अपना शहर चुनें

States

5 लाख रजिस्ट्रेशन और UGC का समर्थन... फिर क्यों स्थगित हुई गौ विज्ञान परीक्षा

राष्ट्रीय कामधेनु आयोग (RKA) ने रविवार को परीक्षा स्थगित करने का फैसला लिया. फाइल फोटो
राष्ट्रीय कामधेनु आयोग (RKA) ने रविवार को परीक्षा स्थगित करने का फैसला लिया. फाइल फोटो

Rashtriya Kamdhenu Aayog: परीक्षा के आयोजन के लिए यूजीसी की कई वैज्ञानिकों और विद्वानों ने अंधविश्वास और मिथ को विज्ञान के नाम पर बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कड़ी आलोचना की थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 22, 2021, 4:24 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) समर्थित गौ विज्ञान (Cow Science) परीक्षा स्थगित कर दी गई है. खबरों के मुताबिक इस परीक्षा के लिए 5 लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन राष्ट्रीय कामधेनु आयोग (RKA) ने रविवार को परीक्षा स्थगित करने का फैसला लिया. इस परीक्षा का आयोजन गुरुवार को होने वाला था. गौ विज्ञान (काउ साइंस) परीक्षा को स्थगित करने का फैसला मॉक टेस्ट के आयोजन से चंद घंटे पहले लिया गया. इस परीक्षा के आयोजन के लिए यूजीसी की कई वैज्ञानिकों और विद्वानों ने अंधविश्वास और मिथ को विज्ञान के नाम पर बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कड़ी आलोचना की थी.

क्या है गौ विज्ञान परीक्षा?
इस परीक्षा के लिए राष्ट्रीय कामधेनु आयोग ने गौ विज्ञान कोर्स डिजाइन किया था. आयोग की स्थापना केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय के तहत 2019 में हुई थी और इसका मकसद गौ कल्याण और शोध को बढ़ावा देना था. कामधेनु आयोग के चेयरमैन वल्लभभाई कथिरिया ने 5 जनवरी को परीक्षा का ऐलान किया था और इसके लिए 15 जनवरी से रजिस्ट्रेशन शुरू हुआ था. एक घंटे की ऑनलाइन परीक्षा के लिए 13 भाषाओं में आयोजन होना था, जिसका लक्ष्य 51 मूल गौ नस्ल और पशुपालन के नियमों के बारे में लोगों के बीच दिलचस्पी और जागरूकता जगानी थी.

राष्ट्रीय कामधेनु आयोग ने परीक्षा के लिए स्टडी मैटेरियल उपलब्ध कराया था और इसे अपनी वेबसाइट पर भी डाला. परीक्षा की घोषणा के बाद यूजीसी ने 900 कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को पत्र लिखकर छात्रों के बीच गौ विज्ञान परीक्षा को बढ़ावा देने की बात कही थी. रविवार को एनडीटीवी ने परीक्षा के बारे में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इसके लिए 5 लाख लोगों ने राष्ट्रीय स्तर पर रजिस्ट्रेशन कराया है.
विज्ञान या अंधविश्वास


मूल गौ नस्ल संबंधित जानकारियों पर आधारित गौ विज्ञान परीक्षा के लिए राष्ट्रीय कामधेनु आयोग की कई लोगों ने तारीफ की तो बहुत सारे लोगों ने आयोग की आलोचना भी की. केंद्र सरकार की इकाई के तौर पर अंधविश्वास को बढ़ावा देने के लिए लोगों ने यूजीसी पर भी निशाना साधा. गौ परीक्षा के लिए जारी किए स्टडी मैटेरियल में राष्ट्रीय कामधेनु आयोग ने कहा था कि जिन लोगों ने अपनी दीवारों पर गाय के गोबर के उपले थाप रखे थे, उन पर भोपाल गैस त्रासदी का कोई असर नहीं हुआ. साथ ही भौगोलिक जगहों का जिक्र करते हुए कहा गया था कि जहां गौ वंश को काटा जाता है, वे इलाके भूकंप के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं.

विरोध के सुर
गौ विज्ञान परीक्षा के आयोजन को लेकर पश्चिम बंगाल की जादवपुर यूनिवर्सिटी और केरल शास्त्र साहित्य परिषद ने विज्ञान के नाम पर अंधविश्वास को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए परीक्षा के आयोजन पर सवाल उठाए थे. जादवपुर यूनिवर्सिटी ने साफ तौर पर परीक्षा का आयोजन कराने से मना कर दिया था. यूनिवर्सिटी ने अपने फेसबुक पेज पर इस बारे में लिखा, "यद्यपि इस परीक्षा में 5 लाख छात्र बैठ रहे हैं, जादवपुर यूनिवर्सिटी की अपील है कि इस परीक्षा के आयोजन के बारे में पुनर्विचार करें, जिसके जरिए हमारे देश के एजुकेशन सिस्टम को एक अवैज्ञानिक दिशा मिलेगी." केरल शास्त्र साहित्य परिषद ने आरोप लगाया था कि परीक्षा के जरिए अंधविश्वास को बढ़ाया दिया जा रहा है और शिक्षा व्यवस्था का भगवाकरण हो रहा है. परिषद ने परीक्षा को रद्द करने की मांग की थी.

अब कब होगी परीक्षा
गौ विज्ञान परीक्षा का आयोजन 25 फरवरी को होना था, लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया ने सोमवार को रिपोर्ट किया कि कामधेनु आयोग ने परीक्षा स्थगित कर दी है. हालांकि आयोग के प्रवक्ता का कहना था कि परीक्षा का आयोजन प्रशासनिक वजहों से स्थगित हुआ है और इसका आलोचनाओं से कोई लेना-देना नहीं है.

चेयरमैन वल्लाभाई कथिरिया ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा कि बड़ी संख्या में छात्रों की दिलचस्पी को देखते हुए जल्द ही परीक्षा की नई तारीख का ऐलान किया जाएगा.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज