येदियुरप्पा के समर्थन में भगवाधारी साधु, कांग्रेस के लिंगायत नेता खड़े हुए

कर्नाटक में सियासी हलचल से इनकार नहीं किया जा सकता. (फाइल फोटो)

ब्रिटिश काल की जागीर और कर्नाटक मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा (BS Yediyurappa) का आधिकारिक आवास 'कावेरी' , इन दिनों आश्रम या मठ जैसा दिखाई दे रहा है. पिछले हफ्ते चिंतित मुख्यमंत्री के नई दिल्ली से लौटने के बाद भगवाधारी मेहमानों का यहां आना-जाना लगा हुआ है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 78 साल के बीजेपी (BJP) दिग्गज के कार्यकाल के अब सीमित दिन बचे हैं और नई दिल्ली के पार्टी बॉस की मानें तो अब उन्हें नए नेतृत्व के लिए जगह देनी चाहिए.

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    बेंगलुरु . ब्रिटिश काल की जागीर और कर्नाटक मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा (BS Yediyurappa) का आधिकारिक आवास 'कावेरी' , इन दिनों आश्रम या मठ जैसा दिखाई दे रहा है. पिछले हफ्ते चिंतित मुख्यमंत्री के नई दिल्ली से लौटने के बाद भगवाधारी मेहमानों का यहां आना-जाना लगा हुआ है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 78 साल के बीजेपी (BJP) दिग्गज के कार्यकाल के अब सीमित दिन बचे हैं और नई दिल्ली के पार्टी बॉस की मानें तो अब उन्हें नए नेतृत्व के लिए जगह देनी चाहिए. हालांकि उन्होंने इन खबरों को गलत बताया है लेकिन उनकी गतिविधियां कुछ और ही कहानी बयां कर रही है.

    इधर एक अप्रत्याशित घटना में लिंगायत के दो मजबूत कांग्रेसी विधायक – एमबी पाटिल और शामानुर शिवशंकरप्पा - खुले तौर पर येदियुरप्पा के समर्थन में आए हैं और कहा है कि बीजेपी आलाकमान इस तरह एक बड़े कद के नेता का अपमान कर रहा है. उनके इस बयान में राज्य के कांग्रेस नेताओं को नाराज़ कर दिया है. इन दोनों विधायकों ने कहा है कि ये उनकी निजी राय है और पार्टी की नहीं है.

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    इसके चलते राज्य बीजेपी को इन दो नेताओं के खिलाफ एक अभियान शुरू करना पड़ा जिसमें कहा गया कि येदियुरप्पा सुरक्षित हैं. इस बीच कई अन्य लिंगायत साधु और नेता भी सीएम के समर्थन में आ गए हैं और बीजेपी नेतृत्व को चेताया गया है कि किसी तरह के गलत कदम को न उठाएं. बुधवार को करीब कर्नाटक के करीब 50 साधु येदियुरप्पा से मिलने पहुंचे.  राज्य के सबसे ताकतवर मठ में से एक सिद्धगंगा के सिद्धलिंग स्वामी ने कहा है कि बीजेपी नेतृत्व यह कदम न उठाए. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा – यह लिंगायत की लड़ाई नहीं है. येदियुरप्पा तो कर्नाटक के नेता हैं. उन्होंने अच्छा काम किया है. उन्हें क्यों जाना चाहिए. हम चाहेंगे कि वह अप्रैल 2023 तक के चुनाव तक बने रहें.

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    इनके साथ आए कुछ साधुओं ने तो येदियुरप्पा के पक्ष में नारे भी लगाए. इस तरह खुलेआम किया जा रहे समर्थन ने बीजेपी के लिए मामले को उलझा दिया था क्योंकि पार्टी उम्मीद कर रही थी कि येदियुरप्पा से बातचीत के ज़रिए किसी समाधान पर पहुंचा जाए.  येदियुरप्पा का खुलेआम विरोध कर रहे दो बीजेपी विधायकों ने राजनीति में साधुओं के हस्तक्षेप की आलोचना की है. बी आर पाटिल यतनाल, लिंगायत विधायक ने कहा है कि साधु, अपने लाभ के लिए भ्रष्ट सीएम का साथ न दें. विधायक ने इन घटनाओं को सरकार की मिली-भगत बताया.

    इधर बीजेपी विधान परिषद के सदस्य और कांग्रेस – जेडीएस से दल बदलकर इधऱ आए एच विश्वनाथ ने भी साधुओं की निंदा की है. बता दें कि येदियुरप्पा उस लिंगायत समुदाय से आते हैं जो कर्नाटक की आबादी का 16 फीसदी हिस्सा है. इन्हें आर्थिक और राजनीतिक तौर पर ताकतवर समझा जाता है. यह समुदाय पूरे कर्नाटक में फैला हुआ है. येदियुरप्पा ने दो साल पहले एचडी कुमारास्वामी की अगुवाई वाली जेडीएस कांग्रेस गठबंधन सरकार को गिराकर सरकार बनाई जो अब 26 जुलाई को दो साल पूरा करेगी. उनके विरोधियों का मानना है कि इसके बाद उन्हें कुर्सी छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया जाएगा.

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