समलैंगिकता पर सुनवाई: धारा 377 की बहस से धर्म को रखें बाहर, केंद्र की सुप्रीम कोर्ट में दलील

गुरुवार को तुषार मेहता ने दोहराया कि धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा सरकार को वह मान्य होगा.

Utkarsh Anand | News18Hindi
Updated: July 12, 2018, 5:58 PM IST
समलैंगिकता पर सुनवाई: धारा 377 की बहस से धर्म को रखें बाहर, केंद्र की सुप्रीम कोर्ट में दलील
गुरुवार को तुषार मेहता ने दोहराया कि धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा सरकार को वह मान्य होगा.
Utkarsh Anand | News18Hindi
Updated: July 12, 2018, 5:58 PM IST
सुप्रीम कोर्ट में आईपीसी की धारा 377 की वैधता को लेकर सुनवाई चल रही है. गुरुवार को बहस के दौरान केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह करते हुए कहा कि ‘धारा 377 को अपराध माना जाए या नहीं’ इस बहस में धार्मिक मान्यताओं को बाहर रखा जाए.

गुरुवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने संक्षिप्त निवेदन में संवैधानिक बेंच से धर्म के मामले में स्पष्ट होने का निवेदन किया. उन्होंने कहा कि कोर्ट को धारा 377 की संवैधानिकता और वैधता पर अपनी चर्चा को तब तक सीमित रखना चाहिए जब तक कि यह दो समलैंगिक व्यस्कों के बीच निजी तौर पर बने संबंधों को अपराध मानता है, जिसके लिए अधिकतम आजीवन कारावास की सजा तक हो सकती है.

इसके बाद मेहता ने बेंच के सामने देवदत्त पटनायक की एक पुस्तक रखी, जिसमें कुछ धार्मिक कहानियां हैं. दरअसल दूसरे पक्ष ने भी इस किताब से कुछ उदाहरण पेश किए थे, जिस पर मेहता ने कोर्ट से कहा कि उन्हें लगता है कि धार्मिक मान्यताओं और चरित्रों को इस बहस से बाहर रखा जाना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने दोहराया कि धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा सरकार को वह मान्य होगा.

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इसी बीच धारा 377 के पुनर्मूल्यांकन के लिए अपील करने वाले याचिकाकर्ता सुरेश कुमार कौशल ने मामले में हस्तक्षेप किया और दंड प्रावधान के खिलाफ तर्क दिया. दो ईसाई संघों के वकील मनोज जॉर्ज ने धारा 377 को खत्म करने का विरोध करते हुए मामले में केंद्र सरकार पर यू-टर्न लेने का आरोप लगाया.

हालांकि तुषार मेहता ने इस आरोप को खारिज कर दिया. बेंच ने जवाब देते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा दी गई ‘रियायत’ के बावजूद, धारा 377 की वैधता न्यायिक घोषणाओं और संवैधानिक मानदंडों के विवादों पर अभी भी तय की जाएगी. उम्मीद की जा रही है कि अगले सप्ताह मंगलवार को बेंच इस मामले पर अपना फैसला सुना देगी.
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