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samajwadi party engaged in balancing rajya sabha elections akhilesh yadav is between loyalty and prestige

राज्यसभा चुनाव के लिए समीकरण साधने में जुटी समाजवादी पार्टी, निष्ठा और प्रतिष्ठा के बीच हैं अखिलेश यादव

सपा प्रमुख अखिलेश यादव. (  फाइल फोटो)

सपा प्रमुख अखिलेश यादव. ( फाइल फोटो)

विधानसभा चुनावों (Assembly Election) के बाद से समाजवादी पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं है. राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Elections), पार्टी के लिए नया सिरदर्द बनता दिख रहा है. अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) निष्ठा और प्रतिष्ठा के बीच फंसे हुए हैं.

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ममता त्रिपाठी 

लखनऊ . विधानसभा चुनावों (Assembly Election)  के बाद से समाजवादी पार्टी (सपा) में सब कुछ ठीक नहीं है. समय समय पर पार्टी विधायकों के नाराजगी के स्वर सुनाई पड़ते रहे हैं. ऐसे में राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Elections), समाजवादी पार्टी के लिए नया सिरदर्द बनता दिख रहा है. अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) निष्ठा और प्रतिष्ठा के बीच फंसे हुए हैं. राज्यसभा चुनावों में सपा के लिए अपने नाराज विधायकों को एकजुट रखना बड़ी चुनौती होगी.

विधानसभा और विधान परिषद के चुनावों के बाद अब समाजवादी पार्टी को राज्यसभा चुनाव के लिटमेस टेस्ट से गुजरना है. यूपी कोटे की राज्यसभा की खाली हुई 11 सीटों पर 10 जून को मतदान होना है जिसको लेकर पार्टी में खींचतान शुरू हो गई है. विधायकों की संख्या के आधार पर भाजपा को सात तो सपा के हिस्से में तीन सीटें तो तय मानी जा रही हैं. 11वीं सीट पर भाजपा की दावेदारी ज्यादा मजबूत है.

जयंत चौधरी को मिल सकती है एक सीट
माना जा रहा है कि अखिलेश यादव एक सीट अपने सहयोगी दल रालोद मुखिया जयंत चौधरी को दे सकते हैं. हालांकि ओम प्रकाश राजभर भी अपने बेटे को राज्यसभा भेजना चाहते हैं. राजभर का तर्क ये है कि 18 सीटों पर मेरे 7 विधायक जीते हैं, स्ट्राइक रेट अच्छा है. अखिलेश की टीम के एक नेता का कहना है कि आजम खान भी अपने किसी करीबी को राज्यसभा में भेजना चाहते हैं. चूंकि विधानसभा चुनावों में भी उनके बेटे के अलावा पार्टी ने उनके किसी करीबी को टिकट नहीं दिया गया था. इसके अलावा अखिलेश यादव प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन को भी राज्यसभा भेज सकते हैं. आपको बता दें कि आलोक रंजन ने विधानसभा चुनाव में काफी अहम भूमिका निभाई थी. समाजवादी पार्टी का घोषणा पत्र आलोक रंजन ने ही तैयार किया था, जिसकी काफी चर्चा रही थी. खासतौर से पुरानी पेंशन स्कीम की.

अबू आजमी और जो एंटनी भी चर्चा में
सपा के अंदर इस बात को लेकर भी चर्चा है कि पार्टी को अन्य राज्यों में विस्तार देने के लिए किसी बाहर के व्यक्ति को भी पार्टी राज्यसभा भेज सकती है जिसमें अबू आसिम आजमी महाराष्ट्र के सपा प्रदेश अध्यक्ष और केरल के जो एंटनी का नाम प्रमुखता से आ रहा है. जो एंटनी केरल के रहने वाले हैं और पार्टी के फाउंडर मेंबरों में से एक हैं. ऐसे में समाजवादी पार्टी दोनों में से किसी एक को राज्यसभा भेज सकती है. पार्टी के कई अन्य नेता भी कतार में हैं कि उनकी निष्ठा का प्रतिफल उन्हें मिलेगा.

विधायकों में विश्वास बनाए रखना एक बड़ी चुनौती
राज्यसभा चुनाव के लिए ‘एक अनार सौ बीमार’ वाली स्थिति से जूझ रही समाजवादी पार्टी को सहयोगी दलों और अपने विधायकों में विश्वास बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गई है. आजम खान और चाचा शिवपाल यादव दोनों ही सपा के सिंबल पर विधायक हैं, मगर दोनों की आपसी नाराजगी जगजाहिर है. ऐसे में अखिलेश को निष्ठा और प्रतिष्ठा दोनों को ही बनाए रखते हुए ये चुनाव जीतने होंगे.

Tags: Akhilesh yadav, Assembly election, Rajya Sabha Elections

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