कोविड की दूसरी लहर पड़ी कमजोर या मिल रहे तीसरी लहर के संकेत? जानें क्या कहते हैं आंकड़े

देश में कोरोना की दूसरी लहर के बाद तीसरी की आशंका जाहिर की जा रही है. (AP Photo/Mahesh Kumar A.)

Coronavirus In India: फरवरी 11 से 9 मई के दौरान रोजाना पाए जाने वाले मामले 36 गुना तक बढ़ गए. 9 मई दूसरी लहर का पीक था. इसके बाद रोजाना पाए जाने वाले मामलों में कमी तो दर्ज की गई.

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    नई दिल्ली. देश ने कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus In India) की दूसरी भयावह लहर (Corona 2nd Wave) देखी. फरवरी 11 से 9 मई के दौरान रोजाना पाए जाने वाले मामले 36 गुना तक बढ़ गए.  9 मई दूसरी लहर का पीक था. इसके बाद रोजाना पाए जाने वाले मामलों में कमी तो दर्ज की गई. यह देखा जा सकता है कि नए मामले ज्यादा नहीं बढ़ रहे हैं, लेकिन यह गिरावट तेजी से नहीं हो रही है. इसके साथ ही पॉजिटिविटी रेट में हो रहा इजाफा भी चिंता का विषय है. 9 मई को पीक पर पहुंचने के बाद भारत में कोविड के मामलों का ग्राफ नीचे गिरने लगा. कोविड के दूसरी लहर के दो महीने बीत जाने के बाद भी इंफेक्शन का ग्राफ चिंताजनक है.

    रोजाना पाए जाने वाले कोविड केस में कमी आने का ट्रेंड धीमा है और पॉजिटिविटी रेट हल्का सा बढ़ा है. बीते कुछ दिनों से कोविड के नए मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. हालांकि बिना 7 दिनों के औसत में बढ़ोतरी के अभी यह कहना जल्दीबाजी होगी कि यह तीसरी लहर की शुरुआत है. अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार 24 जून को, भारत में रोजाना पाए जाने वाले मामलों और एक्टिव केस का 7-दिन का औसत क्रमशः 53,123 और 683,544 था. दो हफ्ते बाद, 7 जुलाई को, यह संख्या 42,547 और 486,415 थी, जो दूसरी लहर के चरम के बाद सबसे कम थी. इससे पता चलता है कि अभी हम दूसरी लहर के नीचे जाने के रास्ते में हैं



    पॉजिटिविटी रेट ज्यादा
    बता दें कि पहली लहर के चरम के बाद रोजाना पाए जाने वाले मामलों का औसत 10,988 और कुल एक्टिव केस 1,38,837 था, जबकि दूसरी लहर में यह संख्या फिलहाल बहुत अधिक है. मौजूदा हालात को लेकर चिंता की बात यह है कि एक महीने पहले संक्रमण के ग्राफ का स्वरूप बदल गया. नए मामलों का 7-दिन का औसत 2 जून को प्रतिदिन 6.7% की दर से घट रहा था, जबकि अब नए मामले बहुत धीमी दर से घट रहे हैं. नए मामलों में सात दिनों की औसत कमी 7 जुलाई को 0.96% थी. इसी तरह एक्टिव मामलों में कमी की दर 9 जून को 5.23% थी, जो 7 जुलाई को घटकर 1.8% हो गई है.

    कोविड की दूसरी लहर के पीक के दौरान रोजाना की पॉजिटिविटी रेट का सात दिन का औसत 9 मई को 22.76% के उच्च स्तर पर पहुंच गया. फिर यह गिरावट आई और 2 जुलाई को 2.19% के निचले स्तर पर पहुंच गई. लेकिन पिछले सप्ताह में यह दर थोड़ी बढ़ गई है. 7 जुलाई को  7 दिन के औसत के आधार पर पॉजिटिविटी रेट 2.27% था. भले ही यह वृद्धि बहुत छोटी है, लेकिन यह चिंता बढ़ा रही है.

    राज्यों के स्तर पर क्या है हाल?
    राज्य के स्तर पर बात करें तो छह छोटे उत्तर-पूर्वी राज्यों और केरल में नए मामलों का 7 दिनों का औसत बढ़ रहा है. पिछले एक सप्ताह में 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में  पॉजिटिविटी रेट बढ़ी है. 4 राज्य ऐसे हैं, जहां 7 जुलाई को पॉजिटिविटी रेट का 7-दिनों का औसत 10% से अधिक था और अन्य चार जहां पॉजिटिविटी रेट 5% -10% थी. पॉजिटिविटी रेट में वृद्धि का मतलब है कि नए मामलों की संख्या में भी बढ़ोतरी होगी.

    हाउ इंडिया लिव्स के एक डेटा के अनुसार 707 जिलों में से 63 जिलों में 20 जून से 6 जुलाई के बीच 7 दिनों के औसत मामलों में वृद्धि हुई है. इनमें से 36 उत्तर-पूर्वी राज्यों से हैं और बाकी 18 केरल, महाराष्ट्र और ओडिशा से हैं. पिछले दो सप्ताह में कुछ जिलों और दूसरे राज्यों में भी मामले बढ़े हैं.

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