कर्नाटक: मजदूरों के क्षतिग्रस्त घर बनाने के HC के निर्देश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

शीर्ष अदालत में जस्टिस एसके कौल, दिनेश माहेश्वरी और ऋषिकेश रॉय की एक बेंच ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया है. (File Photo)

शीर्ष अदालत में जस्टिस एसके कौल, दिनेश माहेश्वरी और ऋषिकेश रॉय की एक बेंच ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया है. (File Photo)

Karnataka HC: 4 दिसंबर को जारी इन निर्देशों के अनुसार, उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि चिन्हित प्रभावित परिवारों की संरचनाओं / झोपड़ियों को उसकी लागत पर फिर से संगठित किया जाए और दोबारा बनवाई जा रही ये झोपड़ियां समान स्वरूप और आकार की हों.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 5, 2021, 12:10 AM IST
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बेंगलुरु. उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने गुरुवार को कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) द्वारा पारित उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें उसने राज्य सरकार को बेंगलुरु (Bengaluru) में प्रवासी मजदूरों की झोपड़ पट्टियों को अपने खर्चे पर फिर से बनवाने का आदेश दिया था. पूर्वी बंगलुरु के कचकरनहल्ली स्लम के पास बनी इन झोपड़ियों को लॉकडाउन (Lockdown) की घोषणा होने पर प्रवासी मजदूरों (Migrant Labours) के अपने घर लौट जाने के बाद कुछ अज्ञात लोगों ने आग के हवाले कर दिया था. शीर्ष अदालत में जस्टिस एसके कौल, दिनेश माहेश्वरी और ऋषिकेश रॉय की एक बेंच ने कर्नाटक राज्य द्वारा दायर विशेष अवकाश याचिका पर नोटिस जारी करते हुए कहा कि- "इस बीच, अनुच्छेद 26 (ii), (iii) और (v) पर लगाए गए आदेश में निहित दिशाओं को रोक दिया गया है."

4 दिसंबर को जारी इन निर्देशों के अनुसार, उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि चिन्हित प्रभावित परिवारों की संरचनाओं / झोपड़ियों को उसकी लागत पर फिर से संगठित किया जाए और दोबारा बनवाई जा रही ये झोपड़ियां समान स्वरूप और आकार की हों. संरचनाओं के पुनर्निर्माण का काम अधिकतम दो महीनों के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया गया था. इसके अलावा, यह निर्देशित किया गया था कि जहां तक ​​संभव हो, फिर से बनाई जा रही ये संरचनाएं उसी स्थान पर बनाई जाएंगी जहां ये जलने से पहले बनी हुई थीं. निर्माण पूरा होने के तुरंत बाद, संबंधित घरों को राज्य सरकार द्वारा प्रभावित परिवारों को आवंटित किए जाने के भी आदेश दिए गए थे.

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चूंकि उच्च न्यायालय द्वारा पंजीकृत एक सूओ-मोटो जनहित याचिका पर निर्देश जारी किए गए थे, इसलिए कर्नाटक राज्य द्वारा दायर विशेष अवकाश याचिका में कर्नाटक उच्च न्यायालय पहली प्रतिवादी है.
कर्नाटक सरकार ने दिया था ये तर्क

विशेष अवकाश याचिका में कर्नाटक सरकार ने तर्क दिया कि विचाराधीन भूमि निर्विवाद रूप से एक सरकारी भूमि थी, जिसके संबंध में झुग्गी खाली करने के लिए अधिसूचना पहले ही जारी की जा चुकी थी. यह आगे प्रस्तुत किया गया था कि कचकरनहल्ली झुग्गी निवासियों के पुनर्वास के लिए 4 एकड़ के एक वैकल्पिक भूखंड की पहचान की गई थी.

एसएलपी में कहा गया कि इन तथ्यों के बावजूद, उच्च न्यायालय ने सरकार की कीमत पर उसी भूमि पर झोपड़ियों के निर्माण का आदेश दिया.





हाईकोर्ट ने झोपड़ियों के जलने के संबंध में एक पत्र याचिका के आधार पर मुकदमे पर स्वतः संज्ञान लिया था.
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