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शशि थरूर की अगुवाई वाली संसदीय समिति ने अमित शाह के ट्विटर अकाउंट पर अस्थायी रोक का उठाया मुद्दा

गृहमंत्री अमित शाह (फोटो: Twitter/@AmitShah)
गृहमंत्री अमित शाह (फोटो: Twitter/@AmitShah)

सूचना प्रौद्योगिकी पर एक संसदीय स्थायी समिति की बैठक में गुरुवार को ट्विटर और फेसबुक के प्रतिनिधियों को पिछले साल नवंबर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ट्विटर अकाउंट को अस्थायी रूप से रोकने के मुद्दे पर कई सवालों का सामना करना पड़ा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 22, 2021, 9:22 PM IST
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(पायल मेहता)


नई दिल्ली.
संसद की एक समिति के सदस्यों ने साल 2020 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) के ट्विटर अकाउंट पर कुछ समय के लिए रोक लगाने के साथ माइक्रोब्लॉगिंग साइट द्वारा भारत का गलत नक्शा दिखाने के मुद्दे को गुरुवार को उठाया. सूत्रों ने इस बारे में बताया. सूचना प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति ने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा, सोशल मीडिया का दुरुपयोग रोकने और डिजिटल जगत में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गुरुवार को फेसबुक, ट्विटर और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं.

ट्विटर के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत में कुछ सदस्यों ने पिछले साल शाह के अकाउंट पर कुछ समय के लिए रोक लगाने के मुद्दे को उठाया. बैठक के बाद सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इनमें अधिकतर भाजपा के सदस्य थे.
भाजपा के कुछ सदस्यों ने तथ्यों की निगरानी करने के लिए ट्विटर की प्रणाली पर भी सवाल उठाए और आश्चर्य जताया कि किसी देश के गृह मंत्री के अकाउंट पर कैसे रोक लगा दी गयी. ट्विटर ने उस समय कहा था कि ‘तकनीकी गड़बड़ी’ के कारण शाह के अकाउंट पर कुछ समय के लिए रोक लगी थी और तुरंत इसमें सुधार कर लिया गया. एक सदस्य ने बताया कि कमेटी के सदस्यों ने भारतीय नक्शा का गलत चित्रण करने का भी मुद्दा उठाया.



ट्विटर से महिमा कौल ने दिया जवाब
बता दें कांग्रेस सांसद शशि थरूर के नेतृत्व में पैनल ने फेसबुक के पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर शिवनाथ ठुकराल और पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर, भारत और दक्षिण एशिया, ट्विटर महिमा कौल के साथ ही दोनों प्लेटफार्मों के अन्य अधिकारियों के साथ मुलाकात की.

सूत्रों ने कहा कि बीजेपी सांसदों ने पिछले साल नवंबर में आधे घंटे के लिए शाह के खाते को निलंबित करने के माइक्रोब्लॉगिंग साइट के फैसले पर ट्विटर प्रतिनिधियों से सवाल जवाब किया. सूत्रों के अनुसार इस दौरान ट्विटर ने स्पष्ट किया कि एल्गोरिदम द्वारा कॉपीराइट इशू पाए जाने उनकी नीति के अनुसार कार्रवाई की गई थी. हालांकि, इस मामले में आधे घंटे के भीतर अकाउंट को बहाल कर दिया गया.

फेसबुक के अधिकारियों ने भी लिखित में इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने पर सहमति व्यक्त की. सूत्रों ने कहा कि लिखित स्पष्टीकरण में आईटी मंत्रालय द्वारा भारतीय नागरिकों की डेटा सुरक्षा को लेकर लगभग 15 सवालों के भी जवाब दिए जाएंगे.



Whatsapp Privacy Policy पर भी सवाल
पैनल के सदस्यों ने व्हाट्सएप की व्हाट्सएप पॉलिसी में प्रस्तावित परिवर्तनों के मुद्दे को भी हरी झंडी दिखाई. एक सूत्र ने सीएनएन-न्यूज 18 को बताया कि सोशल मीडिया कंपनी ने स्पष्ट किया कि नीति नई नहीं है और यह साल 2016 से ही लागू थी.

पैनल को व्हाट्सएप ने बताया कि सोशल मैसेजिंग एप का कोई भी मैसेज सर्वर पर तब तक सेव रहते हैं, जब तक कि वे अनडिलिवर ना हों. डिलीवर हो जाने के बाद, वे डिलीट हो जाते हैं.

केंद्र ने प्राइवेसी पॉलिसी अपडेट के खिलाफ भी जोरदार वकालत की है. केंद्र ने कहा है कि व्हाट्सएप की सेवा की शर्तें और प्राइवेसी पॉलिसी में कोई एकतरफा बदलाव भारत के लिए उचित और स्वीकार्य नहीं होगा.

बैठक में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मामले की तरह, अभद्र भाषा के लिए सोशल अकाउंट्स पर रोक लगाने के मुद्दे पर भी चर्चा की गई. जहां कुछ सांसदों ने इस कदम का स्वागत किया, वहीं अन्य लोगों ने इसे एक मनमाना फैसला बताते हुए कहा कि भारत में कुछ अकाउंट्स को इसी तरह के उल्लंघन के बावजूद नहीं रोका गया.

डाटा प्रोटेक्शन बिल
दूसरी ओर पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन बिल के लिए संयुक्त समिति द्वारा 65 से अधिक बैठकों में लगभग एक साल तक गहन चर्चा के बाद यह जल्द ही संसद में पारित होने के लिए तैयार है.

साल 2019 के दिसंबर में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा लोकसभा में पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल, 2019 के तौर में पेश किया गए इस विधेयक को सांसदों के आग्रह पर एक कमेटी को भेजा गया. विधेयक के प्रावधानों का विश्लेषण करने के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति की अध्यक्षता भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने की थी.

बता दें नवंबर 2019 से बिल के हर क्लॉज पर चर्चा कर रही कमेटीअपना कार्यकाल बढ़ाने की मांग नहीं करेगा. फिलहाल समिति अपनी रिपोर्ट पर काम कर रही है. 158 से अधिक संशोधनों वाले बिल को लागू करने के लिए 158 घंटे और 45 मिनट से अधिक की बैठक हुई. (भाषा इनपुट के साथ)
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