कर्नाटक चुनाव: BJP की दूसरी लिस्ट में 'दागियों' को टिकट, मुस्लिम और ईसाई नदारद

इस चुनाव में काफी दागी उम्मीदवारों को उतारा गया है. बीजेपी ने एक बार फिर बाहुबलियों को टिकट देने में कोई झिझक नहीं दिखाई.

D P Satish | News18.com
Updated: April 16, 2018, 11:26 PM IST
कर्नाटक चुनाव: BJP की दूसरी लिस्ट में 'दागियों' को टिकट, मुस्लिम और ईसाई नदारद
इस चुनाव में काफी दागी उम्मीदवारों को उतारा गया है. बीजेपी ने एक बार फिर बाहुबलियों को टिकट देने में कोई झिझक नहीं दिखाई.
D P Satish
D P Satish | News18.com
Updated: April 16, 2018, 11:26 PM IST
बीजेपी ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए अपने 82 उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट जारी कर दी. ये सूची साबित करती है कि पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा की पार्टी में अभी भी चलती है, क्योंकि वह अपने ज्यादातर वफादारों को टिकट दिलाने में कामयाब रहे हैं.

बीजेपी शासन के दौरान जेल गए चार भाजपा विधायकों को भी पार्टी में टिकट दिया गया है. इससे ऐसा ही प्रतीत होता है कि भगवा दल किसी भी दूसरी बात की बजाय बस जीत हासिल करने पर ही ध्यान लगाए है. पिछले हफ्ते तक बैकफुट पर रहे येदियुरप्पा उम्मीदवारों के चयन के मामले में पार्टी के अंदर फिर से मज़बूत होते दिखे.

उनके वफादार, पूर्व मंत्री कट्टा सुब्रह्मण्य नायडू, कृष्णा शेट्टी और हरातलु हलप्पा जो जेल में थे, उन्हें भी टिकट मिला है. माइनिंग माफिया जी. सोमशेखर रेड्डी को भी बेल्लारी सिटी विधानसभा सीट से टिकट दिया गया है. सोमशेखर रेड्डी को ज़मानत दिलाने के लिए जज को कथित रूप से रिश्वत देने के आरोप में उनके छोटे भाई को जेल जाना पड़ा था.

यहां तक ​​कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी बेल्लारी के रेड्डी बंधुओं के लिए सार्वजनिक रूप से कहा था कि उन्हें बेल्लारी बंधुओं से कोई मतलब नहीं, हालांकि बाद में सोमशेखर रेड्डी व उनके करीबी पारिवारिक मित्र सन्ना फकिरप्पा को बीजेपी की लिस्ट में जगह मिल गई.

इसके अलावा पार्टी बदलने वाले तीन नेता कुमार बंगारप्पा, एन एल नरेंद्र बाबू और संदेश स्वामी भी सूची में शामिल हैं. लेकिन जिन्होंने खुले तौर पर येदियुरप्पा का विरोध किया था, उन लोगों को लिस्ट में जगह नहीं मिली.

दूसरी सूची में करीब 32 उम्मीदवार लिंगायत समुदाय से हैं, वहीं वोक्कलिगा समुदाय से 10, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से ताल्लुक रखने वाले 20 उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है. यहां गौर करने वाली एक और बात यह है कि बीजेपी की पहली और दूसरी लिस्ट में एक भी मुस्लिम या ईसाई उम्मीदवार नहीं है. ईसाई या मुसलमानों को टिकट नहीं देने के कारण ऐसा लगता है कि पार्टी उत्तर प्रदेश की ही रणनीति को फिर से दोहरा रही है.


इस बात को लेकर यूपी में भी पार्टी को लोगों की आलोचना का शिकार होना पड़ा था लेकिन पार्टी ने ये कहकर अपना बचाव कर लिया था कि लोगों को सिर्फ जीत पर ध्यान देना चाहिए. गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मैं सभी मुस्लिम भाइयों व बहनों से अपील करता हूं कि वो हमारे साथ जुड़ें. हम नफरत को पनपने नहीं देंगे.
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इस चुनाव में काफी दागी उम्मीदवारों को उतारा गया है. जब सत्ताधारी कांग्रेस ने 218 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की और पूरा ज़ोर इस बात पर रखा कि कैसे चुनाव जीता जाए तो बीजेपी ने भी एक बार फिर बाहुबलियों को टिकट देने में कोई झिझक नहीं दिखाई.


पार्टी ने दूसरी सूची में 22 नए चेहरों को भी मौका दिया है. कांग्रेस की तुलना में बीजेपी की लिस्ट में भाजपा के पास ज़्यादा नए चेहरे हैं.

येदियुरप्पा के वफादार मुरुगेश निरानी, ​​सिद्दू सावदी, कलकाप्पा बंडी, मदालु वीरुपाक्षप्पा, अरागा ज्ञानेंद्र, बी सुकुमार शेट्टी, प्रो मल्लिकार्जुनप्पा और निरंजनकुमार को भी टिकट प्राप्त हुए हैं. कठोर विपक्ष के बावजूद, येदियुरप्पा अपने वफादार और पूर्व मंत्री हरतालु हलप्पा को मैदान में उतारने में कामयाब रहे. हरतालु हलप्पा को पिछले साल बलात्कार के आरोप से मुक्त कर दिया गया था. इसी सीट से भूतपूर्व बीजेपी विधायक बेलूर गोपाल कृष्ण ने बीएस युदियुरप्पा व उनके बेटे के ऊपर ये आरोप लगाया था.

पहली सूची में 72 नामों को जारी किए जाने के बाद भाजपा में अंदरूनी टकराव बढ़ गया था. ऐसे में येदियुरप्पा ने हाईकमान को इस बात के लिए मना लिया कि उनके उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाए और उन्होंने अपने उम्मीदवारों के लिए टिकट भी पा लिया.

बीजेपी द्वारा चार दागी चेहरों को मैदान में उतारने के बाद कांग्रेस के एक टॉप नेता ने कहा कि पार्टी शांतिनगर से विधायक एनए हैरिस को फिर से मैदान में उतारने की सोच रही है. हैरिस के उम्मीदवारी पर उनके बेटे मोहम्मद नलपद की बेंगलुरु के एक पब में गुंडागिरी के चलते रोक के रखा गया था.

एक दूसरे कांग्रेस के नेता ने कहा कि हैरिस ने कुछ भी गलत नहीं किया. उनका बेटा दोषी है, हमने उसे जेल भेज दिया है. अगर बीजेपी कट्टा सुब्रमण्य नायडू और कृष्णैया शेट्टी जैसे लोगों को मैदान में उतार सकती है, तो हम हैरिस को फिर से नॉमिनेट क्यों नहीं कर सकते.

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