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AIADMK से निष्कासित शशिकला हुईं जेल से रिहा, फिलहाल अस्पताल में जारी रहेगा कोरोना संक्रमण का इलाज

शशिकला जेल से रिहा
शशिकला जेल से रिहा

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की करीबी और एआईएडीएमके से निष्कासित नेता वीके शशिकला (VK Sasikala) संपत्ति से जुड़े एक मामले में चार साल की कैद की सजा पूरी करने पर आज रिहा कर दी गईं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 27, 2021, 12:19 PM IST
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बेंगलुरु. ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) की निष्कासित नेता वीके शशिकला (VK Sasikala) संपत्ति से जुड़े एक मामले में चार साल की कैद की सजा पूरी करने पर आज रिहा कर दी गईं. यह जानकारी जेल के अधिकारियों ने दी. हालांकि कोरोना वायरस से संक्रमित शशिकला का कोविड-19 के इलाज के लिए अस्पताल में ही भर्ती रहेंगी. शशिकला के 20 जनवरी को संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी और फिलहाल वह विक्टोरिया अस्पताल के कोविड-19 केन्द्र में भर्ती हैं. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें अस्पताल से कब छुट्टी मिलेगी.

बैंगलोर मेडिकल कॉलेज ने एक बयान में कहा कि शशिकला को आज सुबह 11 बजे आधिकारिक रूप से रिहा कर दिया गया है. उन्हें 21 जनवरी को विक्टोरिया अस्पताल में ट्रांसफर किया गया और प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें 10वें दिन छुट्टी दे दी जाएगी. बीते तीन दिनों से वह ऑक्सीजन सपोर्ट पर नहीं हैं.

सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गईं- वकील
शशिकला के वकील राजा सैंथूर पंडियन ने कहा कि सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं. वह सभी कानूनी औपचारिकताओं से मुक्त है. वह मेडिकल एडवाइज के अनुसार अस्पताल में रहेगी.
बता दें कि सितंबर 2013 में एक विशेष अदालत ने जयललिता को चार साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई थी. उन्हें 100 करोड़ रुपये का जुर्माना भरते हुए सीएम पद छोड़ना पड़ा. उनके साथ ही तीन अन्य आरोपियों शशिकला, वीएन सुधाकरन और इलावरसी को भी दोषी ठहराया गया था. सभी पर 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था.



दिसंबर 2016 में AIADMK की बागडोर संभाली
जयललिता ने कर्नाटक हाईकोर्ट में सजा को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया गया, लेकिन साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने इन चारों को दोषी ठहराते हुए विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखा. 5 दिसंबर 2016 को उनकी मृत्यु के चलते जयललिता के खिलाफ आरोप समाप्त कर दिए गए थे.

जयललिता की मृत्यु के तुरंत बाद शशिकला ने दिसंबर 2016 में AIADMK की बागडोर संभाली, लेकिन बाद में मुख्यमंत्री ईके पलानीस्वामी के नेतृत्व वाले खेमे ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया. वह नवंबर 2019 के अंत में फिर से सुर्खियों में आ गई, जब आयकर विभाग ने कथित तौर पर बेनामी लेनदेन के आरोप में उनकी 1,600 करोड़ रुपये की कथित संपत्ति कुर्क की. आरोप है कि चेन्नई, पुडुचेरी और कोयम्बटूर में स्थित नौ संपत्तियों को नवंबर 2016 में नोटबंदी के तुरंत बाद खरीदा गया था.
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