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OPINION: BJP से हाथ मिलाने को लेकर उहापोह में है AIADMK!

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलानीस्वामी उस तरह से खुले तौर पर बीजेपी का विरोध नहीं कर रहे हैं जिस तरह से लोक सभा के उपाध्यक्ष और पार्टी के सदस्य थंबीदुरई कर रहे हैं.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलानीस्वामी उस तरह से खुले तौर पर बीजेपी का विरोध नहीं कर रहे हैं जिस तरह से लोक सभा के उपाध्यक्ष और पार्टी के सदस्य थंबीदुरई कर रहे हैं.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलानीस्वामी उस तरह से खुले तौर पर बीजेपी का विरोध नहीं कर रहे हैं जिस तरह से लोक सभा के उपाध्यक्ष और पार्टी के सदस्य थंबीदुरई कर रहे हैं.

  • News18.com
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    शेखर अय्यर

    आगामी लोकसभा चुनाव में जीत के लिए तमिलनाडु की 39 सीटों पर बीजेपी नज़र गड़ाए हुए है. पिछली बार बीजेपी को यहां कुल एक सीट मिली थी लेकिन उत्तर भारत के तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों के हालिया परिणामों के बाद पार्टी ज्यादा से ज्यादा सीटें यहां से जीतने की कोशिश में है. यही वजह है कि बीजेपी यहां एआईएडीएमके के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहती है.

    यह बात ज़ाहिर है कि बीजेपी एआईएडीएमके के साथ गठबंधन करने के लिए तैयार है लेकिन कांग्रेस-डीएमके के गठबंधन से अलग बीजेपी-एआईएडीएमके के गठबंधन में मुख्य मसला सीटों के बंटवारे का नहीं है. अपने अंदरूनी झगड़े से परेशान एआईएडीएमके इस बात को तय नहीं कर पा रही है कि बीजेपी से हाथ मिलाकर उसे फायदा होना है. इसलिए चुनाव बाद बीजेपी को समर्थन देना उसके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है.

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    हालांकि, बीजेपी गठबंधन के मामले में एआईएडीएमके से न सुनने के मूड में नहीं है. स्थानीय बीजेपी नेताओं का मानना है कि स्वर्गीय जयललिता की याद में पीएम मोदी ने काफी कुछ किया है. आईएडीएम में कई बार फूट पड़ी लेकिन बीजेपी ने हमेशा कोशिश की कि पार्टी में एकता बनी रहे ताकि दूसरे इसका फायदा न ले पाएं. खासकर शशिकला के भांजे टीटीवी दिनाकरण. कई मंत्रियों के खिलाफ आयकर से संबंधित और दूसरे मामले चल रहे हैं लेकिन बीजेपी ने कोशिश की कि यथास्थिति को बरकरार रखा जाए.

    वास्तव में आरएसएस विचारक एस गुरुमूर्ति जो कि पीएम मोदी के आंख और कान सरीखे रहे हैं और तमिलनाडु की राजनीति में दखल रखते हैं, उन्होंने एआईएडीएमके के साथ गठबंधन करने की सलाह दी. हालांकि, एआईएडीएमके का मानना है कि अगर वह अकेले चुनाव मैदान में उतरती है तो उसे ज़्यादा फायदा हो सकता है.

    इस मामले में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलानीस्वामी उस तरह से खुले तौर पर बीजेपी का विरोध नहीं कर रहे हैं जिस तरह से लोक सभा के उपाध्यक्ष और पार्टी के सदस्य थंबीदुरई कर रहे हैं. कारण है- तमिलनाडु में 18 एआईएडीएमके के विधायकों को अयोग्य घोषित किए जाने के बाद से इन सीटों पर उपचुनाव होने हैं. तब तक के लिए बहुमत पलानीस्वामी के पक्ष में है.

    सूत्रों के अनुसार, दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन को लेकर अनौपचारिक बैठकें हो चुकी हैं. अभी तक के हिसाब से यह फैसला हो सकता है कि कुल लोकसभा सीटों में से आधी पर एआईएडीएमके लड़ेगी और बाकी की आधी सीटें बीजेपी, रामादोस की पार्टी पीएमके और कैप्टन विजयकांत की अगुवाई वाली डीएमडीके साथ बांटेगी. हाल ही में पीएम मोदी ने वीडियो कांफ्रेंस के ज़रिए तमिलनाडु के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और कहा कि उनकी पार्टी के दरवाज़े पुराने दोस्तों के लिए हमेशा खुले हैं.

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    लेकिन, थंबीदुरई के विरोध के कारण एआईएडीएमके और बीजेपी का गठबंधन आसान नहीं होगा. पार्टी में थंबीदुरई सहित कुछ और भी नेताओं का मानना है कि तमिलनाडु में लोगों का रुख बीजेपी के खिलाफ है. मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव परिणाम को देखते हुए ये बात और महत्त्वपूर्ण हो जाती है.


    वहीं, मोदी 2014 का चुनाव नहीं भूल सकते हैं जब जयललिता को 39 में से 37 सीटें मिली थीं. बीजेपी को कन्याकुमारी में सिर्फ एक सीट मिली थी और दूसरी सीट पीएमके को मिली थी. भले ही मोदी ने तमिलनाडु के लिए रक्षा क्षेत्र सहित कई प्रोजेक्ट्स की घोषणा की हो लेकिन राजनीति में ये सब चीजें मुश्किल से ही काम करती हैं.
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