कोरोना: दूसरी लहर का कहर हल्का तो हुआ लेकिन अभी जुलाई तक नहीं होगा अंत: एक्सपर्ट

भारत में कोरोना की दूसरी लहर का अंत आने में वक्त लगेगा. (सांकेतिक तस्वीर)

संक्रामक बीमारियों के एक्सपर्ट शाहिद जमील (Shahid Jameel) का कहना है कि भले ही अभी कुछ राज्यों में केस कम होते दिख रहे हों लेकिन दूसरी लहर का अंत होने में अभी कुछ महीने और लगेंगे. शाहिद जमील के मुताबिक जुलाई के अंत तक दूसरी लहर का भी अंत होगा.

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    नई दिल्ली. कोरोना की दूसरी लहर (second COVID-19 wave) की रफ्तार कुछ राज्यों में कमजोर पड़ती दिख रही है. मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश के नौ राज्यों में अब नए मामलों में कमी आती दिख रही है. इनमें महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और दिल्ली जैसे जबरदस्त प्रभावित राज्य भी हैं. लेकिन संक्रामक बीमारियों के एक्सपर्ट शाहिद जमील (Shahid Jameel) का कहना है कि भले ही अभी केस कम होते दिख रहे हों लेकिन दूसरी लहर का अंत होने में अभी कुछ महीने और लगेंगे. शाहिद जमील के मुताबिक जुलाई के अंत तक दूसरी लहर का भी अंत होगा.

    उन्होंने यह भी कहा कि देश में दूसरी लहर के प्रचंड प्रकोप के पीछे नए वैरिएंट भी जिम्मेदार हो सकते हैं लेकिन इस बात के संकेत नहीं हैं कि ये ज्यादा घातक हैं. उन्होंने यह भी आशंका जाहिर है कि देश में दूसरी लहर में केस उतनी तेजी से कम भी नहीं होंगे जितने सामान्य तौर पर दूसरी या तीसरी लहर में होते हैं.



    इस बार संक्रमितों की संख्या बहुत ज्यादा, महामारी को ढलने में लगेगा वक्त
    शाहिद जमील का कहना है कि पहली लहर में एक दिन में देश में सर्वाधिक मरीजों की संख्या 96-97 हजार रही थी जो दूसरी लहर में करीब 4 लाख है. इसलिए इस लहर को ढलने में भी वक्त लगेगा. वैसे भी अभी कई राज्य हैं जहां पर नए मामलों में बढ़ोतरी भी हो रही है.

    सुपरस्प्रेडिंग इवेंट्स का भी किया जिक्र
    शाहिद जमीन का यह भी कहना है कि भारत में कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी सही नहीं है. उनका कहना है कि हम जिस तरीके से कोरोना मौतों का आंकड़ा इकट्ठा करते हैं, वो तरीका ही गलत है. उन्होंने कहा कि देश की कोरोना की दूसरी लहर फैलने के पीछे कोविड प्रोटोकॉल का पालन न करना अहम वजह है. इसके अलावा उन्होंने चुनावी रैलियों और धार्मिक आयोजनों जैसे सुपरस्प्रेडिंग इवेंट्स को भी कोरोना के प्रसार में जिम्मेदार माना.