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SC ने मुख्तार अंसारी के बेटों को गिरफ्तारी से मिली राहत के खिलाफ UP सरकार की अर्जी खारिज की

न्यायमूर्ति अशोक भूषण एवं न्यायमूर्ति आर एस रेड्डी की पीठ ने कहा कि वह उच्च न्यायालय के 21 अक्टूबर के आदेश के विरूद्ध राज्य सरकार की ओर दायर की गयी याचिका पर विचार करने के पक्ष में नहीं है (File Photo)

न्यायमूर्ति अशोक भूषण एवं न्यायमूर्ति आर एस रेड्डी की पीठ ने कहा कि वह उच्च न्यायालय के 21 अक्टूबर के आदेश के विरूद्ध राज्य सरकार की ओर दायर की गयी याचिका पर विचार करने के पक्ष में नहीं है (File Photo)

उत्तर प्रदेश के मऊ से विधायक मुख्तार अंसारी कथित जबरन वसूली मामले में पंजाब के रूपनगर जिला जेल में बंद हैं. उत्तर प्रदेश में उनके विरूद्ध कई मामले लंबित हैं.

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नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) के दो बेटों अब्बास और उमर अंसारी को कथित जालसाजी के एक मामले में गिरफ्तारी से इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) से मिली राहत के विरूद्ध उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर की गयी अर्जी बुधवार को खारिज कर दी. न्यायमूर्ति अशोक भूषण एवं न्यायमूर्ति आर एस रेड्डी की पीठ ने कहा कि वह उच्च न्यायालय के 21 अक्टूबर के आदेश के विरूद्ध राज्य सरकार की ओर दायर की गयी याचिका पर विचार करने के पक्ष में नहीं है.

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘यह विशेष अनुमति याचिका उच्च न्यायालय के 21 अक्टूबर, 2020 के अंतरिम आदेश के विरूद्ध दायर की गयी है. उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था कि सूचीबद्ध करने की अगली तारीख तक याचिकाकर्ताओं को 27 अगस्त 2020 को दर्ज की गयी प्राथमिकी के सिलसिले में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा.’’

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पंजाब के रूपनगर जिला जेल में बंद है अंसारी
पीठ ने कहा, ‘‘हमें यह भी बताया गया है कि रिट याचिका जिसमें संबंधित आदेश जारी किया गया है, कल उच्च न्यायालय के सामने सूचीबद्ध है. ऐसी स्थिति में हम विशेष अनुमति याचिका पर विचार करने के पक्ष में नहीं हैं. इसलिए विशेष अनुमति याचिका खारिज की जाती है. हम स्पष्ट करते हैं कि हमने इस मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं व्यक्त की है.’’

उत्तर प्रदेश के मऊ से विधायक मुख्तार अंसारी कथित जबरन वसूली मामले में पंजाब के रूपनगर जिला जेल में बंद हैं. उत्तर प्रदेश में उनके विरूद्ध कई मामले लंबित हैं.

उत्तर प्रदेश सरकार ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि अपराधी से नेता बना मुख्तार अंसारी न्यायिक व्यवस्था को ‘‘चकमा’’ दे रहा है और पंजाब में रूपनगर जिला जेल से कथित तौर पर अवैध गतिविधियां चला रहा है.

उत्तर प्रदेश ने शीर्ष अदालत में आरोप लगाया कि अंसारी और पंजाब पुलिस के बीच ‘‘मिलीभगत’’ है. वहीं, पंजाब सरकार ने इन दावों को खारिज किया और योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दाखिल याचिका के औचित्य पर सवाल उठाया.

न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति आर एस रेड्डी की पीठ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दाखिल एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें पंजाब सरकार और रूपनगर जेल प्रशासन को मऊ के विधायक अंसारी को तुरंत जिला जेल बांदा के हवाले करने का अनुरोध किया गया है.



(Disclaimer: यह खबर सीधे सिंडीकेट फीड से पब्लिश हुई है. इसे News18Hindi टीम ने संपादित नहीं किया है.)
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