समझौता ब्लास्ट केसः कोर्ट ने असीमानंद समेत सभी चार आरोपियों को बरी किया

18 फरवरी 2007 को दिल्ली और लाहौर के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में ब्लास्ट हुआ था. ब्लास्ट पानीपत जिले में हुआ था जिसमें 68 लोगों की मौत हो गई थी. मारे गए ज्यादातर लोग पाकिस्तानी नागरिक थे.

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Updated: March 20, 2019, 6:11 PM IST
समझौता ब्लास्ट केसः कोर्ट ने असीमानंद समेत सभी चार आरोपियों को बरी किया
भारत-पाक के बीच चलने वाले समझौता एक्सप्रेस में 2007 में ब्लास्ट हुआ था. (फाइल फोटो)
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Updated: March 20, 2019, 6:11 PM IST
साल 2007 के समझौता ब्लास्ट केस में बड़ा फैसला सुनाते हुए पंचकूला की एनआईए कोर्ट ने स्वामी असीमानंद समेत सभी चार आरोपियों को बरी कर दिया है. इस मामले में असीमानंद के अलावा लोकेश शर्मा, कमल चौहान और रजिंदर चौधरी मुख्य आरोपी थी.

इस मामले पर 14 मार्च को फैसला आना था था, हालांकि पाकिस्तानी महिला वकील ने ईमेल के जरिए याचिका दायर की थी कि उनके पास इस मामले के पर्याप्त सबूत हैं. उनके दावे के बाद मामले की सुनवाई को 20 मार्च तक के लिए टाल दिया गया था. कोर्ट ने बुधवार को महिला की याचिका को सीआरसीपीसी की धारा 311 के तहत खारिज कर दिया.

समझौता एक्सप्रेस विस्फोट एक आतंकवादी घटना थी जिसमें 18 फरवरी, 2007 को भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली ट्रेन समझौता एक्सप्रेस में विस्फोट हुआ था. यह ट्रेन दिल्ली से पाकिस्तान जा रही थी.

विस्फोट हरियाणा के पानीपत जिले में चांदनी बाग़ थाने के अंतर्गत सिवाह गांव के दीवाना स्टेशन के नज़दीक हुआ था. विस्फोट से लगी आग में 68 व्यक्तियों की मौत हो गई थी और 13 अन्य घायल हो गए थे. मारे गए ज़्यादातर लोग पाकिस्तानी नागरिक थे.

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अगस्त 2014 में इस मामले के मुख्य आरोपी स्वामी असीमानंद को ज़मानत मिल गई थी. कोर्ट में जांच एजेंसी एनआईए असीमानंद के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं दे पाई थी. उन्हें सीबीआई ने 2010 में उत्तराखंड के हरिद्वार से गिरफ्तार किया था. उन पर वर्ष 2006 से 2008 के बीच भारत में कई जगहों पर हुए बम धमाकों को अंजाम देने से संबंधित होने का आरोप था. असीमानंद के खिलाफ मुकदमा उनके इकबालिया बयान के आधार पर बना था लेकिन बाद में वह ये कहते हुए अपने बयान से मुकर गए थे कि उन्होंने वह बयान टॉर्चर किए जाने की वजह से दिया था.

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ब्लास्ट के सभी आरोपियों के खिलाफ ये मामला पंचकुला की एनआईए कोर्ट में चल रहा था. इस मामले में कुल 224 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे.

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