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पत्नी को 60 लाख और 2 फ्लैट देने के बाद भी नहीं रद्द हुई FIR, पति को SC से मिली राहत


Updated: June 12, 2018, 6:55 PM IST
पत्नी को 60 लाख और 2 फ्लैट देने के बाद भी नहीं रद्द हुई FIR, पति को SC से मिली राहत
सुप्रीम कोर्ट (File photo)

मामले में शीर्ष अदालत ने कहा कि दिल्ली में रजिस्टर एफआईआर रद्द करने के लिए एमओयू में दो फ्लैट और 60 लाख रुपए का भुगतान ही एकमात्र शर्त रखी गई थी

  • Last Updated: June 12, 2018, 6:55 PM IST
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एफआईआर रद्द करने के लिए मोहन ने अपनी पत्नी को 60 लाख रुपए और 2 फ्लैट की चाबियां सौंप दी. लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने भुगतान के बावजूद एफआईआर रद्द करने से मना कर दिया. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट से मोहन को राहत मिली.

मामले पर हाई कोर्ट ने कहा कि चूंकि मोहन आपसी सहमति से तलाक देने पर सहमत नहीं हैं, इसलिए एफआईआर रद्द नहीं की जी सकती.

लगभग तीन साल के बाद सुप्रीम कोर्ट मोहन के बचाव के लिए आगे आया है, जब पैसे और फ्लैट की चाबियां देने के बावजूद मोहन को चोरी और कई अपराधिक मामलों का सामना करना पड़ा, लेकिन उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द नहीं हुई.

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाल ही में मोहन के खिलाफ एफआईआर को रद्द कर दिया क्योंकि एमओयू के बाद तलाक देने की आवश्यकता नहीं थी.



मामले में शीर्ष अदालत ने कहा कि दिल्ली में रजिस्टर एफआईआर रद्द करने के लिए एमओयू में दो फ्लैट और 60 लाख रुपए का भुगतान ही एकमात्र शर्त रखी गई थी. दो फ्लैट के साथ  60 लाख रुपए का भुगतान एमओयू में दिल्ली में रजिस्टर एफआईआर को रद्द करने के लिए निर्धारित शर्तों थी.

इन परिस्थितियों में, एमओयू की शर्तों का पालन अपीलकर्ता द्वारा किया गया जबकि तलाक इसका हिस्सा था. शीर्ष अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट ने अपीलकर्ता के खिलाफ अपमानित आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इनकार करने में गलती की है.

जिसके बाद 2014 में मोहन के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया गया और तलाक के मामले पर उचित कार्यवाही तय की गई.

(उत्कर्ष आनंद)

 

 

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First published: June 12, 2018, 5:32 PM IST
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