देश को मिली राफेल की दूसरी खेप, फ्रांस से नॉनस्टॉप उड़ान भरकर जामनगर एयरबेस पहुंचे 3 लड़ाकू विमान

भारत ने राफेल सौदे में करीब 710 मिलियन यूरो (यानि करीब 5341 करोड़ रुपये) लड़ाकू विमानों के हथियारों पर खर्च किए हैं.
भारत ने राफेल सौदे में करीब 710 मिलियन यूरो (यानि करीब 5341 करोड़ रुपये) लड़ाकू विमानों के हथियारों पर खर्च किए हैं.

राफेल की दूसरी खेप भारत पहुंचने के बाद भारतीय वायुसेना ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है. इसके बाद तीन विमान जनवरी और फिर मार्च में 3, अप्रैल में 7 राफेल लड़ाकू विमान भारत को मिल जाएंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 4, 2020, 10:42 PM IST
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नई दिल्ली/अहमदाबाद.  भारत (India) को आज राफेल की दूसरी खेप (Second Batch Of Rafale Jet) मिल गई है. राफेल विमान फ्रांस (France) से सीधे गुजरात के जामनगर एयरबेस (Jamnagar Airbase) पर पहुंचें. इसके बाद तीन विमान जनवरी और फिर मार्च में 3, अप्रैल में 7 राफेल लड़ाकू विमान भारत को मिल जाएंगे. इस तरह अगले साल अप्रैल तक देश में विमानों की संख्या 21 हो जाएगी. इसमें से 18 लड़ाकू विमान गोल्डन एरो स्क्वाड्रन में शामिल हो जाएंगे.

राफेल की दूसरी खेप भारत पहुंचने के बाद भारतीय वायुसेना ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है. भारतीय वायुसेना ने इस संबंध में ट्वीट किया है, राफेल विमानों की दूसरी खेप चार नवंबर, 2020 को फ्रांस से उड़ान भरने के बाद बिना ठहरे शाम 8:14 बजे भारत पहुंची. गौरतलब है कि पांच राफेल (Rafale) लड़ाकू विमानों की पहली खेप 10 सितंबर को अंबाला एयरबेस पर औपचारिक रूप से भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) में शामिल हुई थी.
क्यों खास है राफेल विमान- राफेल अत्याधुनिक हथियारों और मिसाइलों से लैस हैं. सबसे खास है दुनिया की सबसे घातक समझे जाने वाली हवा से हवा में मार करने वाली मेटयोर (METEOR) मिसाइल.- राफेल विमान चीन, पाकिस्तान, रूस तो क्या किसी भी एशियाई देश के पास नहीं है.- राफेल लड़ाकू विमान 4.5 जेनरेशन मीड ओमनी-पोटेंट रोल एयरक्राफ्ट है. मल्टीरोल होने के कारण दो इंजन वाला (टूइन) राफेल फाइटर जेट एयर-सुप्रेमैसी यानी हवा में अपनी बादशाहत कायम करने के साथ-साथ डीप-पैनेट्रेशन यानी दुश्मन की सीमा में घुसकर हमला करने में भी सक्षम है.देखें VIDEO...





- राफेल दुश्मन की जमीन में अंदर तक दाखिल होकर बमबारी कर तबाही मचा सकता है. इसलिए राफेल को मल्टी रोल लड़ाकू विमान भी कहा जाता है.
इस वक्त क्यों महत्वपूर्ण हैं राफेल विमान
गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच कई महीने से चले आ रहे सीमा विवाद का अभी कोई हल निकलता नहीं दिख रहा है. दोनों देशों के बीच कई राउंड की वार्ता हो चुकी है. भारत ने अपनी तरफ से चीन को स्पष्ट कर दिया है कि सीमाओं पर अशांति के साथ दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य नहीं रह सकते.

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