कोई भी कानून सरकार को राफेल के 'सीक्रेट पेपर' छापने से नहीं रोक सकता: सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने केंद्र सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए रक्षा मंत्रालय से लीक हुए दस्तावेजों की वैधता को मंजूरी दे दी है.

Utkarsh Anand | News18Hindi
Updated: April 10, 2019, 5:52 PM IST
कोई भी कानून सरकार को राफेल के 'सीक्रेट पेपर' छापने से नहीं रोक सकता: सुप्रीम कोर्ट
सांकेतिक तस्वीर
Utkarsh Anand | News18Hindi
Updated: April 10, 2019, 5:52 PM IST
सुप्रीम कोर्ट राफेल मामले पर दोबारा सुनवाई के लिए तैयार हो गया है. कोर्ट ने केंद्र सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए रक्षा मंत्रालय से लीक हुए दस्तावेजों की वैधता को मंजूरी दे दी है. इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रेस की आजादी का मुद्दा भी उठाया. कोर्ट के मुताबिक कोई भी कानून सरकार को राफेल के 'सीक्रेट पेपर' छापने से नहीं रोक सकता है.
बता दें कि पिछले दिनों अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' ने राफेल को लेकर कई खबरें छापी थी. इन खबरों में राफेल डील से जुड़े दस्तावेजों का जिक्र किया गया था. सरकार ने इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए दलील दी थी कि जिन दस्तावेजों के आधार पर ये खबरें छापी जा रही है वो सारे 'सीक्रेट पेपर' हैं. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई में तीन जजों की बेंच ने सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया और कहा कि कोई भी कानून सरकार को राफेल के 'सीक्रेट पेपर' छापने से नहीं रोक सकता है.

कोर्ट में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि जिन सीक्रेट पेपर्स के आधार पर रिपोर्ट छापी जा रही है वो सारे गैरकानूनी तरीके से लिए गए थे, ऐसे में इस दस्तावेज के आधार पर राफेल मामले पर दोबारा सुनवाई नहीं हो सकती. लेकिन उनकी इस दलील को बेंच ने ये कहते हुए खारिज कर दिया कि अगर ऐसा हुआ तो अभिव्यक्त की स्वतंत्रता पर ये रोक होगी.
तीन जजों की बेंच ने माना कि सरकारी गोपनीयता अधिनियम में भी इस बात का कोई जिक्र नहीं कि किसी 'सीक्रेट पेपर' को गैरकानूनी माना जाए. जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा कि प्रेस की आजादी ने देश के लोकतंत्र को खासा मजबूत किया है.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए जांच की मांग ठुकरा दी थी. लेकिन उसके बाद याचिकाकर्ताओं ने कुछ नए दस्तावेज़ कोर्ट को सौंपे हैं और कहा है कि इसके आधार पर कोर्ट राफेल डील की जांच कराए. जांच की मांग संबंधी याचिका पूर्व बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने दायर की है. वकील प्रशांत भूषण भी इसमें याचिकाकर्ता हैं.

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First published: April 10, 2019, 5:25 PM IST
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