होम /न्यूज /राष्ट्र /कुछ लोगों का कोरोना अब कुछ नहीं बिगाड़ सकता, जानिए क्यों?

कुछ लोगों का कोरोना अब कुछ नहीं बिगाड़ सकता, जानिए क्यों?

कोरोना वायरस के नए वैरिएंट /फोटो-सांकेतिक

कोरोना वायरस के नए वैरिएंट /फोटो-सांकेतिक

Covid-19 : कुछ लोगों के शरीर में कोरोना से मुकाबले की जबर्दस्त क्षमता पैदा हो गई है. अब उनका शरीर न सिर्फ उच्च स्तर के ...अधिक पढ़ें

Covid-19. सुनने में कुछ अटपटा लग सकता है. लेकिन यह सही है कि एक तरफ तो दुनियाभर में कोरोना वायरस (Corona Virus) और उसके वेरिएंट्स (Corona Varients) का भय फैला हुआ है. लोग इनके संक्रमण से बीमार पड़ रहे हैं. मर रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनके भीतर ऐसी रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो चुकी है कि कोरोना वायरस या उसका कोई भी वेरिएंट अब उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता. कुछ वैज्ञानिक इस रोग प्रतिरोधक क्षमता को सुपरह्यूमन इम्युनिटी (Super Human Immunity) कह रहे हैं तो कोई-कोई बुलेटप्रूफ इम्युनिटी (Bulletproof Immunity).

हालांकि रोगप्रतिरक्षा वैज्ञानिक (Immunologist) शेन क्रॉटी इस किस्म के व्यक्तियों की बुलेटप्रूफ इम्युनिटी (Bulletproof Immunity) को हाईब्रिड इम्युनिटी (Hybrid Immunity) कहना ज्यादा पसंद करते हैं. इस बारे में उन्होंने साइंस जर्नल के लिए अपने लेख में लिखा, ‘इससे फर्क नहीं पड़ता कि आप इसे क्या कहते हैं. लेकिन कुल मिलाकर यह कोरोना के खिलाफ बहुत ही प्रभावी साबित हुई है. कोविड-19 (Covid-19) से जुड़ी बुरी खबरें हम सब वैसे भी लगातार सुन ही रहे हैं. इसके बीच हाईब्रिड इम्युनिटी (Hybrid Immunity) से जुड़ी खबर निश्चित ही उत्साह बढ़ाने वाली है.’

बीते दिनों कोरोना से जुड़े लगातार कई अध्ययन हुए हैं. इनसे पता चला है कि कुछ लोगों के शरीर में कोरोना से मुकाबले की जबर्दस्त क्षमता पैदा हो गई है. अब उनका शरीर न सिर्फ उच्च स्तर के एंटीबॉडी पैदा कर रहा है, बल्कि उनके एंटीबॉडीज में नई परिस्थितियों के साथ तारतम्य बिठाने की क्षमता भी आ चुकी है. मतलब उनके एंटीबॉडी उसी तरह अपनी क्षमताओं में परिवर्तन कर सकते हैं, जैसे कोरोना अपना रंग-रूप और स्वरूप बदल रह है. यही वजह है कि बुलेटप्रूफ इम्यूनिटी वाले इन लोगों पर कोरोना के अल्फा (Alfa), बीटा (Beta), डेल्टा (Delta), डेल्टा-प्लस (Delta Plus), ओमिक्रॉन (Omicron) जैसे तमाम वेरिएंट्स का कोई असर नहीं हुआ.

इस बात की पिछले महीने जारी एक अन्य अध्ययन के निष्कर्षों से भी पुष्टि होती है. इन अध्ययनों के आधार पर रॉकफेलर यूनिवर्सिटी के विषाणु विज्ञान विशेषज्ञ (Virologist) पॉल बाइनियाज कहते हैं, ‘इस बात की पूरी संभावना है कि भविष्य में इस तरह के लोगों को कुछ नहीं होगा. आने वाले समय में कोरोना के कुछ और वेरिएंट्स भी अगर सामने आते हैं, तो ये लोग उनसे भी आसानी से मुकाबला कर लेंगे.’ रॉकफेलर यूनिवर्सिटी की ही एक अन्य वायरोलॉजिस्ट थियोडोरा हेजियोआनू कहती हैं, ‘आज जो सॉर्स-कोव-2 वायरस पूरी दुनिया में कहर मचा रहा है, उससे काफी अलग सॉर्स-कोव-1 वायरस 20 साल पहले फैला था. मैं दावे से कह सकती हूं कि इन बुलेटप्रूफ इम्युनिटी (Bulletproof Immunity) वाले लोगों के एंटीबॉडी सॉर्स-कोव-1 को भी मात दे सकते हैं.’

लेकिन आखिर ये है कौन लोग?
वैज्ञानिक इस रहस्य की गुत्थी सुलझाते हुए बताते हैं, ‘बुलेटप्रूफ या हाइब्रिड इम्युनिटी वाले असल में वे हैं, जिन्हें शुरुआती दौर में कोरोना का संक्रमण हुआ. उससे वे उबरे और फिर उन्होंने एमआरएनए आधारित वैक्सीन (mRNA based Vaccine) के दोनों डोज लिए. थियोडोरा के मुताबिक, इन लोगों के बारे में हुए अध्ययन से साबित होता है कि एमआरएनए आधारित वैक्सीन कितनी प्रभावी है. उनका दावा है कि भविष्य में अगर इस किस्म के लोग किसी विशेष उद्देश्य के साथ बनाए गए वायरस (Engineered Virus) के संपर्क में भी आते हैं, तो ये उसे निष्क्रिय कर देंगे.’

Tags: COVID 19, Covid-19 Antibodies, Immunity

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें