26 साल पुराने ISRO जासूसी केस में गलत तरीके से फंसे पूर्व वैज्ञानिक को मिला 1.30 करोड़ मुआवजा

नंबी नारायणन को मिला मुआवजा.

1994 में जासूसी के झूठे मामले में आरोप लगाया गया था कि नंबी नारायणन (Nambi Narayanan) भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से संबंधित कुछ बेहद गोपनीय दस्तावेज अन्‍य देशों को हस्तांतरित करने में शामिल हैं.

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    तिरुवनंतपुरम. केरल सरकार (Kerala Government) ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन (Nambi Narayanan) को मंगलवार को 1.30 करोड़ रुपये का अतिरिक्‍त मुआवजा सौंपा है. नंबी नारायणन को 26 साल पहले 1994 में जासूसी के झूठे मामले में फंसाया गया था. यह मुआवजा 79 वर्षीय नारायणन द्वारा अपनी अवैध गिरफ्तारी और उत्पीड़न की क्षतिपूर्ति के लिए एक अदालत में राशि बढ़ाने के लिए दायर किए गए मामले को निपटाने के क्रम में सौंपा गया.

    नंबी नारायणन के इस मामले में 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि उनकी गिरफ्तारी गलत है. साथ ही उन्‍हें 50 लाख रुपये की अंतरिम राशि राहत के तौर पर देने को कहा था. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उन्हें अलग से 10 लाख रुपये का मुआवजा सौंपे जाने की सिफारिश की थी. इसके बाद नंबी ने तिरुवनंतपुरम के सेशन कोर्ट में एक केस दायर किया था.

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केरल सरकार ने पूर्व मुख्य सचिव के. जयकुमार को इस मामले को देखने और एक उपयुक्‍त मुआवजा राशि तय करने के लिए कहा था. बाद में अदालत के समक्ष उनके सुझाव प्रस्तुत किए गए और समझौता किया गया. चेक मिलने के बाद नंबी नारायणन ने कहा, 'मैं खुश हूं. यह सिर्फ मेरे द्वारा लड़ी गई पैसे के लिए लड़ाई नहीं है. मेरी लड़ाई अन्याय के खिलाफ थी.'

    1994 में जासूसी के झूठे मामले में आरोप लगाया गया था कि नारायणन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से संबंधित कुछ बेहद गोपनीय दस्तावेज अन्‍य देशों को हस्तांतरित करने में शामिल हैं. नारायणन को दो महीने जेल में रहना पड़ा था. बाद में सीबीआई ने कहा था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप मिथ्या हैं. सीबीआई से पहले इस मामले की जांच केरल पुलिस कर रही थी.

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