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तमिलनाडु: जयललिता की करीबी शशिकला चार साल बाद आज जेल से होंगी रिहा

चार साल बाद शशिकला जेल से बाहर आएंगी.
चार साल बाद शशिकला जेल से बाहर आएंगी.

शशिकला 20 जनवरी को कोरोना संक्रमित पाई गई थीं. शुरुआत में उन्हें बॉरिंग अस्पताल में भर्ती कराया गया. गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें विक्टोरिया अस्पताल के आईसीयू वार्ड में ट्रांसफर किया गया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 27, 2021, 11:26 AM IST
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बेंगलुरु. तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता की करीबी सहयोगी, वीके शशिकला (Sasikala) बुधवार को भ्रष्टाचार के आरोप में अपनी चार साल की जेल की सजा पूरी कर लेंगी. लेकिन 20 जनवरी को कोविड संक्रमित पाये जाने के बाद उन्हें बेंगलुरु के एक अस्पताल में अपना इलाज जारी रखना पड़ सकता है.

जेल अधिकारियों के अनुसार उन्हें आज औपचारिक रूप से रिहा कर दिया जाएगा. जेल के एक अधिकारी ने बताया, 'उनकी रिहाई से संबंधित सभी आवश्यक औपचारिकताएं बुधवार को अस्पताल में ही पूरी हो जाएंगी क्योंकि वह कोविड के कारण क्वारंटीन हैं.' निर्दलीय विधायक टीटीवी दिनाकरन, शशिकला के भतीजे और अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके) के संस्थापक ने सोमवार को कहा था कि अस्पताल से डिस्चार्ज कराने का फैसला डॉक्टरों से सलाह लेने के बाद लिया जाएगा.

शशिकला को फरवरी 2017 में अपनी भाभी जे इलावरासी और जयललिता के पालक पुत्र वीएन सुधाकरन के साथ 66 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति मामले में चार साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी. 63 वर्षीय शशिकला संपत्ति मामले में जेल की सजा काट रही हैं. यह मामला 1991-1996 तक तमिलनाडु की मुख्यमंत्री के रूप में जयललिता के कार्यकाल में 66.65 करोड़ रुपये की संपत्ति से संबंधित है.



4 साल के साधारण कारावास की सजा
सितंबर 2013 में, एक विशेष अदालत ने जयललिता को चार साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई. उन्हें 100 करोड़ रुपये का जुर्माना भरते हुए सीएम पद छोड़ना पड़ा. उनके साथ ही तीन अन्य आरोपियों शशिकला, वीएन सुधाकरन, और इलावरासी को भी दोषी ठहराया गया था. सभी पर 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था.

जयललिता ने कर्नाटक हाईकोर्ट में सजा को चुनौती दी, जिसने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया लेकिन साल 2017 में, सुप्रीम कोर्ट ने इन चारों को दोषी ठहराते हुए विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखा. 5 दिसंबर 2016 को उनकी मृत्यु के चलते जयललिता के खिलाफ आरोप समाप्त कर दिए गए थे.

जयललिता की मृत्यु के तुरंत बाद, शशिकला ने दिसंबर 2016 में AIADMK की बागडोर संभाली, लेकिन बाद में मुख्यमंत्री ईके पलानीस्वामी के नेतृत्व वाले खेमे ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया. वह नवंबर 2019 के अंत में फिर से सुर्खियों में आ गई, जब आयकर विभाग ने कथित तौर पर बेनामी लेनदेन के आरोप में उनकी 1,600 करोड़ रुपये की कथित संपत्ति कुर्क की. आरोप है कि चेन्नई, पुडुचेरी और कोयम्बटूर में स्थित नौ संपत्तियों को नवंबर 2016 में नोटबंदी के तुरंत बाद खरीदा गया था.
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