कबाड़ की दुकान पर मिलीं साहिर लुधियानवी की बेशकीमती नज्में और डायरियां

मुंबई के गैर लाभकारी संगठन (एनजीओ) फिल्म हेरीटेज फाउंडेशन को हाल ही में जुहू में कबाड़ की एक दुकान में साहिर लुधियानवी (Sahir Ludhianvi) की बेशकीमती नज्में और डायरियां मिलीं, जिसे उसने महज 3000 रुपये में खरीद लिया.

भाषा
Updated: September 9, 2019, 9:37 AM IST
कबाड़ की दुकान पर मिलीं साहिर लुधियानवी की बेशकीमती नज्में और डायरियां
साहिर लुधियानवी के ढ़ेर सारे बेशकीमती पत्र, डायरियां, नज्में और उनकी तस्वीरें मुंबई में कबाड़ की एक दुकान से मिले.
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Updated: September 9, 2019, 9:37 AM IST
मुंबई. मशहूर शायर (Famous Poet) और गीतकार साहिर लुधियानवी (Sahir Ludhianvi) के ढेर सारे बेशकीमती हस्तलिखित पत्र, डायरियां, नज्में और उनकी ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें मुंबई में कबाड़ की एक दुकान से मिले. एक गैर लाभकारी संगठन (NGO) ने इन चीजों का संरक्षण करने के लिए इन्हें महज 3,000 रुपये में खरीदा है. मुंबई के गैर लाभकारी संगठन (एनजीओ) फिल्म हेरीटेज फाउंडेशन को हाल ही में जुहू में कबाड़ की एक दुकान में अखबारों और मैगज़ीन की ढेर में ये चीजें मिलीं और अब उसकी योजना उनके संरक्षण और 'अभिलेखों के प्रदर्शन' की है.

संस्था के निदेशक शिवेंद्र सिंह डुंगरपुर ने इस संदर्भ में बताया
संस्था के संस्थापक निदेशक शिवेंद्र सिंह डुंगरपुर ने कहा, 'इन डायरियों में उनके रोजाना के कार्यक्रम जैसे गाने की रिकार्डिंग के लिए वे कहां जाएंगे और अन्य निजी बातें आदि हैं. कई नज्में और नोट भी हैं. इन नोटों का संबंध उनके प्रकाशन संगठन 'पार्चियां' से है.' उन्होंने बताया, "उस दौर के संगीतकार रवि, उनके दोस्त और कवि हरबंस द्वारा उन्हें लिखे गये पत्र भी हैं. कुछ पत्र अंग्रेजी और कुछ ऊर्दू में हैं. बाकी कृतियां ऊर्दू में हैं." उन्होंने कहा कि साहिर की कुछ निजी तस्वीरें, कुछ तस्वीरें उनकी बहनों और दोस्तों के साथ तथा कुछ पंजाब में उनके घर के हैं.

फाउंडेशन ने साहिर से जुड़ी ये सारी चीजें 3,000 रुपये में खरीदी हैं.
फाउंडेशन ने साहिर से जुड़ी ये सारी चीजें 3,000 रुपये में खरीदी हैं.


नज्मों का अध्ययन कर रहे हैं विशेषज्ञ
फाउंडेशन के विशेषज्ञ उन नज्मों का अध्ययन कर रहे हैं और यह पता लगा रहे हैं कि उनमें से कौन प्रकाशित नहीं हुईं. डुंगरपुर ने कहा, 'यह गुरू दत्त की फिल्म 'प्यासा' के दृश्य की याद दिलाता है, जिसमें उनकी नज्में और कृतियां कबाड़ की दुकान पर मिली थी.' उन्होंने कहा कि फाउंडेशन ने साहिर से जुड़ी ये सारी चीजें 3,000 रुपये में खरीदी हैं.

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First published: September 9, 2019, 9:15 AM IST
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