलेंगे?

सचिन जयपुर तो लौट गए, लेकिन निकम्मा और नाकारा जैसे शब्दों को कैसे भूलेंगे?
लंबे सियासी ड्रामे के बाद सचिन पायलट वापस जयपुर लौट गए हैं. (फाइल फोटो)

अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने सार्वजनिक तौर पर सचिन पायलट (Sachin Pilot) को निकम्मा और नाकारा (nikamma, nakaara) बताया था. साथ ही गहलोत ने यह भी कहा था कि सचिन पायलट ने राज्य के लिए कुछ भी नहीं किया है. बस वो एक गुड लुकिंग, अंग्रेजी बोलने वाले नेता हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 11, 2020, 7:23 PM IST
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नई दिल्ली. राजस्थान (Rajasthan) में चले लंबे सियासी ड्रामे (Political Crisis) के बाद अब ये लगभग तय हो गया है कि सचिन पायलट (Sachin Pilot) कांग्रेस में बने रहेंगे. अपनी लंबी खामोशी तोड़ते हुए सचिन पायलट ने साफ कर दिया है कि वो अपनी कर्मभूमि राजस्थान को ही बनाए रखेंगे और राज्य में पार्टी पर उनकी पकड़ मजबूत है. लेकिन उनके लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों को भुला पाना आसान नहीं होगा. गौरतलब है कि अशोक गहलोत ने सार्वजनिक तौर पर सचिन पायलट और निकम्मा और नाकारा बताया था. साथ ही गहलोत ने यह भी कहा था कि सचिन पायलट ने राज्य के लिए कुछ भी नहीं किया है. बस वो एक गुड लुकिंग, अंग्रेजी बोलने वाले नेता हैं.

कई साल तक संगठन के लिए की मेहनत
सचिन पायलट को 2013 में राहुल गांधी की तरफ से राजस्थान कांग्रेस का अध्यक्ष बनाकर भेजा गया था. तब पायलट ने अपना बेस जयपुर को ही बना लिया था और राज्य में लगातार पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करते रहे. लेकिन विधानसभा चुनावों में जीत के बाद मुख्यमंत्री का पद अशोक गलहोत को मिला. तब भी इसे लेकर विवाद हुआ. माना जाता है कि ये विवाद ऊपरी रूप से तो शांत हो गया लेकिन भीतरी रूप से बढ़ता रहा.

अशोक गहलोत और सचिन के बीच नहीं बने समीकरण
खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी माना है कि सचिन पायलट के साथ उनकी बातचीत नहीं होती और दोनों के बीच समीकरण सही नहीं रहे हैं. विवाद की स्थिति तब बढ़ती चली गई जब गहलोत सरकार की तरफ से सचिन पायलट और उनके खेमे के विधायकों पर राजद्रोह के केस लगाए गए. सचिन पायलट ने न्यूज 18 से बातचीत करते हुए कहा था- 'हम लंबे समय से कांग्रेस के सदस्य रहे हैं. हमने कुछ मुद्दे उठाए थे. हमने ये मुद्दे हाईकमान के साथ भी उठाए थे. हमें ये करने का अधिकार है. मेरे साथियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गईं. राजस्थान सरकार ने कई ऐसे निर्णय लिए जिनकी जरूरत नहीं थी. हमने साफ कर दिया था कि हम ये मुद्दे हाईकमान के पास उठाएंगे.'



पायलट ने कहा था- 'ये सबसे आसान है कि हम पर बीजेपी से पैसे लेने के आरोप लगा दिए जाएं. दरअसल कुछ लोगों को बातचीत करनी चाहिए थी लेकिन उन्होंने अपना काम नहीं किया.' सचिन पायलट ने गांधी परिवार से बातचीत में अपने सभी मुद्दे रखे हैं. ये सच है कि वो जयपुर वापस लौट गए हैं लेकिन शायद अभी आगे की कहानी बाकी है.

(पल्लवी घोष की स्टोरी से इनपु्ट्स के साथ.)
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