लाइव टीवी

नौकरी में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद खडगे ने सरकार को घेरा

News18Hindi
Updated: February 9, 2020, 8:13 PM IST
नौकरी में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद खडगे ने सरकार को घेरा
कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने कहा हम इसके खिलाफ संसद के भीतर और बाहर प्रदर्शन करेंगे.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने रविवार को कहा कि राज्य सरकारें नियुक्तियों में आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है तथा पदोन्नति में आरक्षण का दावा करने का कोई मूल अधिकार (Fundamental Right) नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 9, 2020, 8:13 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खडगे (Mallikarjun Kharge) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की उस टिप्‍पणी का हवाला देकर सरकार पर निशाना साधा जिसमें कहा गया था कि नौकरी और पदों में आरक्षण मूल अधिकार नहीं है. उन्‍होंने कहा कि इसने हाशिए पर रहने वाले समुदाय को चिंता में डाल दिया है. हम इसके खिलाफ संसद के भीतर और बाहर प्रदर्शन करेंगे. बीजेपी और आरएसएस काफी लंबे समय से आरक्षण को हटाने की कोशिश कर रही हैं.

बता दें सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को कहा है कि राज्य सरकारें नियुक्तियों में आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है तथा पदोन्नति में आरक्षण का दावा करने का कोई मूल अधिकार नहीं है.



कोर्ट राज्यों को जारी नहीं कर सकता नोटिसन्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने कहा, "इस न्यायालय द्वारा निर्धारित कानून के मद्देनजर इसमें कोई शक नहीं है कि राज्य सरकारें आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है. ऐसा कोई मूल अधिकार नहीं है जिसके तहत कोई व्यक्ति पदोन्नति में आरक्षण का दावा करे." पीठ ने अपने फैसले में कहा, "न्यायालय राज्य सरकार को आरक्षण उपलब्ध कराने का निर्देश देने के लिए कोई परमादेश नहीं जारी कर सकता है."

उत्तराखंड सरकार के पांच सितम्बर 2012 के फैसले को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शीर्ष न्यायालय ने यह टिप्पणी की.

उत्तराखंड सरकार ने किया था ये फैसला
गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार ने राज्य में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को आरक्षण उपलब्ध कराये बगैर सार्वजनिक सेवाओं में सभी पदों को भरे जाने का फैसला लिया गया था. सरकार के फैसले को उत्तराखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसने इसे खारिज कर दिया था.

हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपीलों पर सुनवाई करते हुए शीर्ष न्यायालय ने कहा, "यह निर्धारित कानून है कि राज्य सरकार को सार्वजनिक पदों पर नियुक्तियों के लिए आरक्षण उपलब्ध कराने के निर्देश नहीं दिये जा सकते है. इसी तरह सरकार पदोन्नति के मामलों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है."

पीठ ने कहा- दिखाने होंगे आंकड़े
पीठ ने कहा, "हालांकि अगर वे (राज्य) अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते है और पदोन्नति में आरक्षण देने का प्रावधान करते हैं तो सबसे पहले उसे इस तरह के आंकड़े इकट्ठा करने होंगे, जिससे यह स्पष्ट होता हो कि सार्वजनिक पदों पर किसी विशेष वर्ग का प्रतिनिधित्व कम है."

उत्तराखंड सरकार की सितम्बर 2012 की अधिसूचना को बरकरार रखते हुए शीर्ष न्यायालय ने कहा कि सरकार पदोन्नतियों में आरक्षण उपलब्ध कराने के लिए बाध्य नहीं है, इसलिए उच्च न्यायालय को राज्य के फैसले को अवैध नहीं घोषित करना चाहिए था.

आरक्षण के बारे में संवैधानिक प्रावधान का जिक्र करते हुए पीठ ने कहा, ‘‘यह राज्य सरकार को तय करना है कि सरकारी पदों पर नियुक्ति और पदोन्नति के मामले में आरक्षण की आवश्यकता है या नहीं.’’

(भाषा के इनपुट के साथ)

ये भी पढ़ें-
केजरीवाल ने पूछा- वोटिंग का फाइनल आंकड़ा जारी क्यों नहीं किया, EC ने दिया जवाब

आधार से नहीं कराया लिंक तो बेकार हो जाएगा आपका पैन

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 9, 2020, 7:18 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर