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वैज्ञानिक गौहर रजा बोले- DRDO या ISRO को करनी चाहिए थी 'मिशन शक्ति' की घोषणा

रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी एंटी-सैटेलाइट मिसाइल की तस्वीर

रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी एंटी-सैटेलाइट मिसाइल की तस्वीर

गौहर रजा ने कहा, 'ये हमारे वैज्ञानिकों की 70 साल की मेहनत है. आप अंतरिक्ष में एक स्माल मूविंग पार्टिकल को मार गिराते हैं ये बहुत बड़ा काम है.'

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार दोपहर को एंटी सैटेलाइन मिसाइल के सफल परीक्षण की घोषणा की. उन्‍होंने कहा कि डीआरडीओ और इसरो द्वारा बनाई गई एंटी सैटेलाइट मिसाइल ने लॉन्‍च होने के 3 मिनट के अंदर अंतरिक्ष में 300 किमी दूर LEO (Low Earth Orbit) में एक लाइव सैटेलाइट को मार गिराया है. इसको लेकर वैज्ञानिक गौहर रजा ने प्रधानमंत्री पर हमला बोला है.

    गौहर रजा ने कहा, 'ये हमारे वैज्ञानिकों की 70 साल की मेहनत है. आप अंतरिक्ष में एक स्माल मूविंग पार्टिकल को मार गिराते हैं ये बहुत बड़ा काम है. लेकिन, इसका श्रेय प्रधानमंत्री को नहीं लेना चाहिए था.
    ये घोषणा डीआरडीओ और इसरो को करनी चाहिए थी.'

    गौहर रजा ने कहा, 'ये तकनीकी 3-4 साल पहले से हमारे पास थी, लेकिन राजनीतिक फायदे के लिए प्रधानमंत्री ने खुद चुनाव से पहले इसका ऐलान किया. ये परंपरा नहीं है. हमारे वैज्ञानिकों को सम्‍मान दिया जाना चाहिए था.' एक सवाल के जवाब में उन्‍होंने कहा कि ये बहुत बड़ी उपलब्धि है. इससे हमारे वैज्ञानिकों का आत्‍मविश्‍वास बढ़ेगा और रक्षा एवं तकनीकी के कामों में मदद मिलेगी.

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार दोपहर को राष्ट्र के नाम संबोधन में इस उपलब्धि की घोषणा की. पीएम मोदी ने कहा, 'भारत ने आज अपना नाम स्पेस पॉवर के रूप में दर्ज करा दिया है. अब तक केवल तीन देश अमेरिका, रूस और चीन को यह तमगा हासिल था. हर हिन्दुस्तानी के लिए इससे बड़ी उपलब्धि नहीं हो सकती है. कुछ ही समय पूर्व हमारे वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में लाइव सैटेलाइट को मार गिराया.'

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    पीएम मोदी ने कहा कि 'मिशन शक्ति' ने देश को नई ताकत दी है और तेजी से विकास कर रहे भारत को अंतरिक्ष में सुरक्षित करने का प्रयास किया है. डीआरडीओ के चेयरमैन जी सतीश रेड्‌डी ने बताया कि इस मिशन में जिस सैटेलाइट को नष्ट किया गया है वह भारत का अपना ही सैटेलाइट था. एंटी सैटेलाइट मिसाइल का परीक्षण देश के विकास और बढ़ती क्षमता का प्रतिबिंब है. यह भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है. इससे देश अंतरिक्ष शक्तियों के चुनिंदा समूह में शामिल हो गया है. इस परियोजना को लगभग दो साल पहले मंजूरी दी गई थी.

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