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    OTT प्लेटफार्म्स नियंत्रित करने के लिए याचिका पर SC का केन्द्र को नोटिस

    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिया नोटिस. (फाइल फोटो)
    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिया नोटिस. (फाइल फोटो)

    प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे (S.A. Bobde), न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना (A. S. Bopanna) और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन (V. Ramasubramanian) की पीठ ने याचिका पर केन्द्र सरकार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और इंटरनेट तथा मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किये.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 15, 2020, 7:33 PM IST
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    नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने नेटफ्लिक्स (Netflix) और एमेजॉन प्राइम (Amazon Prime) जैसे ओटीटी प्लेटफार्म्स को नियंत्रित करने के लिये दायर जनहित याचिका पर बृहस्पतिवार को केन्द्र को नोटिस जारी किया. इस याचिका में इन प्लेटफार्म को नियंत्रित करने के लिये एक स्वायत्त संस्था का अनुरोध किया गया है. प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने याचिका पर केन्द्र सरकार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और इंटरनेट तथा मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किये.

    ओटीटी-स्ट्रीमिंग और डिजिटल मीडिया प्लेटफार्म्स की सामग्री पर निगरानी
    नेटफिलिक्स और एमेजॉन प्राइम जैसे ओटीटी प्लेटफार्म्स को नियंत्रित करने के लिये अधिवक्ता शशांक शेखर झा और अपूर्व अर्हटिया ने जनहित याचिका दायर की है. याचिका में विभिन्न ओटीटी-स्ट्रीमिंग और डिजिटल मीडिया प्लेटफार्म्स की सामग्री की निगरानी और प्रबंधन के लिये सुव्यवस्थित बोर्ड या एसोसिएशन की आवश्यकता पर जोर दिया गया है.


    सिनेमाघर जल्दी नहीं खुलेंगे, इसलिए इन प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी


    याचिका में कहा गया है कि कोविड-19 की वजह से अभी देश में सिनेमाघर जल्दी खुलने की उम्मीद नहीं है और ओटीटी-स्ट्रीमिंग और विभिन्न डिजिटल मीडिया प्लेटफार्म्स ने फिल्म निर्माताओं और कलाकारों को किसी प्रकार की मंजूरी के बगैर ही इसे प्रदर्शित करने का रास्ता दे दिया है.

    याचिका के अनुसार, इस समय डिजिटल सामग्री की निगरानी या प्रबंधन के लिये कोई कानून या स्वायत्त संस्था नहीं है और यह बगैर किसी जांच परख के जनता के लिये उपलब्ध है.

    ओटीटी-स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म को नियंत्रित करने के लिये कोई कानून नही होने की वजह से हर दिन इसी आधार पर कोई न कोई मामला दायर हो रहा है. कानून में इस तरह की खामियों की वजह से सरकार को रोजाना जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है लेकिन इसके बावजूद संबंधित प्राधिकारियों ने इसे नियंत्रित करने के लिये कुछ खास नहीं किया है.
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